3 May 2026 Aaj Ka Panchang : दिशाशूल-चंद्र निवास के लिए देखें आज का पंचांग

3 May 2026 Aaj Ka Panchang : आज के पंचांग में तिथि, नक्षत्र, योग और राहुकाल,देखे आज का पंचांग आज का पञ्चाङ्ग 3 मई 2026: , आज के पंचांग में तिथि, नक्षत्र, योग और राहुकाल के साथ दिन के खास मुहूर्त की जानकारी पढ़ें।

Suman  Mishra
Published on: 2 May 2026 7:31 AM IST (Updated on: 4 May 2026 5:56 AM IST)
3 May 2026 Aaj Ka Panchang : दिशाशूल-चंद्र निवास के लिए देखें आज का पंचांग
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3 May 2026 Ka Panchang in Hindi: ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का बहुत महत्व है । पंचांग ज्योतिष के पांच अंगों का मेल है। जिसमें तिथि,वार, करण,योग और नक्षत्र का जिक्र होता है। इसकी मदद से हम दिन के हर बेला के शुभ और अशुभ समय का पता लगाते हैं। उसके आधार पर अपने खास कर्मों को इंगित करते हैं।

3 मई 2026, रविवार के दिन ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीय तिथि है (रात 3:03 AM तक)। यह दिन साधना, संयम और मानसिक शांति के लिए अच्छा है।राहु 05:14 PM से 06:51 PM तक है | चन्द्रमा वृश्चिक राशि पर संचार करेगा

आज का पंचांग

तिथि: कृष्ण पक्ष द्वितीय – रात 3:03 AM तक

वार: रविवार

नक्षत्र: विशाखा – सुबह 7:10 AM तक

योग: वरीयान – रात 10:27 PM तक

करण: तैतिल – दोपहर 1:55 PM तक

सूर्य राशि: मेष

चंद्र राशि: वृश्चिक

ऋतु: वसंत

अयन: उत्तरायण

दिशाशूल: पश्चिम

चंद्र निवास: उत्तर

शुभ-अशुभ समय

अभिजीत मुहूर्त - 11:57 AM – 12:49 PM

अमृत काल - 10:19 PM – 12:07 AM

ब्रह्म मुहूर्त - 04:19 AM – 05:07 AM

शुभ मुहूर्त: 11:30 AM से 12:22 PM

राहुकाल: 4:52 PM से 6:30 PM

गुलिक काल: 3:13 PM से 4:52 PM

यमघण्ट काल: 11:56 AM से 1:34 PM

त्रिपुष्कर योग - May 03 12:50 AM - May 03 07:09 AM

सर्वार्थसिद्धि योग - May 04 05:55 AM - May 04 09:57 AM

सूर्य और चंद्र समय

सूर्योदय: 5:21 AM

सूर्यास्त: 6:30 PM

चंद्रोदय: 8:10 PM

चंद्रास्त: 5:59 AM

आनन्दादि योग

उत्पात Upto - 07:09 AM

मृत्यु

सूर्या राशि

सूर्य मेष राशि पर है

चंद्र राशि

चन्द्रमा वृश्चिक राशि पर संचार करेगा

पूजा-व्रत विधि

सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

सूर्य देव को अर्घ्य दें और दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा के साथ करें।

अपने इष्ट देव का ध्यान करें और मन को शांत रखें।

ध्यान और जप करना इस दिन विशेष फलदायी माना जाता है।

जरूरतमंदों की सहायता और दान करना शुभ फल देता है।

दिन का चौघड़िया

उद्बेग 05:56 AM 07:33 AM

चर 07:33 AM 09:10 AM

लाभ 09:10 AM 10:46 AM

अमृत (वार वेला) 10:46 AM 12:23 PM

काल (काल वेला) 12:23 PM 14:00 PM

शुभ 14:00 PM 15:37 PM

रोग 15:37 PM 17:14 PM

उद्बेग 17:14 PM 18:51 PM

रात का चौघड़िया

शुभ 18:51 PM 20:14 PM

अमृत 20:14 PM 21:37 PM

चर 21:37 PM 23:00 PM

रोग 23:00 PM 00:23 AM

काल 00:23 AM 01:46 AM

लाभ (काल रात्रि) 01:46 AM 03:09 AM

उद्बेग 03:09 AM 04:32 AM

शुभ 04:32 AM 05:55 AM

पंचांग क्या होता है?

