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Vat Savitri Puja Samagri : वट सावित्री व्रत पूजा सामग्री, पूजा से पहले जान लें क्या-क्या चाहिए
Vat Savitri Puja Samagri : हर साल वट सावित्री का व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को रखा जाता है। सुहागिन औरतें अपने पति की लंबी आयु के लिए पूजा-अर्चना करती हैं। जानते है पूजा विधि और सामग्री क्या क्या है ...
Vat Savitri Puja Samagri : वट सावित्री का व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को रखा जाता है। इस दिन सुहागिन औरतें अपने पति की लंबी आयु और अच्छी सेहत के लिए व्रत रखकर वट वृक्ष (बरगद) की पूजा-अर्चना करती हैं। बता दें कि इस वर्ष वट सावित्री व्रत के दिन काफी ग्रहों का शुभ संयोग बन रहा है।इस साल शनिवार16 मई को अमावस्या पड़ रही है, मान्यताओं अनुसार इस व्रत को रखने से पति को लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की प्राप्ति होती है।
बता दें कि ये व्रत देवी सावित्री और उनके पति सत्यवान की उस पावन कथा से जुड़ा है, जब देवी सावित्री ने बड़ी ही चतुराई से अपने पति के प्राण यमराज से वापस पाए थे। कहा जाता है कि सावित्री को अपने पति के प्राण वट यानी बरगद के पेड़ के नीचे मिले थे, इसलिए ही इस व्रत में बरगद के पेड़ की पूजा होती है। चलिए अब जानते हैं वट सावित्री व्रत की पूजा में क्या-क्या चीजें लगती हैं।
वट सावित्री व्रत पूजा सामग्री
महिलाएं वट सावित्री व्रत के दिन सोलह श्रृंगार करके अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखकर बरगद की पेड़ की पूजा करती हैं। अधिकतर महिलाएं पूजा के उपरांत व्रत खोल देती है।वट सावित्री व्रत में पूजन-सामग्री वगैरह पहले से ही रख लें, जिससे पूजा करते वक्त किसी भी चीज की कमी महसूस ना हो ।जानिए कौन-कौन सी सामग्री...
सत्यवान-सावित्री की मूर्ति, वट वृक्ष की शाखा और यदि संभव हो तो वट वृक्ष पर जाकर पूजा करें
बांस का बना हुआ एक हाथ पंखा,धूप, मिट्टी का दीपक, घी,सूत का लाल धागा, सुहाग सामग्री
दो सिंदूरी जल से भरा हुआ पात्र,रोली, हल्दी और कुमकुम, फूल, फल, सवा मीटर का एक कपड़ा
पानी वाला लोटा या कलश, नई चुनरी (लाल या पीली), चावल, फूल और फूलों की माला
पंचामृत, सात प्रकार के अनाज या फल, सूखे मेवे, मिठाई रखें। पूजा में इन सामग्रियों की जरुरत होती है।
वट सावित्री व्रत पूजा विधि
इस दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
महिलाओं को इस त्योहार वाले दिन अच्छे से सजना-संवरना चाहिए, कहते हैं इससे पति को लंबी आयु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
पूजा के लिए वट वृक्ष पर सभी पूजन सामग्री लेकर जाएं।
बरगद के पेड़ की जड़ में जल, दूध, हल्दी, कुमकुम और ताजे फूल चढ़ाएं।
पेड़ के तने के चारों ओर सात बार परिक्रमा करते हुए लाल धागा बांधें।
फिर पेड़ के नीचे ही सावित्री और सत्यवान की कथा पढ़ी जाती है।
कथा के बाद महिलाएं सावित्री माता से अपने पति की सलामती की प्रार्थना करती हैं।
इसके बाद फल, मिठाई, नारियल और भीगे हुए चने का भोग लगाती हैं।
पूजा के बाद प्रसाद में चढ़ाई गई चीजों का सेवन करके व्रत पारण किया जाता है।
व्रत के दौरान और पूजा के बाद चने को सीधे निगला जाता है और बाद में चने की सब्जी बनाकर खाई जाती है। इसी तरह आम और आम का मुरब्बा, खरबूजा की पूजा करते हैं और प्रसाद खाते हैं। आम को चढ़ाकर उसका मुरब्बा बनाकर खाया जाता है। खरबूजे को भी व्रत के दौरान खाते हैं। ऐसी मान्यता है कि वट सावित्री के व्रत के दौरान सत्यवान-सावित्री की कथा महात्मय को सुनकर जो विधि-विधान से पूजा करता है। फिर उपरोक्त चीजों का सेवन करता है।उनका सुहाग अमर हो जाता है।


