चेतावनी! गरुड़ पुराण का रहस्य: गिरा हुआ खाना कैसे लगाता है आपकी किस्मत पर ग्रहण

Garuda Purana चेतावनी! गरुड़ पुराण में छिपा रहस्य, गिरा हुआ खाना बिगाड़ता है किस्मत :गरुड़ पुराण में भोजन के लिए कई बाते कहीं गई है। उसमें गिरा हुआ अन्न अपवित्र माना गया है और यह भूत-प्रेतों का आहार बनता है। जानिए कैसे है?...

Suman  Mishra (Astrologer)
Published on: 10 Oct 2025 9:42 AM IST
चेतावनी! गरुड़ पुराण का रहस्य: गिरा हुआ खाना कैसे लगाता है आपकी किस्मत पर ग्रहण
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Garuda Purana: कहते है भोजन या कहे खाने का अपमान कभी नहीं करना चाहिए। सनातनी भोजन को केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि प्रसाद के समान पवित्र मानते है। धर्म ग्रंथों में अन्नं ब्रह्म यानी अन्न ही ब्रह्म है। इसका अर्थ यह है कि भोजन में ईश्वर का अंश समाया है। इसलिए कहा गया है कि अन्न का आदर करना, उसे व्यर्थ न करना और पवित्रता के नियमों के साथ ग्रहण करना ही सच्चा धर्म है। देवी अन्नपूर्णा को भोजन की अधिष्ठात्री मानते है, और उनके नाम से ही यह स्पष्ट होता है कि अन्न को लेकर हम कितने संवेदनशील है। लेकिन जितना अन्न पवित्र है, उतना ही कठोर नियम इसके सेवन को लेकर भी है।

भोजन करते समय बहुत सी बातों का ध्यान रखना चाहिए। इसमें गिरा हुआ भोजन भी वर्जित है। यह केवल अंधविश्वास नहीं, बल्कि धार्मिक और वैज्ञानिक तर्क भी है। धर्मग्रंथ कहते हैं कि जो भोजन जमीन पर गिर जाए, वह इंसान के खाने योग्य नहीं रहता।

गरुड़ पुराण का रहस्य

गरुड़ पुराण के प्रीत खंड में लिखा है कि जो भोजन ज़मीन पर गिरता है, वह तुरंत अपवित्र हो जाता है।वह अब न देवताओं का हिस्सा रहता है, न मनुष्य का।बल्कि वह प्रेत, पिशाच और ब्रह्मराक्षसों का आहार बन जाता है। इसीलिए कहा गया है कि गिरे हुए अन्न को खाना अशुभ होता है।

ऐसा करने वाले व्यक्ति के पुण्य कम हो जाते हैं, मन अशांत रहता है और जीवन में रुकावटें बढ़ सकती हैं।यह कोई डराने वाली बात नहीं, बल्कि अन्न का सम्मान कितना जरूरी है। ये समझना चाहिए।

गिरा हुआ भोजन क्यों नहीं खाना चाहिए?

अन्न की पवित्रता- अन्न देवत्व का प्रतीक है।जब वह ज़मीन पर गिरता है तो धूल, बैक्टीरिया और कीटाणुओं से दूषित हो जाता है।धर्म के अनुसार भी उसकी शुद्धता खत्म हो जाती है। इसलिए ऐसा अन्न न तो पूजा में चढ़ाया जा सकता है, न किसी को परोसा जा सकता है। भोजन में ब्रह्म का वास होता है इसलिए खाना खाने से पहले कई लोग 'ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्राह्मण हुतम्। ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना' मंत्र का जाप करते हैं।

जब आप खाना खाते हैं तो आपके आसपास अदृश्य शक्तियों का वास होता है, ऐसे में अगर भोजन करने के दौरान आपका भोजन नीचे गिरता है तो उसे प्रेत ग्रहण कर लेता है, ऐसे खाने को भूलकर भी नहीं खाना चाहिए, नीचे गिरा हुआ खाना खाने से आपके अंदर नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।

