तुलसी पूजा से होगा कमाल! कार्तिक माह में इन नियमों के पालन से खुलेगा भाग्य, Tulsi Puja Niyam

Tulsi Puja Niyam कार्तिक माह में तुलसी पूजन से मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है। जानिए तुलसी पूजा का सही तरीका, नियम, लाभ और तुलसी विवाह का महत्व।

Suman  Mishra (Astrologer)
Published on: 6 Oct 2025 9:13 AM IST (Updated on: 7 Oct 2025 1:35 PM IST)
Tulsi Puja Niyam
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कार्तिक में तुलसी पूजन :हिंदू धर्म में कार्तिक माह को सबसे पवित्र महीनों में गिना गया है। यह महीना धार्मिक दृष्टि से बेहद खास होता है, क्योंकि इसी दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं और सभी शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। इस महीने में तुलसी माता की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। तुलसी को मां लक्ष्मी का स्वरूप कहा गया है और भगवान विष्णु की प्रिय मानी जाती हैं। इसीलिए कार्तिक माह में तुलसी पूजन का विशेष महत्व बताया गया है।

क्यों खास है कार्तिक में तुलसी पूजन

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास की अमावस्या को तुलसी माता का जन्म हुआ था। इस वजह से पूरे महीने तुलसी की पूजा करना पुण्यदायी माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि जो व्यक्ति कार्तिक माह में तुलसी पूजन करता है, उसे धन, सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। तुलसी विवाह भी इसी माह में किया जाता है, जो धार्मिक रूप से बेहद शुभ माना गया है। ऐसा करने से जीवन में वैवाहिक सुख और पारिवारिक सौहार्द बढ़ता है।

तुलसी पूजन का शुभ समय और विधि

कार्तिक मास में तुलसी पूजन ब्रह्म मुहूर्त में करना सबसे शुभ माना गया है। सुबह स्नान करके साफ वस्त्र पहनें और तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाकर जल अर्पित करें। जल में थोड़े काले तिल मिलाना बहुत फलदायी माना गया है। पहले सूर्य देव को जल अर्पित करें, उसके बाद तुलसी माता को जल दें। ऐसा करने से परिवार में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

तुलसी पूजन के नियम जिन्हें जरूर अपनाएं

तुलसी के पौधे में रोज सुबह जल चढ़ाना शुभ होता है।

रविवार के दिन तुलसी को जल अर्पित नहीं करना चाहिए।

तुलसी के पत्ते केवल सुबह के समय ही तोड़ें, शाम या रात में तोड़ना अपशकुन माना जाता है।

तुलसी की पूजा के समय भगवान विष्णु को तुलसी दल चढ़ाना बहुत शुभ होता है।

हर मंगलवार को तुलसी में जल चढ़ाने से धन लाभ और कार्य में सफलता मिलती है।

तुलसी के पौधे के नीचे रोजाना सूर्यास्त के बाद दीपक जलाना चाहिए। इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

तुलसी पूजन से घर में शांति और समृद्धि बनी रहती है।

आर्थिक तंगी दूर होती है और कार्यों में सफलता मिलती है।

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

पारिवारिक संबंधों में मधुरता आती है।

नकारात्मक ऊर्जा और रोगों से रक्षा होती है। कार्तिक माह आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर होता है। इस समय तुलसी पूजन न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि मानसिक और पारिवारिक शांति के लिए भी लाभकारी है। रोज सुबह तुलसी में जल अर्पित करना, सूर्यास्त के बाद दीपक जलाना और तुलसी की परिक्रमा करना घर में खुशियों का संचार करता है। तुलसी माता और भगवान विष्णु की पूजा करने वाला व्यक्ति सदैव सुख, समृद्धि और शांति का अनुभव करता है।


तुलसी विवाह का महत्व

कार्तिक माह में तुलसी विवाह का विशेष महत्व है। यह विवाह कार्तिक शुक्ल एकादशी या देवउठनी एकादशी के दिन मनाया जाता है। इस दिन तुलसी को दुल्हन की तरह सजाया जाता है। पंडितों के अनुसार, तुलसी जी को हरी चुनरी, हरी चूड़ियां और सुहाग सामग्री अर्पित करनी चाहिए। तुलसी बुध ग्रह का प्रतिनिधित्व करती हैं, इसलिए उन्हें हरे वस्त्र और आभूषण प्रिय हैं।

तुलसी पूजन के समय तुलसी पर हल्दी, सिंदूर और कुमकुम अर्पित करना चाहिए। हल्दी पीले रंग की होती है, जो भगवान विष्णु को बेहद प्रिय मानी गई है। तुलसी के पौधे की कम से कम तीन बार परिक्रमा करना चाहिए। ऐसा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।

कार्तिक में दीपदान और तुलसी पूजन का संयोग

कार्तिक मास में दीपदान का भी विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इस दौरान देवी लक्ष्मी धरती पर भ्रमण करती हैं। जो व्यक्ति तुलसी के नीचे रोज दीपक जलाता है, उसके घर में दरिद्रता कभी नहीं आती। शाम के समय तुलसी के नीचे मिट्टी या घी का दीपक जलाना सबसे शुभ माना जाता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और वातावरण पवित्र रहता है।



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Suman Mishra (Astrologer)

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मैं वर्तमान में न्यूजट्रैक और अपना भारत के लिए कंटेट राइटिंग कर रही हूं। इससे पहले मैने रांची, झारखंड में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग किया है और ईटीवी में 5 वर्षों का डेस्क पर काम करने का अनुभव है। मैं पत्रकारिता और ज्योतिष विज्ञान में खास रुचि रखती हूं। मेरे नाना जी पंडित ललन त्रिपाठी एक प्रकांड विद्वान थे उनके सानिध्य में मुझे कर्मकांड और ज्योतिष हस्त रेखा का ज्ञान मिला और मैने इस क्षेत्र में विशेषज्ञता के लिए पढाई कर डिग्री भी ली है

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