Kal Ka Panchang 28 May 2026 : प्रदोष व्रत पर बन रहें शुभ संकेतों के लिए देखे गुरुवार का पंचांग ?

Kal Ka Panchang 28 May 2026 : ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष प्रदोष व्रत गुरुवार का संयोग इसे पूजा-पाठ, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए अनुकूल है , जानते है आज के पंचांग में तिथि, नक्षत्र, योग और राहुकाल,देखे आज का पंचांग आज , कल का पंचांग का पञ्चाङ्ग 28मई 2026 का पंचांग क्या है? iगुरुवार का दिन कैसा रहेगा

Suman  Mishra
Published on: 27 May 2026 8:00 AM IST (Updated on: 28 May 2026 7:00 AM IST)
Kal Ka Panchang 28 May 2026 : प्रदोष व्रत पर बन रहें शुभ संकेतों के लिए देखे  गुरुवार का पंचांग ?
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कल का पंचांग 28 मई 2026 को क्या है?28 May 2026 Ka Panchang in Hindi:28 मई 2026, गुरुवार के दिन ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि 07:57 AM तक उपरांत त्रयोदशी। पंचांग के अनुसार यह दिन धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है और इस दिन के नक्षत्र, योग तथा शुभ-अशुभ समय का विशेष प्रभाव रहता है

आज गुरुवार ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष एकादशी, सिद्धार्थि संवत्सर विक्रम संवत 2083, शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), ज्येष्ठ ,द्वादशी तिथि 07:57 AM तक उपरांत त्रयोदशी, नक्षत्र चित्रा 08:08 AM तक उपरांत स्वाति , वरीयान योग 03:54 AM तक, उसके बाद परिघ योग ,करण बालव 07:57 AM तक, बाद कौलव 08:52 PM तक, बाद तैतिल , मई 28 गुरुवार को राहु 02:03 PM से 03:43 PM तक चन्द्रमा तुला राशि पर संचार करेगा। पंचांग के अनुसार इस दिन के नक्षत्र, योग और मुहूर्त को ध्यान में रखकर किए गए कार्य शुभ फल मिलता है।पंचांग के अनुसार इस दिन के ग्रह-नक्षत्र, योग और मुहूर्त के लिए देखते है आज का पंचांग....

आज का पंचांग

तिथि: शुक्ल पक्ष द्वादशी – सुबह 7:58 AM तक

वार: गुरुवार

नक्षत्र: चित्रा – सुबह 8:09 AM तक

योग: वरीयान – सुबह 3:55 AM तक

करण: बालव – सुबह 7:58 AM तक

मास (अमांत): ज्येष्ठ

मास (पूर्णिमांत): ज्येष्ठ

विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थ)

शक संवत: 1948 (प्रभाउ)

सूर्य राशि: वृष

चंद्र राशि: तुला

ऋतु: ग्रीष्म

अयन: उत्तरायण

दिशाशूल: दक्षिण

चंद्र निवास: पश्चिम

त्यौहार और व्रत

प्रदोष व्रत

शुभ-अशुभ समय

अभिजीत मुहूर्त - 11:57 AM – 12:50 PM

अमृत काल - 12:54 AM – 02:40 AM

ब्रह्म मुहूर्त - 04:09 AM – 04:57 AM

इन समयों में नए और महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।

राहू - 2:03 PM – 3:43 PM

यम गण्ड - 5:45 AM – 7:25 AM

कुलिक - 9:04 AM – 10:44 AM

दुर्मुहूर्त - 10:11 AM – 11:04 AM, 03:30 PM – 04:23 PM

वर्ज्यम् - 02:19 PM – 04:05 PM

सूर्य और चंद्र समय

सूर्योदय: 5:09 AM

सूर्यास्त: 6:43 PM

चंद्रोदय: 4:14 PM

चंद्रास्त: 2:47 AM

आनन्दादि योग

चर Upto - 08:08 AM

सुस्थिर

सूर्या राशि

वृषभ राशि में

चंद्र राशि

चन्द्रमा तुला राशि पर संचार करेगा

चंद्र बल (राशि ) 29/05/26 05:45 AM तक

मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु और मकर

ताराबल (नक्षत्र) 28/05/26 08:08 AM तक

भरणी, रोहिणी, आद्रा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्व फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, पूर्वभाद्रपदा और रेवती

