Credit Card: क्रेडिट कार्ड की लिमिट कैसे तय होती है? बैंक आपकी हैसियत कैसे आंकते हैं, जानिए

Credit Card Limit Kaise Decide Hoti Hai: क्रेडिट कार्ड की लिमिट बैंक कैसे तय करते हैं? CIBIL स्कोर, FOIR, सैलरी, EMI और क्रेडिट हिस्ट्री का पूरा गणित आसान भाषा में जानिए।

Neel Mani Lal
Published on: 5 Aug 2026 7:40 PM IST
Credit Card Limit Kaise Decide Hoti Hai
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Credit Card Limit Kaise Decide Hoti Hai

Credit Card Limit Kaise Decide Hoti Hai: कभी सोचा है कि दो लोगों की सैलरी एक जैसी होने के बावजूद एक को 50,000 और दूसरे को 2 लाख की क्रेडिट कार्ड लिमिट क्यों मिलती है? असल में बैंक कोई अंदाज़े से लिमिट तय नहीं करता बल्कि इसके पीछे एक पूरा गणितीय और डेटा-आधारित सिस्टम काम करता है।

सबसे पहला और सबसे बड़ा फैक्टर आपकी कमाई है। जितनी ज्यादा सैलरी या बिजनेस इनकम होती है, बैंक को उतना ही कम रिस्क लगता है, इसलिए उतनी ही ज्यादा क्रेडिट लिमिट ऑफर की जाती है। वहीं कम इनकम वालों को लिमिट कम मिलती है क्योंकि बैंक को पैसा वापस न मिलने का खतरा ज्यादा दिखता है।

दूसरा और सबसे अहम पैमाना है आपका क्रेडिट स्कोर

अगर इनकम ‘कमाई की क्षमता’ दिखाती है, तो क्रेडिट स्कोर (CIBIL) ‘भरोसे’ का सबूत है। क्रेडिट स्कोर आपका फाइनेंशियल रिपोर्ट कार्ड होता है। अगर आपने पहले लिए गए लोन और क्रेडिट कार्ड के बिल समय पर भरे हैं, तो स्कोर अच्छा रहता है और बैंक ज्यादा भरोसा दिखाता है। यही वजह है कि दो बराबर सैलरी वालों में से जिसका पुराना पेमेंट रिकॉर्ड बेहतर होता है, उसे ज्यादा लिमिट मिलती है।

तीसरा पैमाना - FOIR यानी आपकी 'असली' चुकाने की क्षमता

यहां सबसे कम जाना-पहचाना लेकिन सबसे महत्वपूर्ण कॉन्सेप्ट आता है - FOIR (Fixed Obligation to Income Ratio)। यह एक ऐसा मीट्रिक है जो बताता है कि आपकी मासिक इनकम का कितना हिस्सा पहले से ही किराए, मौजूदा लोन की EMI, क्रेडिट कार्ड बकाया, बीमा प्रीमियम जैसे तय भुगतानों में खर्च हो रहा है। बैंक सिर्फ आपकी सैलरी नहीं, यह भी जांचते हैं कि उसमें से कितना हिस्सा पहले से दूसरी किश्तों में जा रहा है।

FOIR कैसे निकाला जाता है

अपने सभी मासिक फिक्स खर्च - जैसे EMI, किराया, क्रेडिट कार्ड भुगतान, जोड़ लें, फिर उसे अपनी नेट मासिक आय से भाग देकर 100 से गुणा कर दें। उदाहरण के लिए, अगर आपके कुल फिक्स्ड मासिक खर्च 1,500 रुपये हैं और आपकी नेट मासिक आय 5,000 रुपये है, तो FOIR 30% होगा (1,500 ÷ 5,000 = 0.3, यानी 30%)।

