Navratri ke Nau Din नवरात्र के 9 दिन, किस देवी की पूजा से पूरी होगी कौन सी मनोकामना?

Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्र के नौ दिनों में किस देवी की पूजा करें और कौन सा फूल व भोग चढ़ाएं? जानें मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा का महत्व और मनोकामनाओं से जुड़ी मान्यताएं।

Suman  Mishra (Astrologer)
Published on: 12 Oct 2026 8:13 AM IST
Navratri ke Nau Din नवरात्र के 9 दिन, किस देवी की पूजा से पूरी होगी कौन सी मनोकामना?
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शारदीय नवरात्र मां दुर्गा की आराधना के लिए विशेष हैं। इन नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्र में श्रद्धा और विधि-विधान से मां की उपासना करने से सुख, शांति, समृद्धि और आत्मबल की प्राप्ति होती है। नवरात्रि का हर दिन एक अलग देवी स्वरूप को समर्पित होता है। मान्यता है कि हर स्वरूप की पूजा का अपना विशेष महत्व है। कोई स्वरूप साहस और शक्ति का प्रतीक है, तो कोई ज्ञान, संतान सुख और आध्यात्मिक उन्नति से जुड़ा है।

इस साल शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर 2026 तक हैं। इन नौ दिनों में अपनी मनोकामनाओं के अनुसार मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा कर सकते हैं। पूजा में फूल, भोग और अन्य सामग्री अर्पित करने की परंपरा भी है। जानते हैं मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का महत्व, किस दिन किस देवी की पूजा की जाती है और उन्हें कौन से फूल तथा भोग अर्पित किए जा सकते हैं।

मां शैलपुत्री की पूजा से आरोग्य और शक्ति की कामना

नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इन्हें नवदुर्गा का प्रथम स्वरूप है।
मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं और शक्ति, स्थिरता तथा प्रकृति का प्रतीक हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इनकी पूजा से मन में दृढ़ता आती है और जीवन में सकारात्मकता बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है।
इस दिन मां को लाल फूल अर्पित कर सकते हैं। पूजा में गाय के दूध से बने शुद्ध घी का भोग लगाने की भी परंपरा है।
जो लोग स्वास्थ्य, मानसिक शांति और जीवन में स्थिरता की कामना करते हैं, वे श्रद्धापूर्वक मां शैलपुत्री की आराधना कर सकते हैं।

दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से ज्ञान और संयम का आशीर्वाद

नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की उपासना की जाती है।
उनका स्वरूप तप, त्याग, धैर्य और संयम का संदेश देता है।
धार्मिक मान्यताओं में मां ब्रह्मचारिणी को ज्ञान और साधना की देवी के रूप में पूजा जाता है।
विद्यार्थियों और अपने लक्ष्य को पाने के लिए मेहनत कर रहे लोगों के लिए इस दिन की पूजा विशेष महत्व रखती है।
मां ब्रह्मचारिणी को सफेद फूल अर्पित किए जा सकते हैं।
पूजा के दौरान शक्कर या मिश्री का भोग लगाने की परंपरा भी है।
भक्त मां से बुद्धि, धैर्य और कठिन परिस्थितियों में अपने संकल्प पर टिके रहने की शक्ति की प्रार्थना कर सकते हैं। इस साल दूसरे दिन की पूजा 12 अक्टूबर को हुई।

तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा की पूजा से साहस और आत्मविश्वास की कामना

नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है।
उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित रहता है।
मां का यह स्वरूप साहस, पराक्रम और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की शक्ति का प्रतीक है।
धार्मिक मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की आराधना से भय दूर करने और आत्मविश्वास मजबूत करने की प्रेरणा मिलती है।
इस दिन मां को लाल फूल अर्पित किए जा सकते हैं।
दूध या दूध से बनी मिठाई का भोग लगाने की परंपरा भी प्रचलित है। जो लोग जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए मानसिक मजबूती चाहते हैं, वे मां चंद्रघंटा की पूजा कर सकते हैं। इस साल तीसरे दिन की पूजा 13 अक्टूबर को हुई।

चौथा दिन: मां कूष्मांडा की पूजा से बुद्धि और समृद्धि की कामना

नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है।
धार्मिक मान्यताओं में उन्हें सृष्टि की रचनात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है।
मां का यह स्वरूप तेज, ऊर्जा, बुद्धि और सकारात्मकता का प्रतीक है।
मां कूष्मांडा से जीवन में उत्साह, विवेक और उन्नति की प्रार्थना करते हैं।
इस दिन मां को हरे रंग से जुड़े फूल या अन्य उपलब्ध पुष्प अर्पित किए जा सकते हैं।
मालपुए का भोग लगाने की परंपरा भी बताई जाती है।
पूजा के साथ अपने काम में एकाग्रता और सकारात्मक सोच बनाए रखने का संकल्प लेना भी उपयोगी है। इस साल मां कूष्मांडा की पूजा 14 अक्टूबर को हुई।

पांचवां दिन: मां स्कंदमाता की पूजा से संतान सुख की कामना

नवरात्र के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की आराधना की जाती है।
मां अपने पुत्र भगवान स्कंद यानी कार्तिकेय को गोद में धारण करती हैं।
उनका स्वरूप मातृत्व, प्रेम, करुणा और संतान के प्रति स्नेह का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां स्कंदमाता की पूजा से परिवार में सुख-शांति और संतान की मंगलकामना की जाती है।
इस दिन मां को पीले फूल अर्पित कर सकते हैं। केले का भोग लगाने की परंपरा भी है।
अपने बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य, सुखद भविष्य और परिवार की खुशहाली के लिए मां से प्रार्थना कर सकते हैं। इस साल पांचवें दिन की पूजा 15 अक्टूबर को हुई।

