UP BJP में होने वाला है कुछ बड़ा? लखनऊ से दिल्ली तक चल रहीं मैराथन बैठकें, अध्यक्ष को लेकर फैसला जल्द

UP BJP New President Election: माना जा रहा है कि जनवरी माह के अंत तक यूपी भाजपा को नया मुखिया मिल सकता है। पार्टी जल्द ही यूपी भाजपा अध्यक्ष को लेकर बड़ा ऐलान कर सकती है।

Update:2025-12-01 08:57 IST

UP BJP New President

UP BJP New President Election: उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी में एक बार फिर नए प्रदेश अध्यक्ष चुनाव को लेकर गहमागहमी तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि जनवरी माह के अंत तक यूपी भाजपा को नया मुखिया मिल सकता है। पार्टी जल्द ही यूपी भाजपा अध्यक्ष को लेकर बड़ा ऐलान कर सकती है। इसके लिए लखनऊ से लेकर दिल्ली तक मैराथन बैठकों का दौर भी तेज हो गया है। पिछले साल अक्टूबर में भाजपा के सांगठनिक चुनाव शुरू हुए थे।

तब यह सामने आया कि साल 2025 की शुरूआत में यूपी भाजपा को नया अध्यक्ष मिल जाएगा। मार्च में 70 जिलाध्यक्षों के नाम भी घोषित कर दिये गये। लेकिन उसके बाद से लगातार प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव टलता ही चला रहा है। कभी पहलगाम अटैक, उपराष्ट्रपति चुनाव समेत कई वजहें सामने आती गयीं और यूपी भाजपा अध्यक्ष का चुनाव टलता चला गया। अभी हाल ही में 14 और जिलाध्यक्षों के नाम की घोषणा कर दी गयी है। इस तरह यूपी में अब तक 84 जिलाध्यक्षों के नाम जारी किये जा चुके हैं। वहीं नियम के मुताबिक प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के लिए 50 फीसदी का चयन जरूरी है।

कई राज्यों में नियुक्त होने हैं प्रदेश अध्यक्ष

बिहार, उत्तर प्रदेश के साथ ही दिल्ली, हरियाणा और कर्नाटक में अध्यक्ष पद का चुनाव होना है। बिहार विधानसभा चुनाव संपन्न हो जाने के बाद दिल्ली में भी पार्टी संगठन की बैठकें तेज हो गयी हैं। ऐसे में यह माना जा रहा है कि जल्द ही राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी सहित प्रमुख राज्यों में अध्यक्षों के नाम पर सहमति बन सकती है। इसी हफ्ते राजधानी लखनऊ में भी संगठन के पुनर्गठन को लेकर कई बैठकें होनी है। साथ ही दिल्ली में पार्टी नेतृत्व लगातार बैठक कर रहा है। 16 दिसंबर से लेकर 14 जनवरी तक खरमास रहेगा। ऐसे में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि 26 जनवरी से पहले यूपी को नया मुखिया मिल सकता है।

केंद्र और राज्य में बेहतर तालमेल की कोशिश

यूपी भाजपा अध्यक्ष के चुनाव में देरी की एक बड़ी वजह यह भी है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव भी अभी शेष है। बताया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व की यह मंशा है कि यूपी जैसे बड़े राज्य में प्रदेश अध्यक्ष के नाम के ऐलान होने से पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष पर भी सहमति बन जाए। इससे केंद्र और राज्य के बीच तालमेल बेहतर हो सकेगा। सियासी गलियारों में यह चर्चा भी काफी तेज है कि अगर राष्ट्रीय अध्यक्ष ओबीसी या दलित वर्ग को चुना जाता है तो यूपी भाजपा अध्यक्ष सवर्ण हो सकता है। वहीं अगर राष्ट्रीय अध्यक्ष सवर्ण बनता है तो फिर भाजपा नेतृत्व यूपी में किसी ओबीसी या दलित पर दांव लगा सकती है।

रेस में शामिल दावेदारों की लंबी सूची

यूपी भाजपा अध्यक्ष पद के लिए कई दावेदार रेस में शामिल हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस बार पार्टी किसी ओबीसी नेता पर ही दांव लगा सकती है। इससे पहले 2017 में प्रदेश अध्यक्ष रहे केशव प्रसाद मौर्य की अगुवाई में भाजपा ने बड़ी सफलता मिली थी। ओबीसी दावेदारों में धर्मपाल सिंह, स्वतंत्र देव सिंह, अमर पाल मौर्य, बीएल वर्मा और बाबू राम निषाद के नाम की चर्चा काफी तेज है। वहीं दलित चेहरों में विनोद सोनकर, जुगल किशोर और विद्या सागर सोनकर रेस में शामिल हैं। इसके साथ ही ब्राह्मण वर्ग से डॉ. दिनेश शर्मा, श्रीकांत शर्मा, विजय बहादुर पाठक और गोविंद नारायण शुक्ला को दावेदार माना जा रहा है।

Tags:    

Similar News