Bad Habbits: पैसा, परिवार और सुकून सब हो सकता है बर्बाद, आज से ही इन आदतों से बना लें दूरी

Bad Habbits: बुरी आदतें जो जीवन बर्बाद करती हैं, काम, क्रोध, अहंकार, मोह, लोभ और द्वेष जैसी 6 आदतें जीवन में परेशानी बढ़ा सकती हैं। जानें रामायण और महाभारत की कथाओं से जुड़ी इन आदतों की सीख।

Suman  Mishra (Astrologer)
Published on: 12 Aug 2026 8:23 AM IST
Bad Habbits: पैसा, परिवार और सुकून सब हो सकता है बर्बाद, आज से ही इन आदतों से बना लें दूरी
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: किसी भी व्यक्ति की जिंदगी में सुख और दुख सिर्फ बाहर की परिस्थितियों से नहीं आते। कई बार हमारी अपनी आदतें ही धीरे-धीरे उन चीजों को हमसे दूर कर देती हैं, जिन्हें पाने के लिए हम दिन-रात मेहनत करते हैं। धन कमाने के बाद भी अगर मन अशांत है, परिवार में तनाव है या रिश्ते लगातार बिगड़ रहे हैं, तो इसकी वजह हमारे व्यवहार में छिपी कमियां हैं। रामायण, महाभारत और धार्मिक कथाओं में ऐसे कई प्रसंग हैं, जिनसे मनुष्य के स्वभाव और उसकी गलतियों के परिणामों की सीख मिलती है। इन कथाओं में काम, क्रोध, अहंकार, मोह, लोभ और द्वेष जैसी बुराईयों से बचने को कहा गया है। आज की जिंदगी में भी अगर इन आदतों से दूरी बना ली जाये तो जिंदगी संवर जाती है, वरना इन आदतों के साथ बुरे परिणाम ही भुगतने पड़ते है....

ये आदते जो मनुष्य की बर्बादी की वजह बनता है...

पहली आदत- काम

इच्छाएं होना गलत नहीं है। हर व्यक्ति अपने जीवन में कुछ न कुछ हासिल करना चाहता है।
परेशानी तब शुरू होती है जब इच्छा पर नियंत्रण खत्म हो जाता है
इंसान अपनी चाहत के लिए सही-गलत की सीमा भूलने लगता है।
ऐसी स्थिति में व्यक्ति अपना पैसा, सम्मान और रिश्ते तक दांव पर लगा सकता है।
धार्मिक कथाओं में रावण के प्रसंग से भी यही सीख मिलती है,
अनियंत्रित इच्छा और वासना व्यक्ति के विवेक पर पर्दा डाल सकती है।
इसलिए मन में इच्छा आए तो उसे समझना जरूरी है, लेकिन इच्छा को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए।

दूसरी आदत- गुस्सा

गुस्सा कुछ सेकंड का होता है, लेकिन उसका नुकसान कई साल तक रह सकता है।
क्रोध में इंसान अक्सर ऐसी बात कह देता है जिसे बाद में वापस लेना मुश्किल हो जाता है।
कभी एक गलत फैसला नौकरी या कारोबार को नुकसान पहुंचा देता है, तो कभी गुस्सा अपने ही लोगों को दूर कर देता है।
महाभारत की घटनाओं में भी क्रोध और प्रतिशोध के कारण बढ़ते विवादों की बड़ी कीमत देखने को मिलती है।
इसलिए जब स्थिति बिगड़ रही हो, तब तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय थोड़ा रुक जाना समझदारी है।
गुस्से में लिया गया फैसला अक्सर समस्या खत्म नहीं करता, बल्कि एक नई समस्या खड़ी कर देता है।

तीसरी आदत- अहंकार

कामयाबी मिलना अच्छी बात है, लेकिन कामयाबी के साथ अगर अहंकार आ जाए तो वही उपलब्धि परेशानी का कारण बन सकती है।
अहंकारी व्यक्ति दूसरों की सलाह सुनना बंद कर देता है और अपनी गलती स्वीकार करने में भी उसे परेशानी होती है।
रावण की कथा में अपार ज्ञान और शक्ति होने के बावजूद उसका अहंकार उसके पतन का बड़ा कारण बना।
इसी तरह महाभारत में दुर्योधन का व्यवहार भी बताता है कि जब व्यक्ति अपनी जिद और श्रेष्ठता के भाव में सही बात सुनना बंद कर देता है तो परिस्थितियां उसके खिलाफ जा सकती हैं।
इसलिए सफलता के साथ विनम्रता बनाए रखना जरूरी है।

