घर से निकलते समय पीछे से आवाज क्यों नहीं देनी चाहिए? जानें वजह और गलती से ऐसा हो जाए तो क्या करें

Astro Tips: घर से निकलते समय पीछे से आवाज देने की परंपरा क्यों है? जानें इसके पीछे की धार्मिक मान्यता, ज्योतिषीय कारण और गलती से आवाज लग जाए तो क्या करना चाहिए।

Suman  Mishra (Astrologer)
Published on: 17 Sept 2026 7:00 AM IST
घर से निकलते समय पीछे से आवाज क्यों नहीं देनी चाहिए? जानें वजह और गलती से ऐसा हो जाए तो क्या करें
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Astro Tips: अक्सर बचपन में घर से पापा-मम्मी बाहर निकलते थे तो हम बच्चे उन्हें पीछे से टोकते थे कहां जा रहे है तो उनसे डांट पड़ती थी कि बाहर जाते वक्त पीछे से न टोका करें। इसी तरह सुबह घर से निकलते समय आपने अपने बड़े-बुजुर्गों को अक्सर यह कहते हुए सुना होगा कि किसी व्यक्ति को पीछे से आवाज देकर नहीं रोकना चाहिए। खासतौर पर जब कोई इंसान किसी जरूरी काम, परीक्षा, नौकरी, इंटरव्यू, यात्रा या किसी शुभ कार्य के लिए घर से निकल रहा हो, तब उसे रास्ते में रोकने से बचने की सलाह है।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई लोग ऐसी बातों को पुरानी परंपरा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन भारतीय संस्कृति में घर से बाहर निकलने को लेकर कई तरह की मान्यताएं चली आ रही हैं। इनमें घर की चौखट से निकलते समय मन को शांत रखने और किसी तरह की बाधा से बचने की बातें भी शामिल हैं।

पीछे से आवाज न देने की परंपरा को भी धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ मन और व्यवहार से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि पीछे से आवाज देने से निश्चित रूप से कोई अनहोनी या नुकसान होता है। इसे मुख्य रूप से धार्मिक और पारंपरिक मान्यता के रूप में ही देखे...

घर से निकलते वक्त पीछे से टोकना गलत?

पुराने समय में घर की दहलीज को काफी महत्वपूर्ण था। घर के अंदर से बाहर निकलना केवल एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना नहीं, बल्कि किसी नए काम की शुरुआत के रूप में भी देखा जाता था।

जब कोई व्यक्ति घर से निकलता था तो परिवार के लोग उसे शुभकामनाएं देते थे और कोशिश करते थे कि वह बिना किसी रुकावट के अपने रास्ते पर आगे बढ़े। इसी सोच के चलते घर से निकल चुके व्यक्ति को पीछे से बुलाने या रोकने से बचने की परंपरा बनी।

मान्यता है कि अगर व्यक्ति निकलते ही वापस मुड़ जाए या किसी वजह से रुक जाए तो उसके मन में अनावश्यक चिंता या असमंजस पैदा हो सकता है।

मन में पैदा हो सकता है असमंजस

इसके पीछे एक सामान्य और व्यावहारिक वजह भी समझी जा सकती है। जब कोई व्यक्ति घर से निकलता है तो उसके दिमाग में अपने काम से जुड़ी कई बातें चल रही होती हैं। उसे समय पर पहुंचना होता है, रास्ता देखना होता है और जरूरी सामान संभालना होता है।

ऐसे में अगर पीछे से अचानक कोई उसका नाम लेकर आवाज लगा दे तो वह स्वाभाविक रूप से रुककर पीछे देखने लगता है। इससे कुछ समय के लिए उसका ध्यान भटक जाता है।

कई बार जल्दबाजी में वह यह भी भूल सकता है कि उसे कौन सी चीज साथ ले जानी थी। इसी वजह से बुजुर्ग बिना जरूरत पीछे से आवाज न लगाने की बात कहते रहे हैं।

काम के बीच ध्यान भटकने की मान्यता

धार्मिक मान्यताओं में माना जाता है कि जब कोई व्यक्ति किसी अच्छे या जरूरी काम के लिए घर से निकल रहा हो तो उसका मन सकारात्मक और स्थिर होना चाहिए। अचानक पीछे से बुलाए जाने पर उसके कदम रुक सकते हैं और मन में तरह-तरह के विचार आने लगते हैं।

इसी कारण कुछ परंपराओं में पीछे से आवाज देने को शुभ काम के बीच आने वाली बाधा से जोड़कर देखा जाता है।

यह जरूरी नहीं कि हर बार ऐसा होने पर कोई परेशानी आए। यह केवल एक पारंपरिक विश्वास है, जिसका उद्देश्य व्यक्ति को शांत मन से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करना माना जा सकता है।

