Main Gate Vastu Tips:मुख्य द्वार है घर की आत्मा, एक चूक बिगाड़ सकती है सब कुछ, समय रहते रहें सतर्क

Main Gate Vastu Tips in Hindi :मेन दरवाजा सिर्फ घर में घुसने का जरिया नही है, बल्कि इससे घर की समृद्धि जुड़ी होती है, मुख्य द्वार वास्तु टिप्स जाने सही दिशा, पद, रंग, गणेश चिन्ह, नेमप्लेट और रोशनी से कैसे आए घर में सकारात्मक ऊर्जा और धन।

Suman  Mishra
Published on: 7 Feb 2026 9:41 AM IST
Main Gate Vastu Tips:मुख्य द्वार है घर की आत्मा, एक चूक बिगाड़ सकती है सब कुछ, समय रहते रहें सतर्क
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Main Gate Vastu Tips : जीवन को सुचारू व्यवस्थित रुप से चलाने के लिए ज्योतिष और वास्तु का सहारा लिया जाता है। आज अधिकतर लोग घर बनाते समय डिजाइन, रंग और आधुनिक सुविधाओं पर ध्यान देते है, लेकिन घर के प्रवेश द्वार को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। वास्तु में प्रवेश द्वार को सिर्फ एक दरवाजा नहीं, बल्कि घर की आत्मा है। यही वह जगह है, जहां से हर दिन ऊर्जा, सोच और माहौल प्रवाह होता रहता है।

वास्तु में मुख्य दरवाजा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि यह सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि के लिए प्रवेश बिंदु का प्रतीक है। एक अच्छी तरह से डिज़ाइन किया गया और ठीक से रखा गया मुख्य द्वार सकारात्मक कंपन के प्रवाह को बढ़ा सकता है और एक सामंजस्यपूर्ण रहने का वातावरण बना सकता है। इस ब्लॉग में, हम मुख्य द्वार वास्तु के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे, जिसमें इसकी अवस्थिति, दिशा, आकार, सामग्री, रंग, नेमप्लेट, सीढ़ियों की संख्या, देवताओं की मूर्तियाँ और प्रकाश व्यवस्था शामिल हैं। इन वास्तु विचारों को लागू करके, आप अपने मुख्य द्वार को वास्तु सिद्धांतों के अनुरूप बना सकते हैं और अपने घर में सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकते हैं

मुख्य द्वार के ऊपर गणेश जी, स्वास्तिक, या 'ॐ' जैसे शुभ चिह्न लगाना वास्तु दोष दूर करता है और सुख-समृद्धि लाता है।

दरवाजे से जुड़ी बातें

दरवाजा हमेशा घर के अंदर की ओर खुलना चाहिए।

घर का सबसे बड़ा और प्रमुख दरवाज़ा होना चाहिए।

दरवाजा उत्तर में नीला, ग्रे; पूर्व में हरा, भूरा; पश्चिम में पीला, सफेद; दक्षिण में लाल (यदि आवश्यक हो)।

दरवाज़े को हमेशा साफ रखें, गंदगी और जूते-चप्पल बाहर ही उतारें।

पर्याप्त रोशनी हो, अंधेरा न हो।

दरवाज़े के फ्रेम पर गणेश, ॐ, स्वास्तिक, पंचमुखी हनुमान लगाएं।

मुख्य द्वार पर तुलसी, अनार या शमी के पौधे लगाएं।

साफ और अच्छी डिज़ाइन वाली नेमप्लेट लगाएं।

चरमराहट की आवाज़ से बचें (ऊर्जा प्रवाह बाधित होता है)।हमेशा अपना दाहिना पैर पहले अंदर रखें ।

दरवाजे का वास्तु

अगर यह सही जगह और सही दिशा में हो, तो जीवन में सुख-शांति अपने आप बनी रहती है, लेकिन अगर इसमें गड़बड़ी हो जाए, तो बिना वजह परेशानियां जीवन में जगह बनाने लगती हैं।कुछ लोगों का मानना है कि दक्षिण दिशा अशुभ होती है या उत्तर दिशा हमेशा शुभ होती है, लेकिन यह अधूरी जानकारी है।

दिशा में पद का ध्यान रखें

वास्तु शास्त्र के अनुसार, हर दिशा के भीतर कई छोटे-छोटे हिस्से होते हैं, जिन्हें पद या ग्रिड कहा जाता है। मुख्य द्वार अगर सही पद पर बना हो, तो वही दिशा शुभ फल देती है और अगर गलत पद पर हो तो अच्छी मानी जाने वाली दिशा भी परेशानी का कारण बन सकती है।

क्या दक्षिण दिशा अशुभ?

