Vat Savitri Puja 2026: वट सावित्री व्रत 2026 कब है? जाने पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और व्रत के नियम

Vat Savitri Puja 2026 Date and Time: वट सावित्री व्रत 2026 कब है? जानें 16 मई का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत नियम, कथा और बरगद पूजा का महत्व।

Suman  Mishra
Published on: 7 May 2026 9:11 AM IST
Vat Savitri Puja 2026: वट सावित्री व्रत 2026 कब है? जाने पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और व्रत के नियम
X

Vat Savitri Puja 2026 Date and Time: साल 2026 में बरगदही पूजा यानी वट सावित्री व्रत मुख्य रूप से 16 मई 2026 (शनिवार) को ज्येष्ठ अमावस्या के दिन मनाया जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं।बरगद के पेड़ की जड़ में जल अर्पित करें, सूत (धागा) लपेटकर परिक्रमा करें और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनें।

वट सावित्री पूजा 2026

तिथि: 16 मई 2026, शनिवार

अमावस्या तिथि की शुरुआत: 16 मई 2026 को सुबह 05:11 बजे से

अमावस्या तिथि की समाप्ति: 17 मई 2026 की सुबह 01:30 बजे तक

शुभ मुहूर्त: सुबह 11:50 से दोपहर 12:44 तक (अभिजीत मुहूर्त)

इसलिए उदयातिथि के अनुसार व्रत 16 मई को मान्य है। इस दिन शनि अमावस्या का भी योग बन रहा है।

शुभ पूजा मुहूर्त: 16 मई 2026 को सुबह 7:12 - सुबह 8:24 (अभिजीत मुहूर्त: 11:50 AM - 12:45 PM)
योग: इस दिन सौभाग्य योग और शोभन योग का अत्यंत शुभ संयोग है।

वट सावित्री पूजा का महत्व

यह व्रत पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए रखा जाता है, जिसमें बरगद (वट) के पेड़ की पूजा की जाती है।वट सावित्री का व्रत सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्यवती का आशीर्वाद प्रदान करते हुए जीवन के सभी दुखों को दूर करने वाला माना गया है. हिंदू मान्यता के अनुसार जिस प्रकार सावित्री ने पतिव्रता व्रत का पालन करते हुए अपनी बुद्धिमत्ता से यम से अपने पति सत्यवान के प्राण बचाए थे, उसी प्रकार इस पावन व्रत के पुण्य प्रताप से सुहागिनों के पति को दीर्घायु प्राप्त होती है. उनका वैवाहिक जीवन खुशहाल होता है।वट सावित्री का व्रत सभी पापों, दुखों और कष्टों को हरने वाला है।

वट सावित्री व्रत कैसे करें

महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और बरगद के वृक्ष की परिक्रमा कर रक्षासूत्र बांधती हैं। अगर आप वट सावित्री व्रत कर रही हैं, तो कोशिश करें कि पूजा में इस्तेमाल होने वाली सुहाग की चीजें आपके मायके से आई हों।मान्यता है कि ऐसा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है।

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल रंग की साड़ी पहनकर सोलह श्रृंगार करें। अगले दिन वट वृक्ष की पूजा के लिए एक बांस की टोकरी मे सारा पूजन सामग्री, जिसमें बस का पंखा अवश्य होना चाहिए।

इसके बाद वट (बरगद) के पेड़ के पास जाकर उस स्थान को साफ करें और गंगाजल छिड़ककर पवित्र बनाएं।शिव जी, सावित्री सत्यवान की पूजा करें।फिर पेड़ की 7 बार परिक्रमा करें और हर चक्कर में धागा लपेटें।

वट सावित्री व्रत के दिन काले, सफेद और नीले रंग के कपड़े पहनने से बचें, साथ ही, इन रंगों की चूड़ियां या लहठी भी न पहनें, क्योंकि इसे परंपरा में शुभ नहीं माना जाता। वट सावित्री व्रत करने वाली सुहागिन महिला को इस पावन दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान-ध्यान कर लेना चाहिए. इस व्रत के शुभ फल को पाने के लिए सुहागिन महिला को स्वच्छ पीले या लाल रंग के कपड़े पहनने के बाद 16 श्रृंगार करना चाहिए. सुहागिन महिला को पूजा से पहले सावित्री-सत्यवान का चित्र, वट सावित्री व्रत की कथा की पुस्तक, रोली, धूप, दीप, अक्षत, फल, फूल, मिठाई, भिगोए हुए काले चने और सूत का धागा आदि एक बांस की टोकरी में इकट्ठा करके रख लेना चाहिए, ताकि पूजा करते समय उसे आसानी हो।

वट सावित्री व्रत की पूजा किसी पूजनीय और साफ-सुथरे वट वृक्ष के नीचे करनी चाहिए। वट की पूजा में सबसे पहले जल अर्पित करें, फिर रोली, चावल का तिलक और पुष्प अर्पित करें।इसके पश्चात् कच्चे सूत को वट वृक्ष के चारों ओर 7, 21 या 108 बार लपेटते हुए परिक्रमा करें। वट की परिक्रमा को आप अपनी आस्था के अनुसार कर सकते हैं। वट वृक्ष की परिक्रमा के बाद वट सावित्री व्रत की कथा कहें या फिर किसी के माध्यम से श्रद्धापूर्वक सुनें। पूजा के अंत में वट देवता को प्रणाम करके अपने पति की लंबी आयु की कामना करें तथा अपने बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद प्राप्त करें।वट सावित्री व्रत का पुण्यफल पाने के लिए इस दिन अपने सामर्थ्य के अनुसार अन्न, धन, वस्त्र एवं फल आदि का दान करें।

Suman  Mishra

Suman Mishra

एस्ट्रोलॉजी एडिटर

मैं वर्तमान में न्यूजट्रैक और अपना भारत के लिए कंटेट राइटिंग कर रही हूं। इससे पहले मैने रांची, झारखंड में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग किया है और ईटीवी में 5 वर्षों का डेस्क पर काम करने का अनुभव है। मैं पत्रकारिता और ज्योतिष विज्ञान में खास रुचि रखती हूं। मेरे नाना जी पंडित ललन त्रिपाठी एक प्रकांड विद्वान थे उनके सानिध्य में मुझे कर्मकांड और ज्योतिष हस्त रेखा का ज्ञान मिला और मैने इस क्षेत्र में विशेषज्ञता के लिए पढाई कर डिग्री भी ली है Author Experience- 2007 से अब तक( 17 साल) Author Education – 1. बनस्थली विद्यापीठ और विद्यापीठ से संस्कृत ज्योतिष विज्ञान में डिग्री 2. रांची विश्वविद्यालय से पत्राकरिता में जर्नलिज्म एंड मास कक्मयूनिकेश 3. विनोबा भावे विश्व विदयालय से राजनीतिक विज्ञान में स्नातक की डिग्री

Next Story