Sonbhadra News: ऊर्जा निगमों में उबाल: कार्रवाई से तिलमिलाए बिजली कर्मी, आंदोलन ने पकड़ी रफ्तार
Sonbhadra News: सोनभद्र में ऊर्जा निगमों की नीतियों और कार्रवाई के विरोध में बिजली कर्मचारियों ने आंदोलन तेज कर दिया है। कर्मचारियों ने उत्पीड़न बंद करने और निजीकरण नीति वापस लेने की मांग की है।
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Sonbhadra News: प्रदेश के ऊर्जा निगमों में इन दिनों असंतोष की चिंगारी तेजी से भड़कती नजर आ रही है। बिजली कर्मियों पर लगातार हो रही कार्रवाई और निजीकरण की नीतियों के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने अब आंदोलन को और तेज करने का ऐलान कर दिया है। जनजागरण अभियान के तहत बुधवार को गाजीपुर और वाराणसी में आयोजित विरोध सभाओं में कर्मचारियों का गुस्सा खुलकर सामने आया, जहां प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि ऊर्जा निगमों का प्रबंधन बिजली व्यवस्था संभालने में विफल साबित हो रहा है, लेकिन अपनी कमियों को छिपाने के लिए कर्मचारियों पर दमनात्मक कार्रवाई की जा रही है। भीषण गर्मी के बीच प्रदेश की बिजली व्यवस्था दबाव में है, कई स्थानों पर उपभोक्ताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, फिर भी प्रबंधन कर्मचारियों से संवाद करने के बजाय टकराव की नीति अपना रहा है।
समिति ने कहा कि वर्षों से कम वेतन पर काम कर रहे संविदा कर्मियों को डाउनसाइजिंग के नाम पर बाहर किया जा रहा है। जिन कर्मचारियों ने दो-दो दशक तक बिजली व्यवस्था को संभाला, आज उन्हीं की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा कर दिया गया है। दूसरी ओर वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के जरिए नियमित पदों को खत्म किए जाने से विभागीय व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इसका खामियाजा आम उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है।संघर्ष समिति के नेताओं ने स्पष्ट कहा कि कर्मचारियों पर की गई अधिकांश कार्रवाई किसी भ्रष्टाचार या अनुशासनहीनता की वजह से नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के कारण की गई है। इसे कर्मचारी अधिकारों का खुला दमन बताते हुए नेताओं ने सभी कार्रवाई तत्काल वापस लेने की मांग की।
विरोध सभाओं को संबोधित करते हुए संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, माया शंकर तिवारी और मोहम्मद वसीम ने कहा कि यदि कर्मचारियों का उत्पीड़न बंद नहीं हुआ तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी रूप दिया जाएगा। नेताओं ने चेतावनी दी कि बिजली कर्मियों को नजरअंदाज कर ऊर्जा व्यवस्था को सुचारु रखना संभव नहीं है।संघर्ष समिति ने मांग की कि ऊर्जा निगम प्रबंधन तत्काल वार्ता का रास्ता अपनाए, कर्मचारियों को विश्वास में ले और गर्मी के मौसम में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करे। कर्मचारियों ने साफ संकेत दिए कि अब वे चुप बैठने वाले नहीं हैं और अधिकारों की लड़ाई निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ चुकी है।