Navratri 2025: मां दुर्गा को क्यों प्रिय है हलवा,पूरी और चने का भोग? देवीभागवत पुराण से जानें वजह

Maa Durga Ka Priay bhog: कुल मिलाकर नवरात्री का भोग अपने -आप में एक खास संदेश है ।

Shivani Jawanjal
Published on: 1 Oct 2025 2:37 PM IST
Navratri 2025: मां दुर्गा को क्यों प्रिय है हलवा,पूरी और चने का भोग? देवीभागवत पुराण से जानें वजह
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Maa Durga traditional food:नवरात्रि हिन्दू धर्म का एक पवित्र पर्व है, जिसे मां दुर्गा की शक्ति और आराधना के लिए मनाया जाता है। यह त्योहार नौ दिनों तक चलता है और इन दिनों भक्त मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा करते हैं और उन्हें भोग अर्पित करते हैं। इस दौरान हलवा, पूरी और चने का भोग विशेष महत्व रखता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन विशेष व्यंजनों को देवी को अर्पित करने की परंपरा क्यों है? इसके पीछे देवीभागवत पुराण और हिन्दू धार्मिक मान्यताएँ कई गहरी वजहें बताती हैं।

हलवा - मिठास और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक

नवरात्रि में देवी को हलवा, पूरी और चने का भोग अर्पित करना एक खास परंपरा है। देवी भागवत पुराण, भविष्य पुराण, मार्कण्डेय पुराण और स्कंद पुराण में हलवे को देवी का प्रिय मीठा भोग बताया गया है। हलवा मिठास, सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इसे अर्पित करने से घर में शांति और आनंद आता है। हलवा बनाने में इस्तेमाल होने वाला घी और ड्राय फ्रूट्स देवी की शक्ति, संपन्नता और ऊर्जा का प्रतीक माने जाते हैं। घी शरीर और मस्तिष्क के लिए लाभकारी होता है और भोग को और समृद्ध बनाता है।

पूरी सरलता और श्रद्धा का प्रतीक

देवी भागवत पुराण में देवी माता और उनके शक्तिशाली रूपों की स्तुति की गई है और भक्तों की भक्ति, श्रद्धा और पूजा की महिमा बताई गई है। इसमें सरल और पवित्र भोजन को देवी की कृपा पाने का माध्यम माना गया है। नवरात्रि में भोग में शामिल पूरी का गोल आकार अनंतता, पूर्णता और ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है। पूरी बनाना मेहनत और समय मांगता है इसलिए इसे बनाने और अर्पित करने में भक्तों की भक्ति और समर्पण झलकता है। हालांकि पुराणों में पूरी के भोग के महत्व का सीधे तौर पर वर्णन नहीं है, फिर भी यह परंपरागत धार्मिक अनुष्ठानों में श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक माना जाता है।

चने - शक्ति और स्वास्थ्य का प्रतीक

चने या काबुली चने को शक्ति, ऊर्जा और स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है। देवीभागवत पुराण और स्कंद पुराण में लिखा गया है कि देवी को चना बहुत पसंद है। नवरात्रि में इसे भोग में अर्पित करने से भक्तों को शक्ति और ऊर्जा मिलती है और परिवार में स्वास्थ्य, लंबी उम्र और समृद्धि बनी रहती है। चने में प्रोटीन और पौष्टिक तत्व होते हैं जो शरीर के लिए फायदेमंद हैं। इसके साथ ही चना आध्यात्मिक रूप से भी लाभकारी माना जाता है। यह मां दुर्गा के योद्धा स्वरूप से जुड़ा है और सहनशीलता और ताकत का प्रतीक है।

धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण

देवीभागवत पुराण में बताया गया है कि देवी को अर्पित भोजन में भक्त की भक्ति और श्रद्धा का भाव होना चाहिए। यह भोजन केवल स्वाद या पौष्टिकता के लिए नहीं बल्कि भक्त के दिल और भावना को भी दर्शाता है। इसलिए हलवा, पूरी और चने को नवरात्रि में विशेष भोग के रूप में देवी के सामने रखा जाता है। इसे अर्पित करने के बाद प्रसाद के रूप में भक्तों में बांटा जाता है, जो सामूहिक आनंद, आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता फैलाता है। इस भोग के माध्यम से घर-परिवार और मन में शांति, समृद्धि और दिव्यता आती है। इसलिए इसे शुद्ध मन और श्रद्धा के साथ तैयार करना और अर्पित करना बहुत महत्वपूर्ण माना गया है।

लोक मान्यताएँ और परंपराएँ

लोकमान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में देवी को हलवा, पूरी और चने का भोग अर्पित करने से घर में धन-धान्य, सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। माता की प्रसन्नता से जीवन की कठिनाइयाँ दूर होती हैं और परिवार में प्रेम और सद्भाव बढ़ता है। यह परंपरा केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक नहीं है बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। पुराणों जैसे देवीभागवत, स्कंद पुराण, भविष्य पुराण और मार्कण्डेय पुराण में भी इस भोग का महत्व बताया गया है।

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