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August 2026 Panchak kab hai:अगस्त का पंचक कब है? जानें 5 नक्षत्रों का समय कैसा रहेगा प्रभाव
August 2026 Panchak kab hai: अगस्त 2026 का पंचक कब शुरू होगा और कब खत्म? 27 अगस्त से शुरू होने वाले इस पंचक में कौन-कौन से 5 नक्षत्र रहेंगे और इसका क्या असर माना जाता है? जानिए पूरी जानकारी, तारीख, समय और पंचक से जुड़ी जरूरी बातें।
August Panchak 2026 अगस्त 2026 के आखिर में पंचक का प्रभाव देखने को मिलेगा। 27 अगस्त 2026, बुधवार को दोपहर 1 .34 मिनट से पंचक शुरू होगा, जो 1 सितंबर 2026 को सुबह 3 .23 मिनट तक रहेगा। करीब 4 . 14 घंटे तक चलने वाला यह पंचक सामान्य पंचक है।जब पंचक की शुरुआत बुधवार या गुरुवार से होती है और उस पर किसी विशेष वार-दोष का प्रभाव नहीं होता, तो इसे सामान्य या सौम्य, राज पंचक कहा जाता है। इसलिए इस दौरान परंपरागत मान्यताओं के अनुसार सावधानी के साथ सामान्य कार्य किए जा सकते हैं।
27 अगस्त — 1 सितंबर
सामान्य पंचक · 4 दिन 14 घंटे
1:34 pm → 3:23 am
बुधवार या गुरुवार से आरंभ होने वाला पंचक उपर्युक्त पाँच श्रेणियों में नहीं आता। इसे सामान्य पंचक कहा जाता है, और दोषरहित या निर्दोष पंचक भी — क्योंकि इस पर किसी वार-दोष का नाम नहीं पड़ता। इसे अपेक्षाकृत सौम्य माना जाता है।
पंचक में इन 5 नक्षत्रों का रहेगा प्रभाव
धनिष्ठा(तृतीय चरण से) स्वामी मंगल
27 अगस्त, 1:34 pm → 28 अगस्त, 2:15 am
शतभिषा स्वामी राहु
28 अगस्त, 2:15 am → 29 अगस्त, 3:12 am
पूर्व भाद्रपद स्वामी गुरु
29 अगस्त, 3:12 am → 30 अगस्त, 3:42 am
उत्तर भाद्रपद स्वामी शनि
30 अगस्त, 3:42 am → 31 अगस्त, 3:44 am
रेवती स्वामी बुध
31 अगस्त, 3:44 am → 1 सितंबर, 3:23 am
पंचक के नक्षत्रों का अलग-अलग अशुभ प्रभाव
यदि पंचक धनिष्ठा नक्षत्र में लगता है तो आग लगने का भय रहता है। शतभिषा नक्षत्र में वाद-विवाद होने के योग बनते हैं। पूर्वाभाद्रपद रोग कारक नक्षत्र है यानी इस नक्षत्र में बीमारी होने की संभावना सबसे अधिक होती है। उत्तरा भाद्रपद में धन हानि के योग बनते हैं। रेवती नक्षत्र में नुकसान व मानसिक तनाव होने की संभावना होती है। लेकिन शुक्रवारको लगने वाला पंचक भयरहित होता है। इसमें सारे क्रम किये जाते हैं। इसे अशुभ पंचक की श्रेणी में रखा जाता है।
पंचक के दौरान ना करें ये काम
पंचक में शव का अंतिम संस्कार करने से पहले किसी योग्य पंडित की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। यदि ऐसा न हो पाए तो शव के साथ पांच पुतले आटे या कुश (एक प्रकार की घास) से बनाकर अर्थी पर रखना चाहिए और इन पांचों का भी शव की तरह पूर्ण विधि-विधान से अंतिम संस्कार करना चाहिए, तो पंचक दोष समाप्त हो जाता है। ऐसा गरुड़ पुराण में लिखा है।
पंचक में चारपाई बनवाना भी अच्छा नहीं माना जाता। विद्वानों के अनुसार ऐसा करने से कोई बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। पंचक के दौरान जिस समय घनिष्ठा नक्षत्र हो उस समय घास, लकड़ी आदि जलने वाली वस्तुएं इकट्ठी नहीं करना चाहिए, इससे आग लगने का भय रहता है।
पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि दक्षिण दिशा, यम की दिशा मानी गई है। इन नक्षत्रों में दक्षिण दिशा की यात्रा करना हानिकारक माना गया है।
पंचक के दौरान जब रेवती नक्षत्र चल रहा हो, उस समय घर की छत नहीं बनाना चाहिए, ऐसा विद्वानों का कहना है। इससे धन हानि और घर में क्लेश होता है।
इस पंचक में लेन-देन, व्यापार और किसी भी तरह के सौदे भी नहीं करने चाहिए। मना किए गए कार्य करने से धन हानि हो सकती है
इस दौरान गृह कार्य का आरंभ नहीं किया जाता है।
पंचक में गृह निर्माण नहीं किया जाता है।
गृह प्रवेश पंचक में नहीं होता है।
मकान का छत ढलाई पंचक में वर्जित होता है।
इस दौरान बहु बेटियों को मायके ससुराल नहीं भेजा जाता है।
पंचक क्या होता है ?
