750+ CIBIL Score: फिर भी Loan Reject? ये 6 गलतियां न करें

750+ CIBIL Score: के बावजूद लोन रिजेक्ट हो सकता है। जानें ज्यादा EMI, क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल, बार-बार आवेदन और आय से जुड़ी 6 गलतियां।

Jyotsana Singh
Published on: 18 Aug 2026 5:18 PM IST
750+ CIBIL Score: but Loan Rejected? Avoid These 6 Common Mistakes
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750+ CIBIL Score: but Loan Rejected? Avoid These 6 Common Mistakes

750+ CIBIL Score: अगर आपका सिबिल स्कोर 750 या उससे ज्यादा है, तो निश्चित तौर पर आपकी क्रेडिट प्रोफाइल को अच्छा माना जाता है। लेकिन सिर्फ इस एक नंबर के आधार पर बैंक लोन मंजूर नहीं करता। लोन की मंजूरी के समय बैंक आपकी आय, मौजूदा कर्ज, नौकरी की स्थिरता, क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल और हाल में किए गए लोन आवेदन समेत कई चीजों की जांच करता है। यही वजह है कि अच्छा सिबिल स्कोर होने के बावजूद कई लोगों की लोन एप्लीकेशन रिजेक्ट हो जाती है।

750+ स्कोर अच्छा है, लेकिन लोन की गारंटी नहीं

सिबिल स्कोर आपकी क्रेडिट हिस्ट्री और पुराने कर्ज को चुकाने के व्यवहार का एक महत्वपूर्ण संकेत है। 750 या उससे ऊपर का स्कोर आमतौर पर अच्छा माना जाता है और इससे लोन मिलने की संभावना बेहतर हो सकती है। लेकिन बैंक का फैसला केवल सिबिल स्कोर देखकर नहीं होता।

बैंक यह भी देखता है कि आपकी मौजूदा वित्तीय स्थिति नए लोन का बोझ उठाने लायक है या नहीं। इसलिए 800 के आसपास स्कोर होने के बाद भी अगर आपकी आय कम है या पहले से कई ईएमआई चल रही हैं, तो आवेदन खारिज हो सकता है।

ज्यादा EMI होने पर बैंक क्यों करता है रिजेक्ट?

मान लीजिए आपकी मासिक आय 60 हजार रुपये है और मौजूदा लोन की ईएमआई में ही 30 हजार रुपये जा रहे हैं। ऐसे में बैंक को आशंका हो सकती है कि नई ईएमआई जुड़ने के बाद आपकी आय पर कर्ज का बोझ बहुत बढ़ जाएगा। बैंक इसी तरह की स्थिति को समझने के लिए FOIR यानी Fixed Obligation to Income Ratio जैसे मानकों का इस्तेमाल करते हैं। अलग-अलग बैंक और लोन के हिसाब से स्वीकार्य सीमा अलग हो सकती है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर बैंक में 50 फीसदी से ऊपर जाते ही लोन निश्चित रूप से रिजेक्ट हो जाएगा। वहीं ज्यादा मौजूदा देनदारी आवेदन के लिए जोखिम बढ़ा सकती है।

क्रेडिट कार्ड की लिमिट का ज्यादा इस्तेमाल भी है संकेत

क्रेडिट कार्ड की पूरी लिमिट इस्तेमाल करना अपने आप में डिफॉल्ट नहीं है, लेकिन लगातार बहुत ज्यादा क्रेडिट इस्तेमाल करना बैंक को जोखिम का संकेत दे सकता है। इसे Credit Utilisation Ratio कहा जाता है। उदाहरण के लिए, अगर आपके कार्ड की लिमिट 1 लाख रुपये है और आप लगातार 70-80 हजार रुपये इस्तेमाल कर रहे हैं, तो बैंक को लग सकता है कि आप उपलब्ध क्रेडिट पर काफी निर्भर हैं। इसलिए लोन लेने से पहले कार्ड का बकाया कम रखना और समय पर भुगतान करना आपकी प्रोफाइल को मजबूत कर सकता है।

