Padmini Ekadashi 2026 Date Kab Hai:अधिकमास की पद्मिनी एकादशी कब है, जानिए शुभ मुहूर्त विधि और कथा

Padmini Ekadashi 2026 Kab Hai: अधिक मास में आने वाली एकादशी को पद्मिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह तीन साल में एक बार आती है। जानते है कब है पद्मिनी एकादशी का व्रत

Suman  Mishra
Published on: 22 May 2026 1:12 PM IST
Padmini Ekadashi 2026 Date Kab Hai:अधिकमास की पद्मिनी एकादशी कब है, जानिए शुभ मुहूर्त विधि और कथा
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Padmini Ekadashi 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिकमास के एकादशी तिथि को पद्मिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ व्रत रखा जाता है। मान्यतााओं के अनुसार पद्मिनी एकादशी के दिन व्रत रखने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति अपरा एकादशी को श्री मन नारायण के विष्णु स्वरुप की पूजा पुरे मनोभाव से करता है वो सब पापों से मुक्त होकर गोलोक में चला जाता है।

बता दें कि इस दिन श्री विष्णुजी को पंचामृत, रोली,मोली,गोपी चन्दन,अक्षत,पीले पुष्प,ऋतुफल,मिष्ठान आदि अर्पित कर धूप-दीप से आरती उतारकर दीप दान करना चाहिए।एकदशी तिथि भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है। हर माह में दो एकादशी के व्रत रखे जाते हैं, लेकिन जब एकादशी का व्रत अधिकमास में आता है, तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। अधिकमास को मलमास भी कहते हैं। मलमास में दो एकादशी व्रत पड़ते हैं। एकादशी तिथि के साथ-साथ मलमास का महीना भी भगवान विष्णु का ही माना जाता है। मलमास में पड़ने वाली पद्मिनी एकादशी शास्त्रों और पुराणों में के अनुसार बहुत खास है।

ये एकादशी मलमास की पहली एकादशी होती है। ये मलमास में पड़ती है, इसलिए इसको पुरुषोत्तम या मलमासी एकादशी भी कहते हैंय़ इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा व व्रत किया जाता है. मान्यता है कि पद्मिनी एकादशी के दिन किए गए व्रत और पूजन से अश्वमेध यज्ञ के बराबर का पुण्य प्राप्त होता है, तो जानते हैंं कि पद्मिनी एकादशी का व्रत कब है?

पद्मिनी एकादशी का व्रत कब है?

ज्येष्ठ अधिकमास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 26 मई को सुबह 05 .10 मिनट पर

इस तिथि का समापन 27 मई को सुबह 06 . 21 मिनट पर हो जाएगा।

ऐसे में उदयातिथि को मानते हुए पद्मिनी एकादशी का व्रत 27 मई, बुधवार के दिन रखा जाएगा।

पद्मिनी एकादशी पूजा मुहूर्त

पद्मिनी एकादशी के दिन पूजा का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04.03 मिनट से 04 . 44 मिनट तक रहने वाला है।
शाम के समय पूजा का शुभ मुहूर्त 07 . 12 मिनट से 08 बजकर 13 मिनट तक रहने वाला है। सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 05 .25 मिनट से 05 .56 मिनट तक रहने वाला है।

पद्मिनी एकादशी पूजा विधि

पद्मिनी एकादशी पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। एकादशी के दिन सुबह उठकर नित्यकर्म करने के बाद नए या साफ़ कपड़े पहनकर पूजाघर में जाकर भगवान के सामने व्रत करने के संकल्प को मन ही मन दोहरायें। इसके बाद भगवान विष्णु की आराधना कर पंडित जी से व्रत की कथा सुनें। विष्णु भगवान की पूजा करते समय ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मन्त्र का पाठ अवश्य करें। मान्यताओं के अनुसार अपरा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से मनुष्य को विशेष फल की प्राप्ति होती है। कई धर्म पुराणों में इस व्रत को करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति की बात मिली है। पद्मपुराण केअनुसार अपरा एकादशी के दिन पूरे मन और विधि-विधान से व्रत करने से मरने के बाद मनुष्य को नर्क की यातनाएं नहीं झेलनी पड़ती हैं। और आत्मा प्रेत योनी में ना भटक कर सीधे मुक्त हो जाती है। इतना ही नहीं इस व्रत को करने से आपके समस्त रोग, दोष और पापों का नाश हो जाता है।