छठा दिन: मां कात्यायनी की पूजा से विवाह और सुखी जीवन की कामना

नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा होती है। उन्हें शक्ति और साहस का स्वरूप है।
धार्मिक मान्यताओं में मां कात्यायनी की उपासना विवाह संबंधी मनोकामनाओं से भी जुड़ी है।
विशेष रूप से विवाह योग्य युवक-युवतियां अच्छे जीवनसाथी और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से मां की पूजा करते हैं।
मां कात्यायनी को पीले फूल अर्पित किए जा सकते हैं।
शहद का भोग लगाने की परंपरा भी प्रचलित है। इस दिन भक्त अपने जीवन में सही निर्णय लेने, रिश्तों में मधुरता बनाए रखने और पारिवारिक सुख की प्रार्थना कर सकते हैं। इस साल मां कात्यायनी की पूजा 16 अक्टूबर को होगी।

सातवां दिन: मां कालरात्रि की पूजा से भय और बाधाओं से मुक्ति की कामना

नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है।
उनका स्वरूप देखने में उग्र है, लेकिन उन्हें अपने भक्तों का कल्याण करने वाली देवी माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि की आराधना भय, नकारात्मकता और जीवन की कठिनाइयों का सामना करने का साहस देती है।
इस दिन मां को गुड़ का भोग अर्पित किया जा सकता है। पूजा में धूप और सुगंधित सामग्री का उपयोग भी किया जाता है।
अपने जीवन से भय और बाधाएं दूर करने तथा मानसिक शक्ति प्राप्त करने की प्रार्थना कर सकते हैं। इस साल सातवें दिन की पूजा 17 अक्टूबर को होगी।

आठवां दिन: मां महागौरी की पूजा से सुखी वैवाहिक जीवन की कामना

नवरात्र के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। उनका स्वरूप शांति, पवित्रता और सौम्यता का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी की आराधना से सुख-शांति और वैवाहिक जीवन में मधुरता की कामना की जाती है।
इस दिन कई घरों और मंदिरों में कन्या पूजन भी किया जाता है।
मां महागौरी को सफेद फूल और नारियल अर्पित करने की परंपरा है।
वैवाहिक जीवन में प्रेम, आपसी समझ और परिवार में शांति बनाए रखने की प्रार्थना कर सकते हैं। इस साल महाष्टमी 18 अक्टूबर को मनाई जाएगी।

नौवां दिन: मां सिद्धिदात्री की पूजा से आध्यात्मिक उन्नति की कामना

नवरात्र के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है।
नवदुर्गा का यह स्वरूप सिद्धि, ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति से जुड़ा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां सिद्धिदात्री की पूजा से साधना में एकाग्रता और जीवन में विवेक प्राप्त करने की प्रेरणा मिलती है।
इस दिन मां को विभिन्न रंगों के फूल अर्पित किए जा सकते हैं। काले तिल का भोग लगाने की परंपरा भी है।
अपने जीवन में शांति, सद्बुद्धि और आध्यात्मिक प्रगति की कामना से मां की पूजा कर सकते हैं। इस साल महानवमी 19 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस दिन भी कई स्थानों पर कन्या पूजन किया जाता है।

नवरात्र में पूजा करते समय किन बातों का रखें ध्यान?

नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा की पूजा श्रद्धा और स्वच्छता के साथ करने की परंपरा है। पूजा में फूल और भोग अपनी उपलब्धता तथा पारिवारिक परंपरा के अनुसार अर्पित किए जा सकते हैं। किसी विशेष सामग्री के अभाव में मन में श्रद्धा रखकर मां का स्मरण करना भी महत्वपूर्ण है।
ध्यान रखें कि फूल, भोग और पूजा सामग्री से संबंधित परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में भिन्न हो सकती हैं। मनोकामना पूरी होने के संबंध में धार्मिक मान्यताएं आस्था पर आधारित हैं। पूजा के साथ अच्छे कर्म, संयम, सेवा और अपने कर्तव्यों का पालन करना भी जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

नोट : ये जानकारियां धार्मिक आस्था और मान्यताओं पर आधारित हैं। Newstrack.com इसकी पुष्टि नहीं करता है।इसे सामान्य रुचि को ध्यान में रखकर लिखा गया है

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Suman Mishra (Astrologer)

Astrologer Mail ID - suman1711@gmail.comsuman1711@gmail.com

मैं वर्तमान में न्यूजट्रैक और अपना भारत के लिए कंटेट राइटिंग कर रही हूं। इससे पहले मैने रांची, झारखंड में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग किया है और ईटीवी में 5 वर्षों का डेस्क पर काम करने का अनुभव है। मैं पत्रकारिता और ज्योतिष विज्ञान में खास रुचि रखती हूं। मेरे नाना जी पंडित ललन त्रिपाठी एक प्रकांड विद्वान थे उनके सानिध्य में मुझे कर्मकांड और ज्योतिष हस्त रेखा का ज्ञान मिला और मैने इस क्षेत्र में विशेषज्ञता के लिए पढाई कर डिग्री भी ली है

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