19 April 2026 Ka Panchang Kya Hai : 19 अप्रैल को क्या है, कब है राहुकाल, जानिए आज का पंचांग

19 April 2026 Ka Panchang in Hindi : आज के पंचांग में तिथि, नक्षत्र, योग और राहुकाल,देखे आज का पंचांग आज का पञ्चाङ्ग 19अप्रैल 2026: , आज के पंचांग में तिथि, नक्षत्र, योग और राहुकाल के साथ दिन के खास मुहूर्त की जानकारी पढ़ें।

Suman  Mishra
Published on: 17 April 2026 8:37 AM IST
19 April 2026 Ka Panchang  Kya Hai : 19 अप्रैल को क्या है, कब है राहुकाल, जानिए आज का पंचांग
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19 April 2026 Ka Panchang in Hindi: ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का बहुत महत्व है । पंचांग ज्योतिष के पांच अंगों का मेल है। जिसमें तिथि,वार, करण,योग और नक्षत्र का जिक्र होता है। इसकी मदद से हम दिन के हर बेला के शुभ और अशुभ समय का पता लगाते हैं। उसके आधार पर अपने खास कर्मों को इंगित करते हैं।

आज 19 अप्रैल 2026, रविवार के दिन वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है (सुबह 10:50 AM तक)। इस दिन अक्षय तृतीया, परशुराम जयंती और वर्षी तप पारण जैसे अत्यंत पुण्यदायी पर्व मनाए जाते हैं, जो दान, पूजा और शुभ कार्यों के लिए बेहद शुभ माने जाते हैं। रविवार को राहु 05:10 PM से 06:45 PM तक है , 12:31 PM तक चन्द्रमा मेष उपरांत वृषभ राशि पर संचार करेगा। देखिए आज का पंचांग...

आज 19 अप्रैल का पंचांग

हिन्दू मास एवं वर्ष

विक्रम संवत - 2083, सिद्धार्थि

शक सम्वत - 1948, पराभव

पूर्णिमांत - चैत्र
अमांत - चैत्र

आज की तिथि

तिथि: शुक्ल पक्ष द्वितीय – सुबह 10:50 AM तक

वार: रविवार

नक्षत्र: भरणी – सुबह 7:10 AM तक

योग: आयुष्मान – रात 8:01 PM तक

करण: कौलव – सुबह 10:49 AM तक

सूर्य राशि: मेष

चंद्र राशि: मेष

ऋतु: वसंत

अयन: उत्तरायण

दिशाशूल: पश्चिम

चंद्र निवास: पूर्व

सूर्य और चंद्रमा का समय

सूर्योदय - 6:06 AM

सूर्यास्त - 6:45 PM

चन्द्रोदय - Apr 19 7:05 AM

चन्द्रास्त - Apr 19 9:06 PM

त्यौहार और व्रत

परशुराम जयंती

अक्षय तृतीय

शुभ- अशुभ का

अभिजीत मुहूर्त - 12:00 PM – 12:51 PM

अमृत काल - 02:26 AM – 03:51 AM

ब्रह्म मुहूर्त - 04:29 AM – 05:17 AM

विजय मुहूर्त-14:08 — 14:58

गोधूलि मुहूर्त-18:17 — 18:42

सायाह्न सन्ध्या-18:19 — 19:28

निशिता मुहूर्त-23:39 — 00:25

सर्वार्थसिद्धि योग - - Apr 20 06:05 AM - Apr 21 02:08 AM

त्रिपुष्कर योग - Apr 19 07:10 AM - Apr 19 10:49 AM

अशुभ काल

राहू - 5:10 PM – 6:45 PM

यम गण्ड - 12:26 PM – 2:00 PM

कुलिक - 3:35 PM – 5:10 PM

दुर्मुहूर्त - 05:04 PM – 05:54 PM

वर्ज्यम् - 05:53 PM – 07:19 PM

आनन्दादि योग

कालदण्ड Upto - 07:10 AM

ध्रूम Upto - 04:35 AM

प्रजापति (धाता)