पद्मिनी एकादशी व्रत के पारण का समय

एकादशी के व्रत का पारण हमेशा द्वादशी तिथि पर ही किया जाता है। पद्मिनी एकादशी के व्रत का पारण 28 मई को किया जाएगा। इस दिन व्रत पारण का शुभ समय 05 . 25 मिनट से 07 . 56 मिनट तक रहेगा।इसी समय पर द्वादशी तिथि समाप्त हो जाएगी।

पद्मिनी एकादशी व्रत कथा!

हे म‍ुनिवर! पूर्वकाल में त्रेयायुग में हैहय नामक राजा के वंश में कृतवीर्य नाम का राजा महिष्मती पुरी में राज्य करता था। उस राजा की 1,000 परम प्रिय स्त्रियां थीं, परंतु उनमें से किसी को भी पुत्र नहीं था, जो कि उनके राज्यभार को संभाल सके। देव‍ता, पितृ, सिद्ध तथा अनेक चिकि‍त्सकों आदि से राजा ने पुत्र प्राप्ति के लिए काफी प्रयत्न किए, लेकिन सब असफल रहे।

तब राजा ने तपस्या करने का निश्चय किया। महाराज के साथ उनकी परम प्रिय रानी, जो इक्ष्वाकु वंश में उत्पन्न हुए राजा हरिश्चंद्र की पद्मिनी नाम वाली कन्या थीं, राजा के साथ वन में जाने को तैयार हो गई। दोनों अपने मंत्री को राज्यभार सौंपकर राजसी वेष त्यागकर गंधमादन पर्वत पर तपस्या करने चले गए।

राजा ने उस पर्वत पर 10 हजार वर्ष तक तप किया, परंतु फिर भी पुत्र प्राप्ति नहीं हुई।

तब पतिव्रता रानी कमलनयनी पद्मिनी से अनुसूया ने कहा: 12 मास से अधिक महत्वपूर्ण मलमास होता है, जो 32 मास पश्चात आता है। उसमें द्वादशीयुक्त पद्मिनी शुक्ल पक्ष की एकादशी का जागरण समेत व्रत करने से तुम्हारी सारी मनोकामना पूर्ण होगी। इस व्रत के करने से भगवान तुम पर प्रसन्न होकर तुम्हें शीघ्र ही पुत्र देंगे।

रानी पद्मिनी ने पुत्र प्राप्ति की इच्छा से एकादशी का व्रत किया। वह एकादशी को निराहार रहकर रात्रि जागरण कर‍ती। इस व्रत से प्रसन्न होकर भगवान विष्‍णु ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया। इसी के प्रभाव से पद्मिनी के घर कार्तवीर्य उत्पन्न हुए। जो बलवान थे और उनके समान तीनों लोकों में कोई बलवान नहीं था। तीनों लोकों में भगवान के सिवा उनको जीतने का सामर्थ्य किसी में नहीं था।

सो हे नारद! जिन मनुष्यों ने मलमास शुक्ल पक्ष एकादशी का व्रत किया है, जो संपूर्ण कथा को पढ़ते या सुनते हैं, वे भी यश के भागी होकर विष्‍णुलोक को प्राप्त होते हैं।

Suman  Mishra

Suman Mishra

Astrologer Mail ID - suman1711@gmail.com

मैं वर्तमान में न्यूजट्रैक और अपना भारत के लिए कंटेट राइटिंग कर रही हूं। इससे पहले मैने रांची, झारखंड में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग किया है और ईटीवी में 5 वर्षों का डेस्क पर काम करने का अनुभव है। मैं पत्रकारिता और ज्योतिष विज्ञान में खास रुचि रखती हूं। मेरे नाना जी पंडित ललन त्रिपाठी एक प्रकांड विद्वान थे उनके सानिध्य में मुझे कर्मकांड और ज्योतिष हस्त रेखा का ज्ञान मिला और मैने इस क्षेत्र में विशेषज्ञता के लिए पढाई कर डिग्री भी ली है

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