Ahoi Ashtami 2026: कब है अहोई अष्टमी, जानें पूजा मुहूर्त और तारों को अर्घ्य देने का समय

Ahoi Ashtami 2026: अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर को रखा जाएगा। जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, तारों के दर्शन का समय, चंद्रोदय, व्रत की पूजा विधि और संतान की खुशहाली से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं।

Suman  Mishra (Astrologer)
Published on: 27 Oct 2026 11:00 AM IST
Ahoi Ashtami 2026
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Ahoi Ashtami 2026 Date and Muhurat: हर साल कार्तिक मास की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और उज्जवल भविष्य के लिए अहोई माता की पूजा अर्चना करती है।

यह व्रत विशेष रूप से माताओं द्वारा अपने बच्चों की भलाई और लंबी आयु के लिए किया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि अहोई माता की पूजा करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और जीवन में शांति तथा परिवार में समृद्धि आती है। इस दिन माता अहोई की आराधना, संध्या पूजा, कथा श्रवण और चंद्र दर्शन का विशेष महत्व रहता है।

अहोई अष्टमी का व्रत हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना से रखती हैं। हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी मनाई जाती है। इस दिन माताएं से अहोई माता की पूजा करती हैं और संतान की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अहोई माता की विधि-विधान से पूजा करने और व्रत कथा सुनने से संतान पर माता का विशेष आशीर्वाद बना रहता है। इस साल अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर को मानाया जाएगा। आइए जानते हैं तिथि और पूजा- मुहूर्त…

कब है अहोई अष्टमी 2026?

पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 1 नवंबर 2026, रविवार को दोपहर 2 बजकर 51 मिनट पर आरंभ होगी।
इस तिथि का समापन 2 नवंबर 2026 को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट पर होगा।
बता दें कि अहोई अष्टमी के दिन शाम को तारों के दर्शन करके व्रत खोलने की परंपरा है।
वहीं अष्टमी तिथि में 1 नवंबर को शाम के समय तारों के दर्शन होंगे,
इसलिए इस साल अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर 2026, रविवार को रखा जाना शास्त्र सम्मत रहेगा।

अहोई अष्टमी शुभ मुहूर्त 2026

पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 4:59 बजे से 6:15 बजे तक

तारों के दर्शन का समय: शाम 5:22 बजे के आसपास

चंद्रोदय का समय: रात 11:05 बजे के आसपास

अहोई अष्टमी का धार्मिक महत्व

मान्यताओं के अनुसार, अहोई अष्टमी का व्रत संतान की रक्षा, लंबी आयु और सुखी जीवन के लिए रखा जाता है। इस दिन सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है और शाम के समय अहोई माता की पूजा की जाती है। पूजा के दौरान माता की तस्वीर या दीवार पर उनका चित्र बनाकर रोली, चावल, फूल, दीपक और भोग अर्पित किया जाता है। इसके बाद अहोई अष्टमी की व्रत कथा सुनी जाती है। अहोई अष्टमी व्रत करने से बच्चों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है और विशेष रूप से यह व्रत संतान प्राप्ति के लिए किया जाता है। अहोई अष्टमी व्रत एक महिला द्वारा शुरू किया गया था जिसने अनजाने में संतान को नुकसान पहुंचाया था, फिर उसने संतान को पुनः पाने के लिए अहोई अष्टमी का व्रत किया।

अहोई अष्टमी व्रत पूजा विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, साफ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें।
अहोई अष्टमी के पावन अवसर पर माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र का आशीर्वाद लेने के लिए व्रत और पूजा करती हैं।
पूजा पूरी श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ की जाती है।
इस दिन व्रत रखने के लिए आपको सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और साफ कपड़े धारण करें।
इसके बाद पूजा के लिए एक वेदी या पवित्र स्थान का चयन करें। दीवार को साफ करें और उस पर अहोई माता की तस्वीर बनाए या लगाएं।
यह छवि आमतौर पर लाल मिट्टी या सिंदूर का उपयोग करके बनाई जाती है या एक मुद्रित चित्र या मूर्ति का उपयोग किया जा सकता है।
फिर अहोई माता की तस्वीर के सामने तेल या घी का दीपक जलाएं।
आप अहोई माता को फूल, फल और मिठाई या हलवा का भोग लगा सकते हैं।
इसके बाद आप अहोई माता के मंत्रों का पाठ कर सकती हैं।कुछ जगहों पर माताएं अपने बच्चों को अहोई अष्टमी से जुड़ी कथा सुनाती हैं। यह त्यौहार के सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद करता है।पूजा और मंत्रोच्चारण के बाद अहोई माता की आरती करें।न माताएं बिना अन्न या जल ग्रहण किए व्रत रखती हैं। शाम को तारे देखने के बाद ही व्रत खोला जाता है। कुछ महिलाएं आंशिक उपवास भी करती हैं जहां वे फल और दूध का सेवन करती हैं।शाम के समय तारों को देखकर जल देने के बाद ही यह व्रत संपूर्ण माना जाता है और तारों को देखकर जल देने के बाद आप व्रत खोल सकती हैं।

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Suman Mishra (Astrologer)

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मैं वर्तमान में न्यूजट्रैक और अपना भारत के लिए कंटेट राइटिंग कर रही हूं। इससे पहले मैने रांची, झारखंड में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग किया है और ईटीवी में 5 वर्षों का डेस्क पर काम करने का अनुभव है। मैं पत्रकारिता और ज्योतिष विज्ञान में खास रुचि रखती हूं। मेरे नाना जी पंडित ललन त्रिपाठी एक प्रकांड विद्वान थे उनके सानिध्य में मुझे कर्मकांड और ज्योतिष हस्त रेखा का ज्ञान मिला और मैने इस क्षेत्र में विशेषज्ञता के लिए पढाई कर डिग्री भी ली है

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