Dhanteras दिवाली से पहले बन रहा रवि-पुष्य योग, सोना-चांदी खरीदने से पहले पढ़ें

Ravi Pushya Yog 2026: दिवाली से पहले 1 नवंबर को रवि पुष्य योग का संयोग बन रहा है। जानें पुष्य नक्षत्र का समय, खरीदारी का शुभ मुहूर्त, सोना-चांदी खरीदने का महत्व और इस दिन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

Suman  Mishra (Astrologer)
Published on: 23 Oct 2026 8:11 AM IST
Ravi Pushya Yog
X

Ravi Pushya Yog 2026: दिवाली और धनतेरस आने वाला है और पहले खरीदारी करने की योजना बना रहे हैं, तो इस बार पुष्य नक्षत्र का संयोग आपके लिए खास है। ज्योतिष में पुष्य नक्षत्र को शुभ कार्यों और खरीदारी के लिए अच्छा माना जाता है। इस बार 1 नवंबर 2026, रविवार को पुष्य नक्षत्र पड़ रहा है। रविवार के दिन पड़ने के कारण इसे रवि पुष्य योग कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस योग में सोना-चांदी, वाहन, बर्तन और घर के लिए जरूरी सामान खरीदना शुभ है।

खास बात यह है कि इसी दिन अहोई अष्टमी का व्रत और राधा कुंड स्नान भी किया जाएगा। ऐसे में दिवाली की तैयारियों के बीच यह दिन धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहेगा। इसके बाद 6 नवंबर को धनतेरस और 8 नवंबर को दीपावली मनाई जाएगी।

पुष्य नक्षत्र का क्या है महत्व?

पुष्य नक्षत्र को बेहद शुभ नक्षत्रों में गिना जाता है। इसे समृद्धि, स्थिरता और शुभ कार्यों से जोड़कर देखते है। मान्यता है कि इस नक्षत्र में शुरू किए गए काम लंबे समय तक अच्छे परिणाम देते हैं। यही वजह है कि लोग इस दिन नई चीजें खरीदना, कारोबार की शुरुआत करना और निवेश से जुड़े फैसले लेना पसंद करते हैं।

मान्यताओं के अनुसार, पुष्य नक्षत्र के देवता देवगुरु बृहस्पति और इसके स्वामी शनिदेव हैं। बृहस्पति को ज्ञान, धन और सौभाग्य का कारक माना जाता है, जबकि शनिदेव कर्म, अनुशासन और स्थिरता से जुड़े हैं। इसी कारण इस नक्षत्र को खरीदारी और कुछ नए कामों के लिए विशेष महत्व दिया जाता है।

कब से कब तक रहेगा पुष्य नक्षत्र?

पंचांग के अनुसार, 1 नवंबर 2026 को सुबह 5 बजकर 39 मिनट से पुष्य नक्षत्र शुरू होगा।

इसका समापन 2 नवंबर को सुबह 4 बजकर 30 मिनट पर होगा। इस दौरान रवि पुष्य योग रहेगा।

इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। शुभ कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 42 मिनट से 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा।
वहीं, गोधूलि मुहूर्त शाम 5 बजकर 36 मिनट से 6 बजकर 2 मिनट तक बताया गया है।
धार्मिक कार्य या खरीदारी करने से पहले अपने स्थानीय पंचांग में समय की पुष्टि कर लेना उचित रहेगा, क्योंकि अलग-अलग स्थानों के अनुसार मुहूर्त में अंतर हो सकता है।

रवि पुष्य योग में क्या खरीदना शुभ है?

सोना और चांदी: पुष्य नक्षत्र में सोना खरीदना शुभ माना जाता है। दिवाली के मौके पर आभूषण या सोने के सिक्के खरीदने की योजना बना रहे लोग इस दिन को चुन सकते हैं। चांदी के सिक्के, बर्तन और अन्य उपयोगी वस्तुओं की खरीदारी भी परंपरागत रूप से शुभ मानी जाती है।

नए बर्तन: त्योहारों पर घर में नए बर्तन लाने की परंपरा काफी पुरानी है। रवि पुष्य योग में स्टील, तांबे और चांदी के बर्तन खरीदने को भी अच्छा माना जाता है।

वाहन और मशीनरी: ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दिन वाहन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और मशीनरी की खरीदारी भी की जा सकती है। हालांकि, खरीदारी से पहले अपनी जरूरत और बजट को ध्यान में रखना जरूरी है।

नए कपड़े और घरेलू सामान: दिवाली के लिए कपड़े, फर्नीचर और घर की जरूरत का अन्य सामान खरीदने के लिए भी इस दिन को चुना जा सकता है।

कारोबार और निवेश: कुछ लोग इस दिन नई दुकान शुरू करते हैं, बही-खाते खरीदते हैं या कारोबार से जुड़ी योजनाओं की शुरुआत करते हैं। जमीन या संपत्ति खरीदने की योजना हो, तो शुभ मुहूर्त के साथ कानूनी दस्तावेजों और आर्थिक स्थिति की जांच करना भी जरूरी है।

दिवाली से पहले क्यों खास है यह संयोग?