मान्यता है कि जब भोजन गिरता है तो अदृश्य प्राणी जैसे पितर या सूक्ष्म जीव उस अन्न को ग्रहण करते हैं।इसलिए कहा जाता है कि गिरा हुआ अन्न अब इंसानों का नहीं रहा, यह उन अदृश्य शक्तियों का हिस्सा बन गया है।

गरुड़ पुराण चेतावनी देता है कि जो व्यक्ति गिरा हुआ अन्न खाता है, उसकी किस्मत पर ग्रहण लग जाता है।ऐसे व्यक्ति के कामों में अड़चनें आती हैं और मानसिक तनाव बढ़ता है। यही कारण है कि संत-महात्मा कहते हैं। गिरे अन्न से दूर रहो, यह ब्रह्मराक्षस का होता है।

आज भी गांवों में एक कहावत कही जाती है-गिरा हुआ अन्न ब्रह्मराक्षस का होता है।बुजुर्ग मानते हैं कि जो इंसान गिरे अन्न को खाता है, उस पर नकारात्मक ऊर्जा का असर होता है। इसलिए लोग ऐसे अन्न को खुद खाने की बजाय गाय, कुत्तों या पक्षियों को दे देते हैं।यह न केवल श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि दान और करुणा का भी भाव जगाता है। इससे पशु-पक्षी भी तृप्त होते हैं और मनुष्य का पुण्य बढ़ता है।

धर्मानुसार गिरे हुए अन्न का सेवन अपवित्र है। तो विज्ञान -गिरे हुए अन्न को सेहत के लिए हानिकारक मानता है। इसमें गिरने से कीटाणु लग जाते हैं, यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।दोनों का उद्देश्य एक ही है- शरीर और मन की पवित्रता की रक्षा करना।विज्ञान भी यही कहता है कि गिरे हुए भोजन पर तुरंत धूल और बैक्टीरिया चिपक जाते हैं। इसे खाने से पेट खराब हो सकता है, संक्रमण या फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है।यानी यह नियम केवल धर्म नहीं, स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ है।

अन्न का सम्मान करना ही सच्ची भक्ति है।हमारे शास्त्रों में अन्न को कभी व्यर्थ न करने की बात कही गई है।यह जीवन का आधार है, इसलिए हर दाने का आदर जरूरी है।अगर भोजन गलती से गिर जाए, तो उसे न फेंके।बल्कि श्रद्धा से भूमि देवता या जीव-जंतुओं को अर्पित कर दें।

यह केवल परंपरा नहीं, बल्कि संस्कार है। जो त्याग में आदर के भाव को दिखाता है। धर्म, लोकमान्यता और विज्ञान तीनों में गिरा हुआ अन्न खाने योग्य नहीं है। मनुष्य को इसे ग्रहण कभी नहीं करना चाहिए। यह नेगेटिविटी का हिस्सा बनता है, इसलिए इसका त्याग ही सबसे सर्वोत्तम है।

भोजन करते वक्त आपके आसपास अदृश्य ऊर्जा मौजूद होती है, अगर आप गुस्से या गलत भाव से भोजन कर रहे हैं तो नकारात्मक शक्तियां गलत प्रभाव डाल सकती है, वहीं शांत और प्रसन्न होकर भोजन करने से खाना शरीर को लगता है और सेहत अच्छी रहती है।गरुड़ पुराण में कहा गया है कि जो इंसान गिरे हुए भोजन को खाता है, उसकी किस्मत पर ग्रहण लगता है। उसके जीवन में रुकावटें, मानसिक तनाव और अपयश बढ़ सकता है।

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Suman Mishra (Astrologer)

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मैं वर्तमान में न्यूजट्रैक और अपना भारत के लिए कंटेट राइटिंग कर रही हूं। इससे पहले मैने रांची, झारखंड में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग किया है और ईटीवी में 5 वर्षों का डेस्क पर काम करने का अनुभव है। मैं पत्रकारिता और ज्योतिष विज्ञान में खास रुचि रखती हूं। मेरे नाना जी पंडित ललन त्रिपाठी एक प्रकांड विद्वान थे उनके सानिध्य में मुझे कर्मकांड और ज्योतिष हस्त रेखा का ज्ञान मिला और मैने इस क्षेत्र में विशेषज्ञता के लिए पढाई कर डिग्री भी ली है

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