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Guruwar Upayगुरुवार को जरूर करें ये काम, भगवान विष्णु की कृपा से दूर हो सकती हैं जीवन की बड़ी बाधाएं
Guruwar ke Upay : गुरुवार व्रत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा कैसे करें? जानिए गुरुवार की पूजा विधि, मंत्र, व्रत नियम और विवाह-धन संबंधी आसान उपाय।
Guruwar Ke Upay ज्योतिष में गुरुवार का दिन विशेष है। यह दिन देवगुरु बृहस्पति को समर्पित है। ज्योतिष में बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, विवाह, संतान, धन, शिक्षा और सौभाग्य का कारक ग्रह है। मान्यता है कि कुंडली में गुरु की स्थिति मजबूत होने पर व्यक्ति को जीवन में सम्मान, सुख-सुविधाएं और उन्नति के अवसर प्राप्त होते हैं। वहीं गुरु के कमजोर होने पर विवाह, शिक्षा, आर्थिक स्थिति और करियर से जुड़ी परेशानियां देखने को मिल सकती हैं।
गुरुवार के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने का भी विशेष विधान बताया गया है। भगवान विष्णु को सृष्टि का पालनकर्ता माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की आराधना करने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता बनी रहती है। इसलिए इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और देवगुरु बृहस्पति की पूजा करना शुभ है।
कई लोग गुरुवार को व्रत भी रखते हैं। मान्यता है कि नियमित रूप से गुरुवार का व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से मनोकामनाओं की पूर्ति में सहायता मिलती है। विवाह में आ रही बाधाओं, आर्थिक परेशानियों और जीवन में बार-बार आने वाली रुकावटों के लिए भी गुरुवार के दिन किए जाने वाले कुछ उपाय बताए गए हैं।
गुरुवार को कैसे करें भगवान विष्णु की पूजा?
गुरुवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें। पूजा के लिए पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। इसके बाद पूजा स्थान को साफ करके भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं।
पूजा में पीले फूल, पीले अक्षत, चंदन, हल्दी, पीली मिठाई और तुलसी दल का प्रयोग किया जा सकता है। भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय मानी जाती है, इसलिए उनकी पूजा में तुलसी दल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करें। इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का ध्यान करते हुए पूजा आरंभ करें। श्रद्धा के अनुसार भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी और भोग अर्पित करें। इसके बाद विष्णु मंत्र या विष्णु सहस्रनाम का पाठ कर सकते हैं।
पूजा के अंत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें तथा परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें।
गुरुवार व्रत की विधि
गुरुवार का व्रत अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार रखा जा सकता है। व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु का ध्यान करके व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
पूरे दिन सात्विक आचरण रखने और भगवान विष्णु का स्मरण करने की परंपरा है। फलाहार करने वाले लोग अपनी सुविधा और स्वास्थ्य के अनुसार फल, दूध या अन्य सात्विक आहार ले सकते हैं।
गुरुवार के दिन पीले रंग का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए पूजा में पीले फूल, हल्दी, चने की दाल, गुड़ और पीले वस्त्र का उपयोग किया जाता है। पूजा के बाद जरूरतमंद व्यक्ति को पीली वस्तुओं का दान करना भी शुभ है।
केले के पेड़ की पूजा क्यों की जाती है?