गण्डमूल नक्षत्र

नहीं

पूजा-व्रत विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

भगवान विष्णु और बृहस्पति देव का ध्यान करें।

विष्णु सहस्रनाम का पाठ या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।

मंदिर जाकर दीपक जलाएं और पूजा करें।

पीले वस्त्र, चने की दाल या पीली वस्तुओं का दान करें।

दिनभर संयम और सकारात्मक विचार बनाए रखें।

दिन का चौघड़िया

शुभ (वार वेला) 05:45 AM 07:25 AM

रोग 07:25 AM 09:04 AM

उद्बेग 09:04 AM 10:44 AM

चर 10:44 AM 12:24 PM

लाभ 12:24 PM 14:03 PM

अमृत 14:03 PM 15:43 PM

काल (काल वेला) 15:43 PM 17:23 PM

शुभ (वार वेला) 17:23 PM 19:02 PM

रात का चौघड़िया

अमृत 19:02 PM 20:23 PM

चर 20:23 PM 21:43 PM

रोग 21:43 PM 23:03 PM

काल 23:03 PM 00:24 AM

लाभ (काल रात्रि) 00:24 AM 01:44 AM

उद्बेग 01:44 AM 03:04 AM

शुभ 03:04 AM 04:25 AM

अमृत 04:25 AM 05:45 AM

पंचांग क्या होता है?

पंचांग ज्योतिष के पांच अंगों का मेल है। जिसमें तिथि,वार, करण,योग और नक्षत्र का जिक्र होता है। हर दिन की तिथि का निर्धारण सूर्य और चंद्मा में भेद के आधार पर होता है और पंचांग के आधार पर हर दिन के शुभ-अशुभ समय का निर्धारण करते हैं। इसके आधार पर अपने काम को आसान बनाते हैँ। आज का पंचांग में तिथि, पक्ष, माह, नक्षत्र भी देखना जरुरी होता है। क्योंकि हर एक शुभ कार्य के लिए अलग अलग नक्षत्र होता है। सूर्योदय से दूसरे दिन सूर्योंदय के कुछ पहर पहले तक ही एक तिथि मानी जाती। चंद्रमा का स्थान जिस दिन चंद्रमा जिस स्थान पर होता है। उस दिन वही नक्षत्र और राशि मानी जाती है। चंद्रमा एक राशि में ढ़ाई दिन तक रहते हैं।

तिथि वारं च नक्षत्रं योगं करणमेव च।

पंचांगस्य फलं श्रुत्वा गंगा स्नानं फलं लभेत् ।।

आदिकाल में ही इस श्लोक के माध्यम से पंचांग को परिभाषित किया है।

तिथि- पंचांग का पहला अंग तिथि है। जो 16 है। इनमें पूर्णिमा और अमावस्या दो प्रमुख तिथियां है। जो दो पक्षों का निर्धारण करते हैं। कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष। पूर्णिमा और अमावस्या दोनों तिथि माह में एक बार आती है।

नक्षत्र- नक्षत्र 27 होते हैं। लेकिन एक मुहूर्त अभिजीत नक्षत्र है जो शादी विवाह के समय देखा जाता है। इसे मिला कर 28 नक्षत्र भी कहे जाते है।

योग- 27 होते है। मनुष्य के जीवन में योग का बहुत महत्व है।करण- 11 होते हैं। 4 स्थिर व 7 परिवर्तनशील है।

वार- सप्ताह में 7 दिन होते हैं। जो रविवार से शुरू, सोमवार, बुधवार, बृहस्पतिवार, शुक्रवार, और शनिवार पर खत्म होते हैं।


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Suman Mishra

मैं वर्तमान में न्यूजट्रैक और अपना भारत के लिए कंटेट राइटिंग कर रही हूं। इससे पहले मैने रांची, झारखंड में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग किया है और ईटीवी में 5 वर्षों का डेस्क पर काम करने का अनुभव है। मैं पत्रकारिता और ज्योतिष विज्ञान में खास रुचि रखती हूं। मेरे नाना जी पंडित ललन त्रिपाठी एक प्रकांड विद्वान थे उनके सानिध्य में मुझे कर्मकांड और ज्योतिष हस्त रेखा का ज्ञान मिला और मैने इस क्षेत्र में विशेषज्ञता के लिए पढाई कर डिग्री भी ली है

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