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राधा अष्टमी पर जरूर जपें राधा रानी के 28 नाम, घर में लाएं ये 5 चीजें, बनी रहेगी सुख-शांति
Radha Ashtami: राधा अष्टमी पर राधा रानी के 28 नामों का जाप करें। जानें जाप की सही संख्या और इस दिन घर में कौन सी 5 शुभ चीजें लाना माना जाता है लाभकारी।
Radha Rani ke 28 Naam : राधा के बिना कृष्ण का नाम अधूरा है। राधा नाम से संसार पूरा होता है। राधा रानी की भक्ति करने वाले लोगों के लिए राधा अष्टमी का दिन बेहद खास होता है। इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और घरों में भी राधा-कृष्ण की पूजा की जाती है। भक्त राधा रानी को फूल, मिठाई और भोग अर्पित करने के साथ उनके नामों का स्मरण करते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि राधा रानी के नामों का जाप श्रद्धा के साथ करने से मन को शांति मिलती है और इससे मन भगवान की भक्ति में लगा रहता है। राधा अष्टमी पर आप भी राधा रानी के इन 28 नामों का जाप कर सकते हैं।
राधा रानी के 28 नाम कौन से हैं?
राधा रानी के अलग-अलग नाम उनके स्वरूप और गुणों से जुड़े माने जाते हैं। पूजा के दौरान इन नामों का स्मरण करना भक्ति का एक सरल तरीका माना जाता है। राधा अष्टमी पर इन 28 नामों का पाठ किया जा सकता है।
राधा
रासेश्वरी
रम्या
कृष्णमंत्राधिदेवता
सर्वाद्या
सर्ववन्द्या
वृन्दावन विहारिणी
वृन्दा राधा
रमा
अशेष गोपी मंडल पूजिता
सत्या
सत्यपरा
सत्यभामा
श्रीकृष्ण वल्लभा
वृषभानु सुता
गोपी
मूल प्रकृति
ईश्वरी
गान्धर्वा
राधिका
रम्या
रुक्मिणी
परमेश्वरी
परात्परतरा
पूर्णा
पूर्णचन्द्रविमानना
भुक्ति-मुक्तिप्रदा
भवव्याधि-विनाशिनी
कितनी बार करें इन नामों का जाप?
राधा रानी के नामों का जाप करते समय संख्या से ज्यादा श्रद्धा को महत्व दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन नामों का 21 बार जाप किया जा सकता है। अगर आपके पास समय हो तो 108 बार नाम स्मरण करने की परंपरा भी है।
जाप के लिए सुबह का समय रखा जा सकता है। सबसे पहले राधा-कृष्ण के सामने दीपक जलाएं और फूल अर्पित करें। इसके बाद शांत मन से 28 नामों का जाप करें। अंत में अपनी मनोकामना राधा रानी के सामने रखें।
राधा अष्टमी पर घर में क्या लाना शुभ माना जाता है?
राधा अष्टमी केवल पूजा-पाठ का दिन नहीं है। इस दिन राधा-कृष्ण से जुड़ी कुछ वस्तुएं घर लाने की परंपरा भी कई परिवारों में है। इन्हें घर में रखना धार्मिक आस्था से जुड़ा है।
मोर पंख घर लाना माना जाता है शुभ- मोर पंख का संबंध भगवान श्रीकृष्ण से माना जाता है। यही वजह है कि राधा-कृष्ण की पूजा में भी इसे रखे। राधा अष्टमी पर नया मोर पंख घर लाकर पूजा स्थान में रखा जा सकता है। इसे राधा-कृष्ण की तस्वीर या मूर्ति के पास रखना अच्छा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मोर पंख घर के वातावरण में सकारात्मकता बनाए रखने में सहायक है।
बांसुरी से घर में आएगी मधुरता- भगवान कृष्ण की बांसुरी उनकी लीलाओं से जुड़ी हुई है। इसे प्रेम, मधुरता और आनंद का प्रतीक माना जाता है। इसलिए राधा अष्टमी पर घर में बांसुरी लाने की परंपरा भी बताई जाती है। आप लकड़ी या धातु की छोटी बांसुरी पूजा स्थान के लिए ला सकते हैं। इसे राधा-कृष्ण के पास रखने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे परिवार में प्रेम और आपसी अपनापन बना रहता है।
तुलसी का पौधा जरूर लगाएं- हिंदू धर्म में तुलसी को बेहद पवित्र माना जाता है। अगर घर में तुलसी का पौधा नहीं है तो राधा अष्टमी के दिन इसे घर लाने का अच्छा अवसर है। तुलसी का पौधा लाने के बाद उसकी नियमित देखभाल करें। इसे साफ जगह पर रखें और जरूरत के अनुसार पानी दें। तुलसी के आसपास गंदगी न होने दें। धार्मिक दृष्टि से तुलसी की सेवा को भी महत्वपूर्ण है।
राधा रानी को अर्पित करें गुलाल- राधा और कृष्ण की भक्ति में ब्रज की होली का खास स्थान है। इसी वजह से राधा अष्टमी पर गुलाल या रंग राधा रानी को अर्पित करने की परंपरा कुछ जगहों पर निभाई जाती है। पूजा के दौरान अपनी श्रद्धा के अनुसार गुलाल अर्पित कर सकते हैं। इसे प्रेम, खुशी और उत्सव के भाव से जोड़ा जाता है।
चांदी की पायल या बिछिया खरीदें- राधा रानी को प्रेम और सौभाग्य का स्वरूप है। इसी मान्यता के चलते राधा अष्टमी पर सामर्थ्य के अनुसार चांदी की पायल या बिछिया खरीदना शुभ है। अगर आप ऐसी वस्तु खरीदते हैं तो पहले उसे राधा-कृष्ण की पूजा में रखकर भगवान का आशीर्वाद ले सकते हैं। इसके बाद पायल या बिछिया घर की महिला को उपहार में दे।
राधा अष्टमी की पूजा में रखें इन बातों का ध्यान
राधा अष्टमी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें।
पूजा स्थान की सफाई करने के बाद राधा-कृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं।
फूल, फल, मिठाई और अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग अर्पित करें।
इसके बाद राधा रानी के 28 नामों का जाप करें। पूजा पूरी होने पर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करें। धार्मिक मान्यताओं में इन वस्तुओं और उपायों को आस्था से जोड़ा गया है। इसलिए इन्हें अपनाते समय दिखावे से ज्यादा श्रद्धा और भक्ति के भाव को महत्व देना चाहिए।