ज्योतिष में राहु से जोड़ी जाती है ऐसी मान्यता

ज्योतिष में राहु को भ्रम, असमंजस और अचानक आने वाली परिस्थितियों से जोड़कर देखा जाता है। कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जब कोई व्यक्ति घर से किसी जरूरी काम के लिए निकलता है और उसी समय उसे पीछे से रोक दिया जाता है, तो इससे उसके मन में अस्थिरता आ सकती है

इसी सोच के कारण कुछ लोग इसे राहु से संबंधित नकारात्मक प्रभावों से जोड़ते हैं। हालांकि यह ज्योतिषीय विश्वास है और इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

घर की दहलीज है खास

घर से निकलते समय व्यक्ति को पीछे से बुलाने की बात को घर की सुख-समृद्धि से भी जोड़ा जाता है।
मान्यता है कि बिना वजह किसी को रोकना या बार-बार वापस बुलाना घर की सकारात्मक ऊर्जा को प्रभावित कर सकता है।

कुछ जगहों पर इसे मां लक्ष्मी की नाराजगी से भी जोड़कर देखा जाता है। ऐसी मान्यता के अनुसार इसका असर धन और आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है।

लेकिन यह बात ध्यान रखना जरूरी है कि यह धार्मिक विश्वास है, इसे वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जा सकता।अगर गलती से पीछे से आवाज दे दी।

क्या पीछे से आवाज देना हमेशा अशुभ होता है?

ऐसा जरूरी नहीं है। अगर कोई जरूरी काम हो तो किसी व्यक्ति को आवाज देना गलत नहीं है अगर वह अपना मोबाइल, जरूरी कागज, दवा, चाबी या कोई दूसरी आवश्यक चीज घर पर भूल गया है, तो उसे रोकना स्वाभाविक है।

इसलिए इसे कोई कठोर नियम नहीं समझना चाहिए। परंपरा में मुख्य बात यह मानी जाती है कि बिना जरूरत किसी व्यक्ति को घर से निकलते समय न रोका जाए।

खासकर जब वह किसी महत्वपूर्ण काम के लिए जा रहा हो, तब उसे शांत मन से जाने देना बेहतर है।इसके अलावा घर से निकलते समय भगवान का स्मरण करना, बड़ों का आशीर्वाद लेना और सकारात्मक सोच रखना भारतीय परंपरा में शुभ माना गया है।

निकलते समय क्या करना शुभ है?

भारतीय परंपरा में घर से निकलते समय भगवान का स्मरण करना शुभ माना जाता है। व्यक्ति अपने इष्टदेव को याद करके और अच्छे विचारों के साथ घर से निकल सकता है।

बड़ों का आशीर्वाद लेकर निकलना भी हमारी परंपरा का हिस्सा रहा है। इससे व्यक्ति के मन में आत्मविश्वास और सकारात्मकता बनी रहती है।

अगर कोई जरूरी काम हो तो निकलने से पहले यह भी देख लेना चाहिए कि मोबाइल, पर्स, चाबी, जरूरी कागज और दूसरी आवश्यक चीजें साथ हैं या नहीं। इससे रास्ते में वापस आने या किसी को पीछे से बुलाने की जरूरत कम पड़ती है।

इसका आसान मतलब क्या है?

बुजुर्गों की इस बात को डर से जोड़कर देखने के बजाय एक छोटी सी सावधानी के रूप में समझा जा सकता है। जब कोई व्यक्ति किसी जरूरी काम के लिए घर से निकल रहा हो तो उसे बिना वजह रोकने के बजाय अच्छे शब्दों के साथ विदा करना बेहतर है।

पीछे से आवाज देने को लेकर धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन व्यावहारिक रूप से भी शांत मन से घर से निकलना और अपने काम पर ध्यान रखना फायदेमंद होता है।

इसलिए अगर कभी पीछे से आवाज आ जाए तो इसे लेकर परेशान न हों। जरूरी बात है तो पूरी कर लें, भगवान का स्मरण करें और सकारात्मक सोच के साथ अपने काम के लिए आगे बढ़ें।

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Suman  Mishra (Astrologer)
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Suman Mishra (Astrologer)

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मैं वर्तमान में न्यूजट्रैक और अपना भारत के लिए कंटेट राइटिंग कर रही हूं। इससे पहले मैने रांची, झारखंड में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग किया है और ईटीवी में 5 वर्षों का डेस्क पर काम करने का अनुभव है। मैं पत्रकारिता और ज्योतिष विज्ञान में खास रुचि रखती हूं। मेरे नाना जी पंडित ललन त्रिपाठी एक प्रकांड विद्वान थे उनके सानिध्य में मुझे कर्मकांड और ज्योतिष हस्त रेखा का ज्ञान मिला और मैने इस क्षेत्र में विशेषज्ञता के लिए पढाई कर डिग्री भी ली है

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