गण्डमूल नक्षत्र

पूरे दिन

चौघड़िया

दिन का चौघड़िया

उद्बेग 06:06 AM 07:41 AM

चर 07:41 AM 09:16 AM

लाभ 09:16 AM 10:51 AM

अमृत (वार वेला) 10:51 AM 12:26 PM

काल (काल वेला) 12:26 PM 14:00 PM

शुभ 14:00 PM 15:35 PM

रोग 15:35 PM 17:10 PM

उद्बेग 17:10 PM 18:45 PM

रात का चौघड़िया

शुभ 18:45 PM 20:10 PM

अमृत 20:10 PM 21:35 PM

चर 21:35 PM 23:00 PM

रोग 23:00 PM 00:25 AM

काल 00:25 AM 01:50 AM

लाभ (काल रात्रि) 01:50 AM 03:15 AM

उद्बेग 03:15 AM 04:40 AM

शुभ 04:40 AM 06:05 AM

ध्यान दें

सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

भगवान विष्णु और भगवान परशुराम का स्मरण करें।

अक्षय तृतीया के दिन दान, जप और पूजा अवश्य करें।

जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करें।

मंदिर जाकर दीप जलाएं और भगवान की आराधना करें।

दिनभर सकारात्मक विचार रखें और धार्मिक कार्यों में भाग लें।

पंचांग क्या होता है?


पंचांग ज्योतिष के पांच अंगों का मेल है। जिसमें तिथि,वार, करण,योग और नक्षत्र का जिक्र होता है। हर दिन की तिथि का निर्धारण सूर्य और चंद्मा में भेद के आधार पर होता है और पंचांग के आधार पर हर दिन के शुभ-अशुभ समय का निर्धारण करते हैं। इसके आधार पर अपने काम को आसान बनाते हैँ। आज का पंचांग में तिथि, पक्ष, माह, नक्षत्र भी देखना जरुरी होता है। क्योंकि हर एक शुभ कार्य के लिए अलग अलग नक्षत्र होता है। सूर्योदय से दूसरे दिन सूर्योंदय के कुछ पहर पहले तक ही एक तिथि मानी जाती। चंद्रमा का स्थान जिस दिन चंद्रमा जिस स्थान पर होता है। उस दिन वही नक्षत्र और राशि मानी जाती है। चंद्रमा एक राशि में ढ़ाई दिन तक रहते हैं।

तिथि वारं च नक्षत्रं योगं करणमेव च।

पंचांगस्य फलं श्रुत्वा गंगा स्नानं फलं लभेत् ।।

आदिकाल में ही इस श्लोक के माध्यम से पंचांग को परिभाषित किया है।

  • तिथि- पंचांग का पहला अंग तिथि है। जो 16 है। इनमें पूर्णिमा और अमावस्या दो प्रमुख तिथियां है। जो दो पक्षों का निर्धारण करते हैं। कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष। पूर्णिमा और अमावस्या दोनों तिथि माह में एक बार आती है।
  • नक्षत्र- नक्षत्र 27 होते हैं। लेकिन एक मुहूर्त अभिजीत नक्षत्र है जो शादी विवाह के समय देखा जाता है। इसे मिला कर 28 नक्षत्र भी कहे जाते है।
  • योग- 27 होते है। मनुष्य के जीवन में योग का बहुत महत्व है।
  • करण- 11 होते हैं। 4 स्थिर व 7 परिवर्तनशील है।
  • वार- सप्ताह में 7 दिन होते हैं। जो रविवार से शुरू, सोमवार, बुधवार, बृहस्पतिवार, शुक्रवार, और शनिवार पर खत्म होते हैं।


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Suman Mishra

मैं वर्तमान में न्यूजट्रैक और अपना भारत के लिए कंटेट राइटिंग कर रही हूं। इससे पहले मैने रांची, झारखंड में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग किया है और ईटीवी में 5 वर्षों का डेस्क पर काम करने का अनुभव है। मैं पत्रकारिता और ज्योतिष विज्ञान में खास रुचि रखती हूं। मेरे नाना जी पंडित ललन त्रिपाठी एक प्रकांड विद्वान थे उनके सानिध्य में मुझे कर्मकांड और ज्योतिष हस्त रेखा का ज्ञान मिला और मैने इस क्षेत्र में विशेषज्ञता के लिए पढाई कर डिग्री भी ली है

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