Dhanteras 2026 Date: धनतेरस कब है, क्या खरीदें और किस समय करें पूजा? जान लें ये जरूरी बातें

Dhanteras 2026 Date: धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदने से पहले जान लें सही तारीख और शुभ मुहूर्त। आखिर इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा क्यों की जाती है? जानें खरीदारी की परंपरा, पूजा का समय और इस पर्व से जुड़ी खास मान्यताएं।

Suman  Mishra (Astrologer)
Published on: 4 Nov 2026 6:33 PM IST
Dhanteras 2026 Date: धनतेरस कब है, क्या खरीदें और किस समय करें पूजा? जान लें ये जरूरी बातें
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Dhanteras 2026 Kab Hai: दीपावली की तैयारियों के बीच धनतेरस का इंतजार हर किसी को रहता है। कोई इस दिन सोना-चांदी खरीदता है, तो कोई नया वाहन, बर्तन या घर के लिए जरूरी सामान खरीदता है। धार्मिक मान्यता है कि धनतेरस पर शुभ मुहूर्त में खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि धनतेरस पर केवल खरीदारी ही नहीं, बल्कि भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की पूजा का भी विशेष महत्व है?

साल 2026 में धनतेरस की तारीख को लेकर तिथि और पूजा के समय को समझना जरूरी है। ऐसे में अगर आप भी इस दिन सोना-चांदी खरीदने या घर में पूजा करने की तैयारी कर रहे हैं, तो पहले जान लीजिए धनतेरस कब मनाया जाएगा, पूजा का शुभ समय क्या रहेगा और इस पर्व से जुड़ी कौन-सी मान्यताएं प्रचलित हैं।

धनतेरस 2026 कब है? जानें सही तारीख

हिंदू पंचांग के अनुसार, धनतेरस को धन त्रयोदशी या धन्वंतरि त्रयोदशी भी कहा जाता है। यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है और दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत का प्रतीक है।

वर्ष 2026 में धनतेरस की पूजा और खरीदारी की तारीख तय करने से पहले स्थानीय पंचांग में त्रयोदशी तिथि और प्रदोष काल का मिलान जरूर करें। अलग-अलग पंचांगों में तिथि के समय और पूजा की गणना के आधार पर अंतर दिखाई दे सकता है। इसलिए किसी एक तारीख को अंतिम मानने से पहले विश्वसनीय पंचांग से पुष्टि करना जरूरी है।

धनतेरस पर लोग अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार सोना, चांदी, नए बर्तन, आभूषण और अन्य उपयोगी वस्तुएं खरीदते हैं। हालांकि, इस पर्व का महत्व केवल नई चीजें घर लाने तक सीमित नहीं है। इसे अच्छे स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिरता और परिवार की खुशहाली की कामना से भी जोड़ा जाता है।

धनतेरस 2026 पूजा मुहूर्त

धनतेरस की शाम को माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और धन के देवता कुबेर की पूजा करने की परंपरा है। पूजा के लिए प्रदोष काल को विशेष महत्व दिया जाता है। यह सूर्यास्त के आसपास का समय होता है, जब घर में दीप जलाकर आराधना की जाती है।

धनतेरस 2026 के लिए पूजा में सूर्यास्त, प्रदोष काल और स्थिर लग्न की गणना देखना आवश्यक है। शहर के अनुसार पूजा के समय में कुछ अंतर हो सकता है।

पूजा की तैयारी करते समय इन बातों का ध्यान रखें:

पूजा स्थल को साफ करके वहां दीपक जलाएं।

भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और कुबेर की श्रद्धापूर्वक पूजा करें।

घर की सुख-समृद्धि और परिवार के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें।

अपनी परंपरा के अनुसार मिठाई, फल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें।

ध्यान रखें कि पूजा का शुभ समय और खरीदारी का समय अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए दोनों के लिए पंचांग में दिए गए समय को अलग से देखना बेहतर रहेगा।

धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदने का शुभ समय

धनतेरस पर सोना और चांदी खरीदने की परंपरा काफी पुरानी है। कई परिवार इस दिन सिक्के, आभूषण या चांदी के बर्तन खरीदते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन खरीदी गई शुभ वस्तुएं समृद्धि का प्रतीक हैं।अगर आप धनतेरस 2026 पर सोना या चांदी खरीदना चाहते हैं, तो खरीदारी का मुहूर्त स्थानीय पंचांग के अनुसार तय करें। त्रयोदशी तिथि, चौघड़िया और अन्य शुभ समयों की गणना को ध्यान में रखा जा सकता है।