दिवाली से पहले आने वाला रवि पुष्य योग खरीदारी और त्योहार की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तुएं घर में सुख-समृद्धि और स्थिरता का प्रतीक होती हैं। हालांकि, ये धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं हैं। किसी भी वस्तु की खरीदारी या निवेश का फैसला अपनी जरूरत और आर्थिक स्थिति के अनुसार ही करना चाहिए।

इस तरह 1 नवंबर का रवि पुष्य योग दिवाली से पहले खरीदारी की योजना बनाने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस दिन सोना-चांदी, बर्तन, वाहन या घर का जरूरी सामान खरीदने से पहले शुभ समय और अपने बजट का ध्यान रखें।

रवि पुष्य योग में किन चीजों की खरीदारी से बचें?

रवि पुष्य योग में खरीदारी को शुभ है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर वस्तु खरीदना जरूरी है।
इस दिन बिना जरूरत कर्ज लेकर महंगी चीजें खरीदने से बचना चाहिए।
सोना, चांदी या वाहन खरीदने से पहले अपने बजट और जरूरत को ध्यान में रखें।
कुछ लोग लोहे से जुड़ी वस्तुओं की खरीदारी को लेकर अलग-अलग विचार रखते हैं, इसलिए इस संबंध में अपने पारिवारिक रीति-रिवाजों और मान्यताओं का ध्यान रख सकते हैं।

क्या रवि पुष्य योग में नई शुरुआत करना शुभ है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रवि पुष्य योग में नए काम की शुरुआत करना शुभ है। इस दिन दुकान या कारोबार शुरू करने, नए बही-खाते बनाने, पढ़ाई से जुड़ी नई योजना अपनाने और घर के लिए जरूरी सामान खरीदने जैसे काम किए जा सकते हैं। हालांकि, किसी भी बड़े काम की सफलता मेहनत, सही योजना और परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

रवि पुष्य योग में कैसे करें पूजा?

इस दिन सुबह स्नान करने के बाद अपने इष्ट देव की पूजा कर सकते हैं। भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति का स्मरण करके सुख-समृद्धि की कामना करना शुभ माना जाता है। पूजा में दीपक जलाएं, फूल अर्पित करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्र जाप करें। जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, वस्त्र या अपनी क्षमता के अनुसार दान भी दिया जा सकता है। पूजा-पाठ में किसी विशेष विधि का पालन करना हो, तो परिवार की परंपरा के अनुसार करें।

रवि पुष्य योग और धनतेरस में क्या है अंतर?

रवि पुष्य योग और धनतेरस दोनों को खरीदारी के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इनका धार्मिक महत्व अलग है। रवि पुष्य योग नक्षत्र और रविवार के संयोग से बनता है, जबकि धनतेरस कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा की परंपरा है। वहीं, रवि पुष्य योग में शुभ कार्यों और खरीदारी को विशेष महत्व दिया जाता है। दोनों अवसरों पर लोग अपनी परंपरा और सुविधा के अनुसार खरीदारी करते हैं।

Suman  Mishra (Astrologer)
ABOUT THE AUTHOR

Suman Mishra (Astrologer)

Astrologer Mail ID - suman1711@gmail.comsuman1711@gmail.com

मैं वर्तमान में न्यूजट्रैक और अपना भारत के लिए कंटेट राइटिंग कर रही हूं। इससे पहले मैने रांची, झारखंड में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग किया है और ईटीवी में 5 वर्षों का डेस्क पर काम करने का अनुभव है। मैं पत्रकारिता और ज्योतिष विज्ञान में खास रुचि रखती हूं। मेरे नाना जी पंडित ललन त्रिपाठी एक प्रकांड विद्वान थे उनके सानिध्य में मुझे कर्मकांड और ज्योतिष हस्त रेखा का ज्ञान मिला और मैने इस क्षेत्र में विशेषज्ञता के लिए पढाई कर डिग्री भी ली है

Next Story