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Papankusha Ekadashi: पापांकुशा एकादशी आज: व्रत रखने वाले इन गलतियों से रहें दूर, जानें पूजा के नियम
Papankusha Ekadashi 2026: पापांकुशा एकादशी पर चावल खाने से लेकर तुलसी के पत्ते तोड़ने तक किन गलतियों से बचना चाहिए? जानें भगवान विष्णु की पूजा के नियम और व्रत पारण का समय।
पापांकुशा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए खास है। आज यानि 22 अक्टूबर 2026 को भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा-अर्चना करेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी पर व्रत रखने के साथ खानपान और व्यवहार से जुड़े कुछ नियमों का ध्यान रखना भी जरूरी होता है। इस दिन चावल और अनाज खाने से परहेज किया जाता है। वहीं, लहसुन-प्याज जैसे तामसिक भोजन से दूर रहने और मन को शांत रखे।
अगर आप भी आज पापांकुशा एकादशी का व्रत रख रहे हैं, तो पूजा से पहले कुछ जरूरी बातें जान लें। मान्यता है कि इस दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए और भगवान विष्णु को श्रद्धापूर्वक पूजा सामग्री अर्पित करनी चाहिए। आइए जानते हैं पापांकुशा एकादशी पर किन गलतियों से बचना चाहिए, पूजा कैसे करें और व्रत का पारण कब होगा।
पापांकुशा एकादशी पर भूलकर भी न करें ये गलतियां
चावल और अनाज खाने से करें परहेज
एकादशी के दिन चावल, गेहूं, दाल और दूसरे अनाज का सेवन न करने की धार्मिक परंपरा है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी मान्यता और व्रत के नियमों के अनुसार फलाहार या अन्य व्रत योग्य भोजन ग्रहण करते हैं। अगर आप निर्जला व्रत नहीं रख रहे हैं, तो अपनी सेहत के अनुसार भोजन और पानी का ध्यान रखें।
तुलसी के पत्ते न तोड़ें
भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। इसलिए पूजा में तुलसी दल चढ़ाने की तैयारी हो, तो पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें। पूजा करते समय पहले से रखे हुए तुलसी दल का इस्तेमाल किया जा सकता है।
तामसिक भोजन से रहें दूर
पापांकुशा एकादशी पर लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा से परहेज करने की परंपरा है। व्रत रखने वाले लोग सात्विक भोजन करते हैं और पूजा-पाठ में समय बिताते हैं। इस दिन खानपान में संयम रखने को धार्मिक नियमों का हिस्सा माना जाता है।
क्रोध और अपशब्दों से बचें
एकादशी का संबंध केवल खानपान के नियमों से नहीं, बल्कि मन और व्यवहार की शुद्धता से भी जोड़ा जाता है। इस दिन किसी का अपमान करने, झूठ बोलने, विवाद करने और कटु वचन कहने से बचें। दूसरों के प्रति दया और सम्मान का भाव रखना भी व्रत की भावना का हिस्सा है।
पूजा-पाठ में लापरवाही न करें
व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान विष्णु की पूजा करें। अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्र जाप, विष्णु सहस्रनाम का पाठ और व्रत कथा का श्रवण कर सकते हैं। दिन में आराम करना अपने आप में गलत नहीं है, खासकर जब स्वास्थ्य इसकी मांग करे। धार्मिक परंपरा में दिनभर भगवान का स्मरण और सात्विक आचरण बनाए रखने पर जोर दिया जाता है।
पापांकुशा एकादशी पर कैसे करें भगवान विष्णु की पूजा?
पापांकुशा एकादशी पर सुबह स्नान के बाद पूजा स्थल की सफाई करें।
भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप का ध्यान करके दीपक जलाएं।
इसके बाद भगवान को पीले फूल, पीला चंदन और अपनी श्रद्धा के अनुसार फल या अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें।
तुलसी दल उपलब्ध हो, तो पहले से तोड़े गए पत्तों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
पूजा के दौरान 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें। श्रद्धालु चाहें तो विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी कर सकते हैं।
इसके बाद पापांकुशा एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें। पूजा के अंत में भगवान विष्णु से सुख-शांति और सद्बुद्धि की प्रार्थना करें।
इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुएं दान करने की भी परंपरा है।
तिल का दान भी अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार किया जा सकता है।
पापांकुशा एकादशी 2026 पारण का समय
पापांकुशा एकादशी का व्रत अगले दिन द्वादशी तिथि में पारण करके पूरा किया जाता है।
व्रत का पारण 23 अक्टूबर 2026 को सुबह 5:51 बजे से 8:08 बजे के बीच बताया गया है।
पारण करने से पहले अपने शहर के पंचांग में समय की पुष्टि जरूर कर लें, क्योंकि स्थानीय सूर्योदय और पंचांग के अनुसार समय में अंतर हो सकता है। एकादशी पर व्रत रखने वालों को धार्मिक मान्यताओं में व्रत का उद्देश्य भगवान की भक्ति, आत्मसंयम और अच्छे आचरण को बढ़ावा देना है। इसलिए पूजा के साथ मन में दया, शांति और सद्भाव बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।


