6 अक्टूबर को खुलेंगे धन के द्वार! शरद पूर्णिमा के दिन करें ये ख़ास उपाय, बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा

Sharad Purnima 2025: इस वर्ष 6 अक्टूबर 2025 को सर्वार्थ सिद्धि योग में शरद पूर्णिमा मनाई जानी है। इस दिन देवी लक्ष्मी की पूरे विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है। जिससे माँ लक्ष्मी अपनी कृपा भक्तों पर बरसाती हैं।

Priya Singh Bisen
Published on: 6 Oct 2025 4:19 PM IST
Sharad Purnima 2025
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Sharad Purnima 2025 (photo: social media)

Sharad Purnima 2025: हिन्दू धर्म में शरद पूर्णिमा की बहुत मान्यता है। ऐसा कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा के बाद ठंड के मौसम का आगमन शुरू हो जाता है। इसीलिए इस खास दिन को त्योहार के रूप में मनाया जाता है। शरद पूर्णिमा के दिन देवी लक्ष्मी जी की खासतौर से पूजा अर्चना की जाती है। इसके अलावा भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में धन की बरसात होती है।

जानकारी के अनुसार, इस साल शरद पूर्णिमा 6 अक्टूबर 2025 को मनाया जाना है। इस दिन सोमवार पड़ेगा। हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को ही शरद पूर्णिमा कहा जाता है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इस दिन आकाश से अमृत की बूंदों की बरसात होती है। इस साल चंद्रमा शरद पूर्णिमा शाम 7:26 मिनट बजे उदय होगा। जो लोग इस दिन व्रत रखना चाहते हैं वे 6 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा का उपवास रख सकते हैं और फिर शाम को चंद्रमा की पूजा भी अवश्य करें।

कोजागरी पूर्णिमा है दूसरा नाम

आपको बता दे, देशभर के कई इलाकों में शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। कोजागरी पूर्णिमा का त्योहार पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम में बड़ी आस्था के साथ मनाया जाता है। कोजागरी पूर्णिमा पर लक्ष्मी जी की खासतौर से पूजा-अर्चना की जाती है और भगवान विष्णु की भी आराधना की जाती है। पश्चिम बंगाल व ओडिशा में ऐसी मान्यता है कि विधिपूर्वक पूजा करने से व्यक्ति को आर्थिक रू से तमाम समस्याओं से छुटकारा मिलता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

शरद पूर्णिमा के दिन ही भगवान कृष्ण ने रचाई थी महारास लीला

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कृष्ण ने शरद पूर्णिमा के दिन ही महारास लीला रचाई थी। इस दिन चंद्र देवता की खासतौर से पूरे विधि विधान के पूजा की जाती है और खीर का भोग लगाया जाता है। शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा पृथ्वी के सबसे करीब होता है। अंतरिक्ष के समस्त ग्रहों से निकलने वाली सकारात्मक ऊर्जा चंद्र किरणों द्वारा पृथ्वी पर पड़ती हैं। पूर्णिमा की चांदनी में खीर पकाकर खुले आसमान के नीचे रखने के पीछे एक वैज्ञानिक तर्क यह भी है कि चंद्रमा के औषधीय गुणों से युक्त किरणें पड़ने से खीर भी अमृत हो जाता है। जिसके बाद इसका सेवन करना सभी की सेहत के लिए बेहद लाभप्रद साबित होता है।

शुभ संयोग

इस वर्ष शरद पूर्णिमा के दिन एक बहुत ही अद्भुत संयोग बनने जा रहा है। इस दिन उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग भी बनेगा, जो इस दिन को और भी वशेष और फलदायी बनाता है।

शरद पूर्णिमा का क्या महत्व होता है ?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां लक्ष्मी की उत्पत्ति समुद्र मंथन शरद पूर्णिमा के दिन ही हुई थी। इसलिए इस तिथि को धन-दायक भी के रूप में भी जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी धरती पर विचरण करती हैं और जो लोग पूरी रात जागकर मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं, वे उस पर अपनी कृपा अवश्य बरसाती हैं और धन-वैभव भी प्रदान करती हैं। शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा या रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।

आपको बता दे, इस दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ होता है और पृथ्वी पर चारों ओर चंद्रमा की रोशनी फैली होती है। ऐसी मान्यता है कि धरती जैसे ही दूधिया रोशनी में नहाती है, वैसे ही इन दिन चंद्रमा की रोशनी से अमृत की वर्षा होती है, इसलिए रात में चांद की रोशनी में खीर रखने की परंपरा भी है।

क्या है शरद पूर्णिमा पूजा विधि ?

हिन्दू धर्म के मान्यताओं के अनुसार, इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें। अगर आसपास कोई नदी नहीं है तो घर पर ही पानी में गंगाजल डालकर स्नान आदि करके साफ़ वस्त्र धारण करें। उसके बाद एक लकड़ी की चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं और गंगाजल से शुद्ध अवश्य करें। चौकी के ऊपर मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें और लाल चुनरी ओढ़ाएं। इसके बाद लाल फूल, इत्र, नैवेद्य, धूप-दीप, सुपारी आदि से मां लक्ष्मी की पूरे विधि-विधान के साथ पूजन करें।

इसके बाद मां लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें। पूजन संपन्न होने के बाद आरती करें। शाम के वक़्त पुनः मां और भगवान विष्णु का भी पूजन करें और चंद्रमा को अर्घ्य दें। पूजा के बाद चावल और गाय के दूध की खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में चढ़ाएं। बता दे, मध्य रात्रि में मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाएं और प्रसाद के रुप में सभी परिवार के सदस्यों को खिलाएं।

Disclaimer: यहां जानकारी केवल मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। यहां यह बताना जरूरी है कि Newstrack.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

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