Sonbhadra News: वर्टिकल सिस्टम से पूरा प्रदेश अंधेरे में, बिजली व्यवस्था पर भड़के कर्मचारी
Sonbhadra News: सोनभद्र में विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति ने वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग को बिजली व्यवस्था की बदहाली का जिम्मेदार बताते हुए बड़े आंदोलन की चेतावनी दी।
वर्टिकल सिस्टम से पूरा प्रदेश अंधेरे में, बिजली व्यवस्था पर भड़के कर्मचारी (Photo- Newstrack)
Sonbhadra News: सोनभद्र। उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था को लेकर अब विभाग के भीतर से ही तीखी आवाजें उठने लगी हैं। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने पावर कॉरपोरेशन की तथाकथित “वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग व्यवस्था” को प्रदेश की बिजली व्यवस्था के लिए विनाशकारी बताते हुए कहा है कि इस अव्यवहारिक मॉडल ने न सिर्फ उपभोक्ताओं को परेशान किया है, बल्कि बिजली कर्मियों को भी मानसिक और प्रशासनिक उत्पीड़न की स्थिति में पहुंचा दिया है।
बिजली व्यवस्था बदहाल
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि राजधानी लखनऊ समेत पूरे प्रदेश में बिजली व्यवस्था लगातार बदहाल होती जा रही है। घंटों कटौती, गलत बिलिंग, नए कनेक्शन में देरी, स्मार्ट प्रीपेड मीटर की तकनीकी विफलता और शिकायतों के अंबार ने जनता का जीना दूभर कर दिया है, लेकिन शीर्ष प्रबंधन जमीन की हकीकत से पूरी तरह कटा हुआ है।
समिति का कहना है कि पहले किसी भी क्षेत्र में बिजली समस्या होने पर संबंधित जूनियर इंजीनियर (जेई) अथवा एसडीओ सीधे जिम्मेदार होते थे, जिससे उपभोक्ताओं को तत्काल राहत मिल जाती थी। मगर नई व्यवस्था में कार्यों को अलग-अलग विंगों में बांटकर जवाबदेही ही खत्म कर दी गई है। अब उपभोक्ता यह समझ ही नहीं पा रहा कि उसकी समस्या का असली जिम्मेदार कौन है।
संघर्ष समिति ने कहा कि “फेसलेस सिस्टम” के नाम पर ऐसी व्यवस्था लागू कर दी गई है, जिसमें जनता और विभाग के बीच सीधा संवाद लगभग समाप्त हो गया है। शिकायतें 1912 और ऑनलाइन पोर्टलों पर दर्ज तो हो रही हैं, लेकिन उनका निस्तारण समय से नहीं हो रहा। अधिकारी सिर्फ पोर्टलों और फाइलों के पीछे छिपे बैठे हैं, जबकि आम उपभोक्ता बिजली संकट से जूझ रहा है।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि बिलिंग टीम, मीटर टीम और लाइन स्टाफ को अलग-अलग कर देने से जमीनी स्तर पर समन्वय पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। एक छोटे से कार्य के लिए उपभोक्ताओं को कई-कई कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इससे विभागीय कार्यप्रणाली में भारी अव्यवस्था फैल गई है और जनता में गुस्सा लगातार बढ़ रहा है।
स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था पर उठाए गए
संघर्ष समिति ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए। समिति के अनुसार बैलेंस मिसमैच, गलत बिलिंग और तकनीकी खामियों ने उपभोक्ताओं की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है। हजारों उपभोक्ताओं के बिल समय से जनरेट नहीं हो पा रहे हैं, जबकि नए विद्युत संयोजन भी महीनों तक लंबित पड़े हैं।
कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि शीर्ष प्रबंधन तुगलकी फैसले थोपकर पूरी बिजली व्यवस्था को बर्बादी की ओर धकेल रहा है। बिजली कर्मचारी संसाधनों की कमी, अत्यधिक कार्यभार और लगातार उत्पीड़नात्मक नीतियों के बीच काम करने को मजबूर हैं। ऐसे हालात में व्यवस्था संभालना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है।
संघर्ष समिति ने साफ चेतावनी दी कि यदि वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग की विफल व्यवस्था को तत्काल वापस नहीं लिया गया और अभियंताओं व कर्मचारियों को विश्वास में लेकर व्यावहारिक व्यवस्था लागू नहीं की गई, तो प्रदेशभर के बिजली कर्मचारी व्यापक आंदोलन छेड़ने को बाध्य होंगे। कर्मचारी अब सड़कों पर उतरकर प्रबंधन की मनमानी के खिलाफ लोकतांत्रिक संघर्ष करेंगे।
समिति ने प्रदेश सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि यदि ऊर्जा निगमों में जवाबदेही, समन्वय और जमीनी कार्यप्रणाली बहाल नहीं की गई तो हालात और विस्फोटक हो सकते हैं, जिसकी पूरी जिम्मेदारी पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की होगी।
उत्पीड़न के विरोध में चल रहे जनजागरण अभियान के तहत शनिवार को मिर्जापुर और प्रयागराज में संघर्ष समिति की सभाएं आयोजित की गईं। सभाओं को केंद्रीय पदाधिकारियों जितेन्द्र सिंह गुर्जर, महेन्द्र राय, मोहम्मद वसीम, जवाहर लाल विश्वकर्मा और प्रेम नाथ राय ने संबोधित किया।
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि बिजली कर्मियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है और यदि प्रबंधन ने जिद नहीं छोड़ी तो आने वाले दिनों में प्रदेशव्यापी आंदोलन और तेज होगा।