Jyeshtha Purnima 2026 Date: अधिक मास पूर्णिमा 2026 कब है? इस दिन करें ये उपाय, दूर होंगी पैसे की कमी

Jyeshtha Purnima 2026 Date Kab Hai: अधिक मास पूर्णिमा 2026 कब है? हिंदू धर्म में पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। जानें पूर्णिमा तिथि का शुभ समय, पूजा विधि, स्नान-दान का महत्व और मनोकामना पूर्ति के विशेष उपाय।

Suman  Mishra
Published on: 20 May 2026 8:11 AM IST
Jyeshtha Purnima 2026(social media)
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Jyeshtha Purnima 2026 Kab Hai: हर मास के शुक्लपक्ष में पड़ने वाली पूर्णिमा तिथि का खास महत्व है। पूर्णिमा तिथि पर चंद्रमा अपने पूर्ण होता है। इस तिथि पर चंद्र देवता और भगवान श्री विष्णु की विधि-विधान से पूजन एवं दर्शन करने का बहुत है। इस बार की पूर्णिमा तिथि पुरुषोत्तममास या अधिक मास में पड़ेगी? इसकी पूजा विधि और इसका धार्मिक महत्व क्या है? जानते है पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा पर किस उपाय से मनोकामना पूरी होती है।

अधिक मास की पूर्णिमा कब है?

पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा ​तिथि 30 मई 2026, शनिवार के दिन है

तिथि का आरंभ- सुबह 11:57 बजे प्रारंभ होकर

तिथि का समापन- अगले दिन 31 मई को दोपहर 02:14 बजे तक रहेगी।
ऐसे में ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा का व्रत 30 मई 2026, शनिवार के दिन रखा जाएगा तो वहीं स्नान-दान की अधिक पूर्णिमा 31 मई 2026, रविवार के दिन रहेगी।
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय शाम के समय 07:36 बजे होगा।

अधिकमास पूर्णिमा की पूजा विधि

ज्येष्ठ अधिकमास पूर्णिमा पर व्यक्ति को सूर्योदय से पहले उठकर गंगा या फिर किसी तीर्थ पर जाकर स्नान करना चाहिए
इसके बाद पूरे विधि-विधान से भगवान श्री विष्णु और माता लक्ष्मी के मंदिर में जाकर दर्शन और विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए।
पूर्णिमा पर भगवान श्री लक्ष्मीनारायण से मनचाहा आशीर्वाद पाने के लिए साधक को व्रत, पूजन और कथा का पाठ करना चाहिए।
व्रत वाले दिन भूलकर भी अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए और पूरे दिन फलाहार करना चाहिए।

श्री हरि की पूजा का पूरा पुण्यफल पाने के लिए इस दिन उनके मंत्र का जप और पूजा के अंत में आरती करना बिल्कुल न भूलें।

अधिक मास की पूर्णिमा का उपाय

मान्यताओं के अनुसार पीपल के पेड़ पर इस विशेष दिन भगवान विष्णु संग माँ लक्ष्मी वास करते हैं। इसलिए अगर कोई व्यक्ति एक लोटे में पानी भर कर उसमें कच्चा दूध और बताशा डालकर पीपल के पेड़ को अर्पित करता है तो इससे उस व्यक्ति को रुका हुआ धन प्राप्‍त होने के साथ उसके बिज़नेस में भी बड़ा लाभ मिलता है।

इस दिन पति संग पत्नी को चंद्र देव को दूध से अर्ध्य देने से उनके जीवन में आ रही हर छोटी-बड़ी सभी समस्याये दूर हो जाती है। गौरतलब है कि यह काम पति या पत्‍नी दोनों में से कोई अकेला भी कर सकता है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार आज की रात अगर कोई किसी कुएं में एक चम्‍मच से दूध डालता है तो उसका भाग्‍य चमक उठने के साथ यदि उसे से किसी भी जरूरी कार्य में कोई बाधा आ रही होती है तो वो भी तत्काल दूर हो जाती है।

ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा पर भगवान विष्णु की साधना के साथ केले और तुलसी की विशेष रूप से पूजा करनी चाहिए।

ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा पर व्यक्ति को अपने सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति लोगों को अन्न, वस्त्र और धन आदि का दान करना चाहिए।

ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा पर पीपल, वट, गूलर, केला, तुलसी, अशोक, बेल आदि का पौधा लगाने पर भी अत्यधिक पुण्यफल प्राप्त होता है।

जिस पूर्णिमा तिथि को भगवान श्री लक्ष्मीनारायण की साधना-आराधना के लिए अत्यंत ही शुभ और पुण्यदायी माना गया है, वह जब अधिक मास या फिर कहें पुरुषोत्तम मास में पड़ती है तो वह कई गुना अधिक फलदायी हो जाती है।

हिंदू मान्यता के अनुसार अधिक मास की पूर्णिमा पर किसी जल तीर्थ पर स्नान-दान और श्री हरि की विधि-विधान से साधना करने पर साधक को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और पूरे साल उस पर श्री हरि के साथ माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।

इस दिन जिन जातकों की जन्म कुंडली में कोई ग्रह दोष हो तो उसे भी दूर करने के विशेष उपाय किये जाते हैं। इसके लिए पीपल और नीम की त्रिवेणी के नीचे विष्णु सहस्त्रनाम या शिवाष्टक का पाठ करना बेहतरीन उपाए होता है।

आज के शुभ दिन माँ लक्ष्‍मी की तस्वीर पर 11 कौड़ियां चढ़ा कर उस पर हल्‍दी से तिलक लगाने से हर मनोकामनाएं पूर्ण होती है। लेकिन ध्यान रखे अगली सुबह इन्‍हें किसी लाल कपड़े में बांध कर अपनी तिजोरी में रख देने से आपकी आर्थिक स्थिति मज़बूत बनती है।

Suman  Mishra

Suman Mishra

एस्ट्रोलॉजी एडिटर

मैं वर्तमान में न्यूजट्रैक और अपना भारत के लिए कंटेट राइटिंग कर रही हूं। इससे पहले मैने रांची, झारखंड में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग किया है और ईटीवी में 5 वर्षों का डेस्क पर काम करने का अनुभव है। मैं पत्रकारिता और ज्योतिष विज्ञान में खास रुचि रखती हूं। मेरे नाना जी पंडित ललन त्रिपाठी एक प्रकांड विद्वान थे उनके सानिध्य में मुझे कर्मकांड और ज्योतिष हस्त रेखा का ज्ञान मिला और मैने इस क्षेत्र में विशेषज्ञता के लिए पढाई कर डिग्री भी ली है Author Experience- 2007 से अब तक( 17 साल) Author Education – 1. बनस्थली विद्यापीठ और विद्यापीठ से संस्कृत ज्योतिष विज्ञान में डिग्री 2. रांची विश्वविद्यालय से पत्राकरिता में जर्नलिज्म एंड मास कक्मयूनिकेश 3. विनोबा भावे विश्व विदयालय से राजनीतिक विज्ञान में स्नातक की डिग्री

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