बैंक आमतौर पर अधिकतम FOIR सीमा 40-50% के आसपास रखते हैं, जिसके बाद वे नया लोन या क्रेडिट लिमिट अप्रूव नहीं करते। यानी अगर आपकी आय का बड़ा हिस्सा पहले से किश्तों में जा रहा है, तो आपको कम लिमिट मिलेगी, भले ही आपकी सैलरी अच्छी क्यों न हो। यही वजह है कि कई बार अच्छी सैलरी होने के बावजूद भी क्रेडिट कार्ड की लिमिट कम मिलती है या आवेदन रिजेक्ट हो जाता है।

बैंक और भी क्या-क्या चेक करते हैं

लिमिट तय करने से पहले बैंक आपकी मासिक आय, फिक्स खर्चों और वित्तीय दायित्वों के अलावा यह भी देखता है कि आपका पहले से कोई और लोन तो नहीं चल रहा, आप किसी बैंक में डिफॉल्टर तो नहीं रहे, और आपके महीने के औसत खर्चे कितने हैं, इन सबके आधार पर हर बैंक की अपनी अलग क्रेडिट पॉलिसी के हिसाब से अंतिम लिमिट तय होती है।

इसके अलावा ये फैक्टर भी मायने रखते हैं:

रोजगार की स्थिरता: सरकारी नौकरी या बड़ी स्थापित कंपनी में काम करने वालों को अक्सर ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है।

बैंक के साथ पुराना रिश्ता: जिस बैंक में आपका सैलरी अकाउंट या फिक्स्ड डिपाजिट पहले से है, वहां लिमिट मिलने की संभावना ज्यादा होती है।

कार्ड का प्रकार: प्रीमियम या ट्रैवल रिवॉर्ड कार्ड्स पर अक्सर बेसिक कार्ड्स से ज्यादा शुरुआती लिमिट मिलती है।

सैलरी से ज्यादा लिमिट क्यों मिल जाती है

एक दिलचस्प सवाल यह भी उठता है कि कई बार बैंक सैलरी से भी ज्यादा क्रेडिट लिमिट क्यों दे देते हैं? अक्सर 50,000 रुपये की सैलरी वाले ग्राहक को बैंक 70,000 या उससे ज्यादा की क्रेडिट लिमिट दे देता है, क्योंकि लिमिट तय करते समय बैंक सिर्फ सैलरी नहीं, बल्कि क्रेडिट स्कोर, पुराने बिल भरने का रिकॉर्ड और पूरी फाइनेंशियल प्रोफाइल भी देखता है। लेकिन यह सुविधा जितनी आकर्षक लगती है, उतनी ही जोखिम भरी भी है। अगर आप पूरी लिमिट का इस्तेमाल कर लेते हैं तो अगले महीने का बिल आपकी असली आय से बड़ा हो सकता है।

सुरक्षित सीमा क्या है

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स की सलाह है कि क्रेडिट कार्ड से खर्च अपनी टेक-होम सैलरी के 30% तक ही सीमित रखें, ताकि पूरा बिल समय पर आराम से चुकाया जा सके। साथ ही ध्यान रहे कि बार बार क्रेडिट लिमिट का ज्यादातर हिस्सा इस्तेमाल करने से आपके क्रेडिट स्कोर पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है, क्योंकि "क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो" (इस्तेमाल की गई लिमिट का प्रतिशत) भी स्कोर तय करने का एक बड़ा हिस्सा होता है।

याद रखिये कि क्रेडिट कार्ड की लिमिट कोई मनमानी रकम नहीं होती, यह आपकी सैलरी, क्रेडिट स्कोर, पहले से चल रहे कर्ज़ के बोझ (FOIR) और बैंक के साथ आपके रिश्ते का मिला-जुला नतीजा है। अगर आप भविष्य में ज्यादा लिमिट चाहते हैं, तो सबसे कारगर तरीका है - समय पर बिल चुकाना, क्रेडिट यूटिलाइजेशन कम रखना, और मौजूदा लोन के बोझ को नियंत्रण में रखना।

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