चौथी आदत- मोह

किसी से प्रेम करना या अपने परिवार से जुड़ाव रखना स्वाभाविक है।
लेकिन जब यही मोह इतना बढ़ जाए कि इंसान अपने प्रिय व्यक्ति की गलतियों को भी सही मानने लगे, तब परेशानी शुरू होती है।
महाभारत में धृतराष्ट्र का अपने पुत्र दुर्योधन के प्रति अत्यधिक मोह इसका बड़ा उदाहरण माना जाता है।
पुत्र के प्रति प्रेम होते हुए भी अगर वह समय रहते गलत फैसलों को रोकते तो घटनाओं की दिशा शायद अलग होती।
आज भी माता-पिता, पति-पत्नी, दोस्त या रिश्तेदारों के मामले में यही बात लागू होती है।
प्यार करें, लेकिन किसी की गलती को सिर्फ रिश्ते के कारण सही न ठहराएं।

पांचवीं आदत- लालच

पैसा जीवन की जरूरत है, लेकिन पैसे की चाह जब लालच बन जाती है तो इंसान के पास जो है उसकी खुशी भी खत्म हो जाती है।
उसे हमेशा दूसरे के पास मौजूद चीज ज्यादा अच्छी लगती है।
महाभारत की कथा में कौरवों और पांडवों के बीच संपत्ति और अधिकार को लेकर बढ़ता विवाद बताता है कि लालच और अधिकार की भावना किस तरह बड़े संघर्ष का कारण बन सकती है।
आज के समय में भी दूसरों की संपत्ति देखकर खुद को कमतर समझना या बिना जरूरत अधिक पाने की चाह रखना मन की शांति छीन सकता है।
इसलिए कमाई जरूर करें, आगे बढ़ने की कोशिश भी करें, लेकिन संतोष को जिंदगी से बाहर न करें।

छठी आदत- दूसरों की खुशी देखकर जलना

किसी और को आगे बढ़ता देखकर मन में खुशी की जगह जलन पैदा होना भी व्यक्ति के लिए नुकसानदायक है।
जलन में हम सामने वाले का नुकसान तो नहीं कर पाते, लेकिन अपने मन की शांति जरूर खराब कर लेते हैं।
महाभारत के प्रसंगों में प्रतिस्पर्धा, ईर्ष्या और द्वेष ने कई रिश्तों को संघर्ष में बदल दिया।
कर्ण और अर्जुन के बीच प्रतिद्वंद्विता का प्रसंग भी हमें बताता है कि किसी दूसरे को पीछे छोड़ने की भावना किस तरह मन पर हावी हो सकती है।
अगर कोई हमसे आगे बढ़ रहा है तो उससे जलने के बजाय यह देखना बेहतर है कि हम उससे क्या सीख सकते हैं।

इन छह आदतों से बचना ही असली समझदारी

काम, क्रोध, अहंकार, मोह, लोभ और द्वेष, ये भाव इंसान के भीतर अलग-अलग रूप में आ सकते हैं।
इनका होना ही सबसे बड़ी समस्या नहीं है, बल्कि इन्हें नियंत्रित न कर पाना परेशानी की वजह बनता है।
धार्मिक कथाओं की सबसे बड़ी सीख यही है कि इंसान को अपनी कमियों पर नजर रखनी चाहिए।
धन कमाना जरूरी है, लेकिन उसके साथ मन की शांति भी जरूरी है। परिवार बनाना जरूरी है, लेकिन रिश्तों में सही-गलत समझना भी उतना ही जरूरी है।
इसलिए अगर इन छह में से कोई आदत अपने व्यवहार में नजर आती है तो उसे दूसरों में तलाशने के बजाय पहले खुद पर काम करें। क्योंकि बाहर की दुनिया बदलने से पहले अपने भीतर बदलाव लाना ही जीवन को बेहतर बनाने की पहली सीढ़ी है।

Suman  Mishra (Astrologer)
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Suman Mishra (Astrologer)

Astrologer Mail ID - suman1711@gmail.comsuman1711@gmail.com

मैं वर्तमान में न्यूजट्रैक और अपना भारत के लिए कंटेट राइटिंग कर रही हूं। इससे पहले मैने रांची, झारखंड में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग किया है और ईटीवी में 5 वर्षों का डेस्क पर काम करने का अनुभव है। मैं पत्रकारिता और ज्योतिष विज्ञान में खास रुचि रखती हूं। मेरे नाना जी पंडित ललन त्रिपाठी एक प्रकांड विद्वान थे उनके सानिध्य में मुझे कर्मकांड और ज्योतिष हस्त रेखा का ज्ञान मिला और मैने इस क्षेत्र में विशेषज्ञता के लिए पढाई कर डिग्री भी ली है

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