ज्योतिष में पंचक को शुभ नक्षत्र नहीं माना जाता है। इसे अशुभ नक्षत्रों का योग मानते हैं। नक्षत्रों के मेल से बनने वाले विशेष योग को पंचक कहते हैं। जब चन्द्रमा, कुंभ और मीन राशि पर रहता है, तब उस समय को पंचक कहते हैं। ज्योतिष शास्त्र में पंचक को अशुभ माना गया है। पंचक कितने प्रकार का होता है और इसमें कौन-कौन से काम नहीं करने चाहिए। पंचक के दौरान कुछ विशेष काम करने की मनाही है। इसके अंतर्गत धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र आते है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार समय-समय पर ग्रहों और नक्षत्रों की चाल की गणना के आधार पर किसी मांगलिक कार्य को करने के लिए समय निर्धारित किया जाता है। इसी को शुभ और अशुभ मुहूर्त कहा जाता है। शुभ मुहूर्त में कार्य करने पर उस काम में सफलता की प्राप्ति होती है, जबकि अशुभ मुहूर्त में किया गया कार्य में कई तरह की बाधाएं उत्पन्न होती है। जब कभी अशुभ नक्षत्र का योग बनता है तब इस योग को पंचक कहा जाता है। ज्योतिष में पंचक को अशुभ माना गया है।
पंचक के प्रकार रोग
पंचक रविवार को शुरू होने वाला पंचक रोग पंचक कहलाता है। इसके प्रभाव से ये पांच दिन शारीरिक और मानसिक परेशानियों वाले होते हैं। इस पंचक में किसी भी तरह के शुभ काम नहीं करने चाहिए। हर तरह के मांगलिक कार्यों में ये पंचक अशुभ माना गया है।
राज पंचक सोमवार को शुरू होने वाला पंचक राज पंचक कहलाता है। ये पंचक शुभ माना जाता है। इसके प्रभाव से इन पांच दिनों में सरकारी कामों में सफलता मिलती है। राज पंचक में संपत्ति से जुड़े काम करना भी शुभ रहता है।
अग्नि पंचक मंगलवार को शुरू होने वाला पंचक अग्नि पंचक कहलाता है। इन पांच दिनों में कोर्ट कचहरी और विवाद आदि के फैसले, अपना हक प्राप्त करने वाले काम किए जा सकते हैं। इस पंचक में अग्नि का भय होता है। इस पंचक में किसी भी तरह का निर्माण कार्य, औजार और मशीनरी कामों की शुरुआत करना अशुभ माना गया है। इनसे नुकसान हो सकता है।
मृत्यु पंचक शनिवार को शुरू होने वाला पंचक मृत्यु पंचक कहलाता है। नाम से ही पता चलता है कि अशुभ दिन से शुरू होने वाला ये पंचक मृत्यु के बराबर परेशानी देने वाला होता है। इन पांच दिनों में किसी भी तरह के जोखिम भरे काम नहीं करना चाहिए। इसके प्रभाव से विवाद, चोट, दुर्घटना आदि होने का खतरा रहता है।
चोर पंचक शुक्रवार को शुरू होने वाला पंचक चोर पंचक कहलाता है। विद्वानों के अनुसार, इस पंचक में यात्रा करने की मनाही है। इस पंचक में लेन-देन, व्यापार और किसी भी तरह के सौदे भी नहीं करने चाहिए। मना किए गए कार्य करने से धन हानि हो सकती है।
बुधवार और गुरुवार को शुरू होने वाले पंचक में ऊपर दी गई बातों का पालन करना जरूरी नहीं माना गया है। इन दो दिनों में शुरू होने वाले दिनों में पंचक के पांच कामों के अलावा किसी भी तरह के शुभ काम किए जा सकते हैं।
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