Diwali 2026 Date: 2 साल बाद नवंबर में आएगी दिवाली, तारीख को लेकर है कन्फ्यूजन तो यहां करें दूर

Diwali 2026 Date: दिवाली 8 नवंबर 2026, रविवार को मनाई जाएगी. जानें लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त, अमावस्या तिथि, पूजा विधि और धनतेरस से भाई दूज तक त्योहारों की पूरी लिस्ट.

Suman  Mishra (Astrologer)
Published on: 14 Oct 2026 7:30 AM IST
दिवाली 2026 कब है
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Diwali 2026 Date: दीपों का त्योहार दिवाली आने वाला है। हिंदू धर्म में दिवाली का विशेष महत्व है। इस दिन लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं, दीपक जलाते हैं और माता लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की पूजा करते हैं। मान्यता है कि दिवाली पर विधि-विधान से पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।

इस साल 2026 में दिवाली नवंबर में मनाई जाएगी। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल है कि इस बार दिवाली किस तारीख को है और लक्ष्मी पूजन का शुभ समय क्या रहेगा। जानते हैं दिवाली 2026 की सही तारीख, पूजा का मुहूर्त और इस त्योहार से जुड़ी जरूरी बातें।

दिवाली 2026 कब है? (Diwali 2026 Date)


हर साल कार्तिक महीने की अमावस्या तिथि को दिवाली मनाई जाती है। साल 2026 में अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11 .27 मिनट पर शुरू होगी और 9 नवंबर को दोपहर 12.31 मिनट पर समाप्त होगी।

दिवाली पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है। इस साल दिवाली यानी लक्ष्मी पूजन 8 नवंबर 2026, रविवार को किया जाएगा।इस दिन शाम के समय प्रदोष काल में पूजा करना शुभ माना जाता है।

दिवाली 2026 लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त

दिवाली पर माता लक्ष्मी की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखे।
पंचांग के अनुसार, इस बार लक्ष्मी पूजन का समय शाम 5 . 54 मिनट से रात 7 .50 मिनट तक बताया गया है।
इस दौरान भक्त माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा कर सकते हैं।
घर में दीपक जलाकर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।
पूजा के समय घर का वातावरण साफ और शांत रखें।
पूजा शुरू करने से पहले सभी जरूरी सामग्री तैयार कर लें, ताकि पूजा के बीच किसी चीज की कमी न हो।

दिवाली पर कैसे करें माता लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा?

दिवाली के दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने के लिए कुछ आसान नियमों का पालन किया जा सकता है।

पूजा स्थल की सफाई करें: सबसे पहले घर और पूजा करने की जगह को अच्छी तरह साफ करें। इसके बाद उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में एक चौकी रखें। चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।

गणेश जी और माता लक्ष्मी की मूर्ति रखें: चौकी पर भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें। परंपरा के अनुसार, गणेश जी को माता लक्ष्मी के दाहिनी ओर रखें।

पूजा का संकल्प लें: पूजा शुरू करने से पहले हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर पूजा का संकल्प करें। इसके बाद खुद पर और पूजा की सामग्री पर थोड़ा जल छिड़कें।

दीपक जलाएं: पूजा के दौरान घी का दीपक जलाएं। इसके बाद भगवान गणेश और माता लक्ष्मी को फूल, फल, मिठाई और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें।

मंत्र जाप और आरती करें: माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की आरती करें.।साथ ही माता लक्ष्मी के इस मंत्र का जाप कर सकते हैं- 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः.'

घर में दीपक सजाएं: पूजा पूरी होने के बाद मुख्य दीपक से घर के दूसरे दीपक जलाएं। इन्हें घर के मुख्य दरवाजे, आंगन, रसोई और छत पर रखें। दीपक जलाते समय सुरक्षा का ध्यान रखें।

दिवाली 2026 के त्योहारों की लिस्ट

दिवाली केवल एक दिन का त्योहार नहीं है, बल्कि इससे जुड़े कई पर्व लगातार मनाए जाते हैं।

धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक चलने वाले इन त्योहारों का अपना अलग महत्व है। साल 2026 में त्योहारों की तारीखें इस प्रकार हैं:

धनतेरस: 6 नवंबर 2026, शुक्रवार

नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली): 7 नवंबर 2026, शनिवार

दिवाली और लक्ष्मी पूजन: 8 नवंबर 2026, रविवार

गोवर्धन पूजा और अन्नकूट: 10 नवंबर 2026, मंगलवार

भाई दूज: 11 नवंबर 2026, बुधवार

इस तरह साल 2026 में दिवाली 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन शाम को माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाएगी। दिवाली की तैयारी के लिए घर की साफ-सफाई, पूजा सामग्री और दीपकों का इंतजाम पहले से कर लेना अच्छा रहेगा। पूजा के समय अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त की पुष्टि भी कर लें।

Suman  Mishra (Astrologer)
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Suman Mishra (Astrologer)

Astrologer Mail ID - suman1711@gmail.comsuman1711@gmail.com

मैं वर्तमान में न्यूजट्रैक और अपना भारत के लिए कंटेट राइटिंग कर रही हूं। इससे पहले मैने रांची, झारखंड में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग किया है और ईटीवी में 5 वर्षों का डेस्क पर काम करने का अनुभव है। मैं पत्रकारिता और ज्योतिष विज्ञान में खास रुचि रखती हूं। मेरे नाना जी पंडित ललन त्रिपाठी एक प्रकांड विद्वान थे उनके सानिध्य में मुझे कर्मकांड और ज्योतिष हस्त रेखा का ज्ञान मिला और मैने इस क्षेत्र में विशेषज्ञता के लिए पढाई कर डिग्री भी ली है

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