पंचांग ज्योतिष के पांच अंगों का मेल है। जिसमें तिथि,वार, करण,योग और नक्षत्र का जिक्र होता है। हर दिन की तिथि का निर्धारण सूर्य और चंद्मा में भेद के आधार पर होता है और पंचांग के आधार पर हर दिन के शुभ-अशुभ समय का निर्धारण करते हैं। इसके आधार पर अपने काम को आसान बनाते हैँ। आज का पंचांग में तिथि, पक्ष, माह, नक्षत्र भी देखना जरुरी होता है। क्योंकि हर एक शुभ कार्य के लिए अलग अलग नक्षत्र होता है। सूर्योदय से दूसरे दिन सूर्योंदय के कुछ पहर पहले तक ही एक तिथि मानी जाती। चंद्रमा का स्थान जिस दिन चंद्रमा जिस स्थान पर होता है। उस दिन वही नक्षत्र और राशि मानी जाती है। चंद्रमा एक राशि में ढ़ाई दिन तक रहते हैं।

तिथि वारं च नक्षत्रं योगं करणमेव च।

पंचांगस्य फलं श्रुत्वा गंगा स्नानं फलं लभेत् ।।

आदिकाल में ही इस श्लोक के माध्यम से पंचांग को परिभाषित किया है।

तिथि- पंचांग का पहला अंग तिथि है। जो 16 है। इनमें पूर्णिमा और अमावस्या दो प्रमुख तिथियां है। जो दो पक्षों का निर्धारण करते हैं। कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष। पूर्णिमा और अमावस्या दोनों तिथि माह में एक बार आती है।

नक्षत्र- नक्षत्र 27 होते हैं। लेकिन एक मुहूर्त अभिजीत नक्षत्र है जो शादी विवाह के समय देखा जाता है। इसे मिला कर 28 नक्षत्र भी कहे जाते है।

योग- 27 होते है। मनुष्य के जीवन में योग का बहुत महत्व है।करण- 11 होते हैं। 4 स्थिर व 7 परिवर्तनशील है।

वार- सप्ताह में 7 दिन होते हैं। जो रविवार से शुरू, सोमवार, बुधवार, बृहस्पतिवार, शुक्रवार, और शनिवार पर खत्म होते हैं।


Suman  Mishra

Suman Mishra

एस्ट्रोलॉजी एडिटर

मैं वर्तमान में न्यूजट्रैक और अपना भारत के लिए कंटेट राइटिंग कर रही हूं। इससे पहले मैने रांची, झारखंड में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग किया है और ईटीवी में 5 वर्षों का डेस्क पर काम करने का अनुभव है। मैं पत्रकारिता और ज्योतिष विज्ञान में खास रुचि रखती हूं। मेरे नाना जी पंडित ललन त्रिपाठी एक प्रकांड विद्वान थे उनके सानिध्य में मुझे कर्मकांड और ज्योतिष हस्त रेखा का ज्ञान मिला और मैने इस क्षेत्र में विशेषज्ञता के लिए पढाई कर डिग्री भी ली है Author Experience- 2007 से अब तक( 17 साल) Author Education – 1. बनस्थली विद्यापीठ और विद्यापीठ से संस्कृत ज्योतिष विज्ञान में डिग्री 2. रांची विश्वविद्यालय से पत्राकरिता में जर्नलिज्म एंड मास कक्मयूनिकेश 3. विनोबा भावे विश्व विदयालय से राजनीतिक विज्ञान में स्नातक की डिग्री

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