गुरुवार के दिन केले के पौधे की पूजा करने की परंपरा भी कई स्थानों पर प्रचलित है।
धार्मिक मान्यता में केले के पौधे को देवगुरु बृहस्पति से संबंधित माना जाता है।
यदि घर में केले का पौधा हो तो उसकी जड़ में जल अर्पित करके दीपक जलाया जा सकता है।
केले के पौधे के पास हल्दी, पीले फूल और अक्षत अर्पित कर भगवान बृहस्पति का ध्यान किया जाता है।
विवाह में देरी या वैवाहिक जीवन से जुड़ी परेशानियों के लिए भी लोग इस दिन केले के पौधे की पूजा करते हैं।
किसी भी उपाय को अंधविश्वास की तरह नहीं, बल्कि श्रद्धा और पारंपरिक धार्मिक आस्था के रूप में करना उचित है।
गुरुवार के प्रभावी मंत्र
गुरु ग्रह को प्रसन्न करने के लिए गुरुवार के दिन मंत्र जाप किया जाता है। इनमें से किसी एक मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप किया जा सकता है।
ॐ बृं बृहस्पतये नमः।
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः।
ॐ गुं गुरवे नमः। इन मंत्रों का 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है। मंत्र जाप के दौरान मन को शांत रखें और भगवान बृहस्पति का ध्यान करें।भगवान विष्णु की आराधना के लिए भी इस दिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप किया जा सकता है।
गुरुवार के दिन करें ये आसान उपाय
पीली वस्तुओं का दान करें- गुरुवार को चने की दाल, हल्दी, गुड़, पीले वस्त्र या अन्य जरूरत की वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है। दान हमेशा अपनी क्षमता के अनुसार करें।
भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित करें- भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व है। पूजा के समय श्रद्धा से तुलसी दल अर्पित किया जा सकता है।
केले के पौधे के पास दीपक जलाएं-यदि संभव हो तो केले के पौधे के समीप घी का दीपक जलाकर भगवान बृहस्पति का ध्यान करें।
विवाह संबंधी बाधा के लिए पूजा करें- विवाह में देरी की चिंता हो तो गुरुवार को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करके शीघ्र विवाह और अच्छे वैवाहिक जीवन की प्रार्थना की जा सकती है।
जरूरतमंद को भोजन कराएं- गुरुवार को किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना या अन्न का दान करना पुण्यकारी माना जाता है।
गुरुजनों का सम्मान करें- देवगुरु बृहस्पति ज्ञान और मार्गदर्शन के प्रतीक माने जाते हैं। इसलिए गुरुवार को अपने गुरु, शिक्षक या बुजुर्गों का सम्मान करना भी शुभ माना जाता है।
घर में सकारात्मक वातावरण रखें-इस दिन घर की साफ-सफाई करके पूजा स्थल को व्यवस्थित रखें। धार्मिक मान्यता के अनुसार स्वच्छ और शांत वातावरण में पूजा करने से मन एकाग्र रहता है।
गुरुवार को किन बातों का ध्यान रखें?
गुरुवार के दिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ लोग बाल और नाखून काटने से बचते हैं। कई परिवारों में इस दिन बाल धोने या कुछ विशेष घरेलू कार्यों को लेकर भी परंपरागत नियम माने जाते हैं। हालांकि इन नियमों का पालन व्यक्तिगत आस्था और पारिवारिक परंपरा के अनुसार किया जा सकता है।
व्रत रखने वाले व्यक्ति को क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से बचने का प्रयास करना चाहिए। किसी का अपमान न करें और जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करें। धार्मिक दृष्टि से व्रत का उद्देश्य केवल भोजन से परहेज करना नहीं, बल्कि संयम, सदाचार और सकारात्मक सोच को जीवन में अपनाना भी माना जाता है।
भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करें
गुरुवार को भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करना विशेष रूप से शुभ है।
धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का संबंध पालन, समृद्धि और संतुलन से है।
इसलिए पूजा के समय दोनों का स्मरण करना चाहिए।
माता लक्ष्मी को कमल के फूल अर्पित किए जा सकते हैं और भगवान विष्णु को तुलसी दल चढ़ाया जा सकता है।
इसके बाद परिवार की आर्थिक समृद्धि, सुख-शांति और अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करें।
यदि आप गुरुवार को लंबी पूजा नहीं कर सकते हैं तो सुबह स्नान करके भगवान विष्णु के सामने घी का दीपक जलाएं।
पीले फूल और तुलसी अर्पित करें और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
इसके बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार भोजन या पीली वस्तु का दान करें।