हालांकि, शुभ मुहूर्त में खरीदारी करना धार्मिक आस्था का विषय है। इसे निश्चित धनलाभ की गारंटी नहीं मानना चाहिए। सोना-चांदी खरीदते समय बजट, शुद्धता, हॉलमार्क और बिल की जांच करना भी जरूरी है।

धनतेरस पर बर्तन, झाड़ू और दूसरी चीजें खरीदने की परंपरा

धनतेरस पर केवल सोना-चांदी ही नहीं, बल्कि पीतल, तांबे और स्टील के बर्तन खरीदने का भी चलन है। कुछ परिवार इस दिन धनिया, कौड़ी, गोमती चक्र और पूजा से जुड़ी वस्तुएं भी घर लाते हैं।

झाड़ू खरीदने को लेकर भी कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। इसे घर की सफाई और दरिद्रता दूर करने के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। वहीं, शनिवार को झाड़ू या सरसों का तेल खरीदने से बचने जैसी मान्यताएं कुछ परंपराओं में प्रचलित हैं। इन्हें सभी परिवारों या पंचांगों में समान रूप से लागू नियम नहीं माना जाना चाहिए।

सबसे जरूरी बात यह है कि खरीदारी अपनी जरूरत और बजट के अनुसार करें। धनतेरस मनाने के लिए महंगी वस्तु खरीदना अनिवार्य नहीं है। श्रद्धा से खरीदा गया छोटा-सा बर्तन या पूजा का दीपक भी इस पर्व का हिस्सा बन सकता है।

धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा क्यों होती है?

धनतेरस का संबंध भगवान धन्वंतरि से भी है, जिन्हें आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी कारण इस दिन को स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना से भी जोड़ा जाता है।

धनतेरस हमें यह संदेश देता है कि जीवन में धन के साथ स्वास्थ्य का महत्व भी उतना ही है। घर में सुख-समृद्धि की कामना करते समय परिवार के स्वास्थ्य, संतुलित जीवन और अच्छी आदतों पर ध्यान देना भी जरूरी है।

धनतेरस का महत्व

धनतेरस की शाम माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता में माता लक्ष्मी को धन, वैभव और सौभाग्य की देवी माना जाता है, जबकि कुबेर को धन का रक्षक कहा जाता है। भगवान गणेश की पूजा शुभ शुरुआत और विघ्नों को दूर करने की कामना से की जाती है।

इस दिन घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर दीप जलाने की परंपरा भी है। कई परिवार दीपावली से पहले घर की साफ-सफाई पूरी करते हैं और पूजा की तैयारियां शुरू कर देते हैं।

धनतेरस का वास्तविक संदेश केवल धन इकट्ठा करना नहीं, बल्कि धन का सही उपयोग, स्वास्थ्य की देखभाल और परिवार में सुख-शांति बनाए रखना भी है। इसलिए इस पर्व पर अपनी सामर्थ्य के अनुसार खरीदारी करें, पूजा में श्रद्धा रखें और आने वाले दीपावली उत्सव का स्वागत सकारात्मक सोच के साथ करें।

Suman  Mishra (Astrologer)
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Suman Mishra (Astrologer)

Astrologer Mail ID - suman1711@gmail.comsuman1711@gmail.com

मैं वर्तमान में न्यूजट्रैक और अपना भारत के लिए कंटेट राइटिंग कर रही हूं। इससे पहले मैने रांची, झारखंड में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग किया है और ईटीवी में 5 वर्षों का डेस्क पर काम करने का अनुभव है। मैं पत्रकारिता और ज्योतिष विज्ञान में खास रुचि रखती हूं। मेरे नाना जी पंडित ललन त्रिपाठी एक प्रकांड विद्वान थे उनके सानिध्य में मुझे कर्मकांड और ज्योतिष हस्त रेखा का ज्ञान मिला और मैने इस क्षेत्र में विशेषज्ञता के लिए पढाई कर डिग्री भी ली है

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