दक्षिण दिशा को लेकर सबसे ज्यादा परेशानी होती है। क्योंकि कई लोग मानते हैं कि दक्षिण मुखी घर में रहने से नुकसान होता है, लेकिन वास्तु में इस सोच को पूरी तरह गलत मानता है। दक्षिण दिशा को ऊर्जा, स्थिरता और अनुशासन की दिशा कहा गया है। यदि इस दिशा में प्रवेश द्वार सही स्थान पर बना हो, तो ऐसा घर व्यक्ति को धन, प्रतिष्ठा और समाज में सम्मान तक दिला सकता है। कई सफल और प्रभावशाली लोग दक्षिण मुखी घरों में रहते हैं। परेशानी तब आती है, जब यह दरवाजा गलत पद पर बना हो। तब वही घर मानसिक तनाव और आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है।

पूर्व दिशा में रखें इस बात का ध्यान

पूर्व दिशा को सूरज की दिशा कहा जाता है। सूरज जैसे पूरी दुनिया को रोशनी देता है। वैसे ही पूर्व दिशा में बना सही प्रवेश द्वार घर में नई ऊर्जा भर देता है। इस दिशा का द्वार बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और विचार पर अच्छा असर डालता है। घर में सकारात्मक माहौल बना रहता है और लोग खुद को ज्यादा सक्रिय और आत्मविश्वासी महसूस करते हैं। अगर यही द्वार पूर्व दिशा में गलत स्थान पर बन जाए, तो आलस्य और अस्थिरता भी बढ़ सकती है।

उत्तर दिशा खर्च की बढ़त

उत्तर दिशा वास्तु के अनुसार, कुबेर की दिशा है। इस दिशा में सही पद पर बना मुख्य द्वार घर में आय के नए रास्ते खोल सकता है। नौकरी, व्यापार, और करियर से जुड़े मामलों में लाभ मिलता है। घर में पैसों की आवाजाही बनी रहती है, लेकिन यदि उत्तर दिशा का द्वार गलत स्थान पर हो तो खर्च बढ़ सकता है और मेहनत के बावजूद परिणाम कमजोर मिल सकते हैं।

सकारात्मक ऊर्जा बिना रुकावट

मुख्य द्वार की दिशा के साथ-साथ उसकी बनावट भी उतनी ही जरूरी होती है। वास्तु शास्त्र कहता है कि प्रवेश द्वार मजबूत, साफ और सुंदर होना चाहिए। टूटा हुआ, चरमराता या गंदा दरवाजा नकारात्मक ऊर्जा को न्योता देता है। मुख्य द्वार घर के बाकी दरवाजों से थोड़ा बड़ा होना शुभ माना गया है, ताकि सकारात्मक ऊर्जा बिना रुकावट अंदर आ सके। द्वार के सामने अंधेरा, कूड़ा, शौचालय या भारी चीजें होना अच्छा नहीं माना जाता, क्योंकि इससे ऊर्जा का प्रवाह रुक जाता है।

--आईएएनएस

Suman  Mishra

Suman Mishra

एस्ट्रोलॉजी एडिटर

मैं वर्तमान में न्यूजट्रैक और अपना भारत के लिए कंटेट राइटिंग कर रही हूं। इससे पहले मैने रांची, झारखंड में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग किया है और ईटीवी में 5 वर्षों का डेस्क पर काम करने का अनुभव है। मैं पत्रकारिता और ज्योतिष विज्ञान में खास रुचि रखती हूं। मेरे नाना जी पंडित ललन त्रिपाठी एक प्रकांड विद्वान थे उनके सानिध्य में मुझे कर्मकांड और ज्योतिष हस्त रेखा का ज्ञान मिला और मैने इस क्षेत्र में विशेषज्ञता के लिए पढाई कर डिग्री भी ली है Author Experience- 2007 से अब तक( 17 साल) Author Education – 1. बनस्थली विद्यापीठ और विद्यापीठ से संस्कृत ज्योतिष विज्ञान में डिग्री 2. रांची विश्वविद्यालय से पत्राकरिता में जर्नलिज्म एंड मास कक्मयूनिकेश 3. विनोबा भावे विश्व विदयालय से राजनीतिक विज्ञान में स्नातक की डिग्री

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