कामिका एकादशी पर बनेंगे 2 शुभ योग, Kamika Ekadashi 2026: जानें पूजा का सही समय और खास उपाय

Kamika Ekadashi 2026: सावन कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी 9 अगस्त को होगी। जानें पूजा का शुभ समय, द्विपुष्कर-हर्षण योग और व्रत का धार्मिक महत्व। इस दिन श्रीविष्णु और शिव की पूजा करने से हर मनोरथ पूर्ण होते हैं।जानते है कब है

Suman  Mishra (Astrologer)
Published on: 8 Aug 2026 5:00 AM IST
Bharat Mein Bhagwan Vishnu Ke Famous Mandir
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Kamika Ekadashi 2026 कामिका एकादशी 2026: सावन के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को कामिका एकादशी कहते हैं। इस बार कामिका एकादशी 9 अगस्त को रखा जायेगा। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना कर उनकी कृपा प्राप्त की जाती है। साल की 24 एकादशियों में सावन की कामिका एकादशी का अपना महत्व है। इस एकादशी से भूत, प्रेत और डर का नाश होता है।

सावन की कामिका एकादशी के दिन श्रीविष्णु की पूजा के साथ श्रीगणेश और शिव और गंधर्व-नागों की पूजा भी विधि-विधान से करने से घर परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती हैं। पुराणों में ऐसी मान्यता है कि इस व्रत के पुण्य-प्रताप से पापकर्मों के पाश से मुक्ति मिलती है। साथ ही भौतिक जीवन में सकल मनोरथ सिद्ध होते हैं।

कामिका एकादशी का शुभ मुहूर्त

साल 2026 में सावन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 8 अगस्त 2026 को दोपहर 1 बजकर 59 मिनट पर आरंभ होगी। यह तिथि अगले दिन यानी 9 अगस्त को देर रात 1 बजकर 4 मिनट तक रहेगी।

एकादशी का पारण का समय –10 अगस्त प्रातःकाल 05:37 मिनट से प्रातःकाल 07:05 मिनट|

कामिका एकादशी का अद्भुत योग

अभिजीत मुहूर्त - 12:06 PM – 12:59 PM

अमृत काल - 06:07 PM – 07:36 PM

ब्रह्म मुहूर्त - 04:20 AM – 05:08 AM

कामिका एकादशी पर बनेंगे दो शुभ योग

इस बार कामिका एकादशी का दिन धार्मिक दृष्टि से इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि इस तिथि पर दो शुभ योगों का संयोग बन रहा है।

द्विपुष्कर योग:

9 अगस्त को सुबह 11 बजकर 4 मिनट से दोपहर 2 बजकर 43 मिनट तक द्विपुष्कर योग रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में इस योग को शुभ कार्यों के लिए विशेष माना जाता है।

हर्षण योग:

इसके अलावा पूरे दिन हर्षण योग का प्रभाव रहेगा। यह योग 10 अगस्त को रात 2 बजकर 4 मिनट पर समाप्त होगा।

धार्मिक मान्यता के अनुसार शुभ योगों में भगवान विष्णु की आराधना, मंत्र जाप, व्रत, दान और पुण्य कार्य करने से साधक को विशेष लाभ प्राप्त होता है। हालांकि किसी भी शुभ कार्य के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त की पुष्टि करना उचित माना जाता है।

कामिका एकादशी विधि और महत्व

कामिका एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान के बाद भगवान विष्णु की पंचोपचार विधि से पूजा कर उन्हें पीले चंदन का तिलक कर पीले फल-फूल, पीली मिठाई, तुलसी पत्र अर्पण करें। पूजा में ओम नमो भगवते वासुदेवायः मंत्र का जाप व व्रत कथा का पाठ करे।कामिका एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत, कथा महात्मय सुनने के साथ दान-पुण्य का भी महत्व है। अगले दिन द्वादशी को व्रत का पारण करे।इससे श्रीहरि की कृपा बरसती है। मुक्ति का मार्ग खुलता है।

विष्णु पुराण,पद्म पुराण व भागवद् के अनुसार कामिका एकादशी समस्त भय और पापों का नाश करने वाली संसार के मोह माया में डूबे हुए प्राणियों को पार लगाने वाली नाव के समान बताया गया है। इस व्रत के करने संतान सुख, अश्वमेध यज्ञ के समान फल मिलता है।

शास्त्रों के अनुसार कामिका एकादशी व्रत में चावल नहीं खाना चाहिए। एकादशी व्रत में मसूर की दाल, मूली, बैंगन, प्याज, लहसुन, शलजम, गोभी और सेम का सेवन नहीं करना चाहिए।

कामिका एकादशी के दिन रखें ध्यान

कामिका एकादशी के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। इस दिन तुलसी की पत्तिया नहीं तोड़नी चाहिए।

एकादशी के दिन तुलसी में जल नहीं देना चाहिए।

एकादशी के दिन तामसिक भोजन का सेवन वर्जित होता है।

कामिका एकादशी पर क्या नहीं करना चाहिए?

एकादशी व्रत में केवल खान-पान ही नहीं बल्कि मन और व्यवहार की शुद्धता पर भी ध्यान देने की परंपरा है। इस दिन क्रोध, छल-कपट, अपशब्द और किसी को परेशान करने से बचना चाहिए। सामर्थ्य के अनुसार सात्विक जीवनशैली अपनाएं और अनावश्यक विवादों से दूर रहें।

व्रत रखने वाले लोगों को अपने स्वास्थ्य और क्षमता का भी ध्यान रखना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को उपवास करने में परेशानी होती है, तो वह अपनी शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए फलाहार या सात्विक भोजन का विकल्प चुन सकता है।

तुलसी पूजा का क्यों है विशेष महत्व?

भगवान विष्णु की आराधना में तुलसी को अत्यंत प्रिय माना गया है। यही वजह है कि कामिका एकादशी पर विष्णु पूजा के साथ तुलसी का स्मरण और पूजन भी किया जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित करने से भक्त को पुण्य की प्राप्ति होती है। हालांकि तुलसी दल तोड़ते समय धार्मिक परंपराओं और घर की मान्यताओं का पालन करना चाहिए।

कामिका एकादशी व्रत से क्या फल मिलता है?

धार्मिक ग्रंथों में कामिका एकादशी को पुण्यदायी व्रत बताया गया है। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ इस व्रत को करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और व्यक्ति को जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

नोट : ये जानकारियां धार्मिक आस्था और मान्यताओं पर आधारित हैं। Newstrack.com इसकी पुष्टि नहीं करता है।इसे सामान्य रुचि को ध्यान में रखकर लिखा गया है

Suman  Mishra (Astrologer)
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Suman Mishra (Astrologer)

Astrologer Mail ID - suman1711@gmail.comsuman1711@gmail.com

मैं वर्तमान में न्यूजट्रैक और अपना भारत के लिए कंटेट राइटिंग कर रही हूं। इससे पहले मैने रांची, झारखंड में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग किया है और ईटीवी में 5 वर्षों का डेस्क पर काम करने का अनुभव है। मैं पत्रकारिता और ज्योतिष विज्ञान में खास रुचि रखती हूं। मेरे नाना जी पंडित ललन त्रिपाठी एक प्रकांड विद्वान थे उनके सानिध्य में मुझे कर्मकांड और ज्योतिष हस्त रेखा का ज्ञान मिला और मैने इस क्षेत्र में विशेषज्ञता के लिए पढाई कर डिग्री भी ली है

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