बार-बार लोन के लिए आवेदन करना पड़ सकता है भारी

अगर आप थोड़े समय के भीतर कई बैंकों या वित्तीय संस्थानों में लोन के लिए आवेदन करते हैं, तो हर बार की गई हार्ड क्रेडिट इंक्वायरी आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में दिखाई दे सकती है। बहुत कम समय में कई इंक्वायरी होने पर बैंक इसे अतिरिक्त कर्ज की जरूरत के संकेत के रूप में देख सकता है। इसलिए हर जगह एक साथ आवेदन करने के बजाय पहले अपनी पात्रता, ब्याज दर और लोन की शर्तें जांचना बेहतर है।

नौकरी और आय की स्थिरता भी है अहम

बैंक के लिए आपकी भविष्य की आय भी महत्वपूर्ण होती है। नौकरी में बार-बार बदलाव, कम समय का रोजगार इतिहास या आय में अस्थिरता होने पर बैंक को यह आकलन करने में मुश्किल हो सकती है कि आप लंबे समय तक ईएमआई चुका पाएंगे या नहीं। स्वरोजगार करने वालों के मामले में बैंक आय, बैंक स्टेटमेंट, आईटीआर और कारोबार की स्थिरता जैसे दस्तावेजों को भी देख सकता है।

गारंटर बनने से भी बढ़ सकती है जिम्मेदारी

किसी दूसरे व्यक्ति के लोन में गारंटर या को-बॉरोअर बनने का फैसला भी सोच-समझकर करना चाहिए। अगर मुख्य उधारकर्ता ईएमआई चुकाने में डिफॉल्ट करता है, तो उस खाते का नकारात्मक असर गारंटर की क्रेडिट प्रोफाइल और भविष्य में लोन लेने की क्षमता पर पड़ सकता है।

इसलिए केवल अपना सिबिल स्कोर अच्छा रखने से काम नहीं चलता, बल्कि जिन क्रेडिट खातों से आप जुड़े हैं, उनकी स्थिति पर भी नजर रखना जरूरी है।

क्रेडिट हिस्ट्री छोटी होने पर भी हो सकती है परेशानी

कभी-कभी समस्या खराब क्रेडिट स्कोर की नहीं, बल्कि क्रेडिट हिस्ट्री के बहुत छोटे या सीमित होने की होती है। अगर आपने कभी लोन या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल ही नहीं किया है, तो बैंक के पास आपके कर्ज चुकाने के व्यवहार का पर्याप्त रिकॉर्ड नहीं हो सकता। ऐसी स्थिति में 750+ स्कोर की तुलना में पूरी क्रेडिट प्रोफाइल और आय संबंधी दस्तावेज ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

क्रेडिट रिपोर्ट में गलती भी बन सकती है वजह

कई बार लोन रिजेक्शन का कारण ग्राहक की वास्तविक वित्तीय स्थिति नहीं, बल्कि क्रेडिट रिपोर्ट में दर्ज गलत जानकारी हो सकती है। बंद हो चुका लोन सक्रिय दिखना, गलत बकाया राशि, गलत भुगतान रिकॉर्ड या किसी ऐसे खाते का दिखाई देना जिससे आपका संबंध नहीं है, आपकी प्रोफाइल को प्रभावित कर सकता है। इसलिए लोन के लिए आवेदन करने से पहले अपनी क्रेडिट रिपोर्ट की जांच करना समझदारी है। अगर कोई गलती मिले तो संबंधित क्रेडिट ब्यूरो या बैंक/वित्तीय संस्था के पास शिकायत दर्ज कर उसे ठीक कराया जा सकता है।

लोन लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

अच्छा सिबिल स्कोर बनाए रखने के साथ अपनी मौजूदा ईएमआई और क्रेडिट कार्ड बकाया को नियंत्रण में रखना जरूरी है। लोन के लिए जरूरत से ज्यादा आवेदन न करें, समय पर ईएमआई और कार्ड बिल चुकाएं और क्रेडिट रिपोर्ट में दर्ज जानकारी को समय-समय पर जांचते रहें। यानी 750+ सिबिल स्कोर लोन की मजबूत शुरुआत जरूर है, लेकिन अंतिम मंजूरी की गारंटी नहीं। बैंक आपकी पूरी वित्तीय प्रोफाइल देखकर यह तय करता है कि नया कर्ज आपके लिए और बैंक के लिए कितना सुरक्षित है।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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