Sonbhadra News: सोनभद्र में बिजली कर्मियों का आक्रोश: शोषण और हादसों पर ऊर्जा निगमों से जवाब की मांग
Sonbhadra News: सोनभद्र में बिजली विभाग के संविदा और आउटसोर्स कर्मियों की समस्याओं को लेकर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने आवाज उठाई है।
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Sonbhadra News: उत्तर प्रदेश एक सोनभद्र जनपद में ऊर्जा निगमों में कार्यरत संविदा और आउटसोर्स बिजली कर्मियों की स्थिति को लेकर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने गंभीर सवाल उठाए हैं। समिति ने आरोप लगाया है कि सरकार द्वारा आउटसोर्स सेवा निगम के गठन के बावजूद हजारों संविदा कर्मियों को अब तक उसके दायरे में नहीं लाया गया है, जिससे उनका आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक शोषण लगातार जारी है। समिति का कहना है कि इसका असर न केवल कर्मचारियों के जीवन पर पड़ रहा है, बल्कि प्रदेश की बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
संघर्ष समिति की ओर से बुधवार को कहा गया कि बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में संविदा कर्मियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन उन्हें न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा और सुरक्षित कार्य परिस्थितियां तक उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। कई स्थानों पर कर्मियों से कार्य तो लिया जा रहा है, लेकिन उनके अनुरूप अनुबंध नहीं किए गए हैं और निर्धारित मानकों से कम वेतन का भुगतान किया जा रहा है।
49 दिनों में 56 हादसे, 30 कर्मियों की गई जान
समिति ने बिजली कर्मियों के साथ बढ़ती दुर्घटनाओं को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि बीते 49 दिनों में 56 आउटसोर्स कर्मी दुर्घटनाओं का शिकार हुए हैं। इनमें 30 कर्मियों की मौत हो चुकी है, जबकि 26 गंभीर रूप से घायल हुए हैं। समिति का आरोप है कि यह स्थिति ऊर्जा निगम प्रबंधन की संविदा कर्मियों के प्रति उपेक्षापूर्ण नीति और सुरक्षा मानकों की अनदेखी का परिणाम है। समिति का कहना है कि अनुभवी कर्मियों को हटाने और प्रशिक्षित जनशक्ति की कमी ने हालात को और गंभीर बना दिया है। पर्याप्त प्रशिक्षण और सुरक्षा उपकरणों के अभाव में कर्मियों की जान जोखिम में पड़ रही है।
18 हजार न्यूनतम वेतन सहित कई मांगें उठाईं
संघर्ष समिति ने सरकार से मांग की है कि ऊर्जा निगमों के सभी संविदा कर्मियों को तत्काल आउटसोर्स सेवा निगम के अंतर्गत लाया जाए और सभी आउटसोर्स कर्मियों के लिए न्यूनतम 18 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही कार्य के अनुरूप विधिवत अनुबंध किए जाएं और आउटसोर्स सेवा निगम के प्रावधानों के अनुसार वेतन भुगतान कराया जाए।समिति ने पावर कॉरपोरेशन के आदेशों एवं ऊर्जा मंत्री के निर्देशों का पालन करते हुए हटाए गए संविदा कर्मियों को पुनः कार्य पर लेने की भी मांग की है।
सुरक्षा, इलाज और आश्रितों को सहायता की मांग
संघर्ष समिति ने बिजली कर्मियों की दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण, आधुनिक सुरक्षा उपकरण और आवश्यक जनशक्ति उपलब्ध कराने की मांग उठाई है। इसके अलावा दुर्घटना में घायल कर्मियों के निःशुल्क एवं कैशलेस उपचार तथा मृतक कर्मियों के आश्रितों को आर्थिक सहायता और रोजगार उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है।समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि बिजली कर्मियों पर हो रहे उत्पीड़न की कार्यवाहियां समाप्त कर औद्योगिक संबंधों को सामान्य बनाया जाए तथा संवाद की बंद प्रक्रिया पुनः शुरू की जाए। उनका कहना है कि यदि संविदा कर्मियों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो इसका असर बिजली व्यवस्था और औद्योगिक माहौल दोनों पर पड़ सकता है।