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Crude Oil Impact on Petrol Diesel Prices: 72 डॉलर पर आ गया कच्चा तेल, फिर क्यों नहीं घट रहे पेट्रोल-डीजल के दाम? जानिए वजह
Crude Oil Impact on Petrol Diesel Prices: कच्चा तेल सस्ता, फिर भी पेट्रोल-डीजल महंगा! जानिए कीमतें क्यों नहीं घट रहीं।
Crude Oil Impact on Petrol Diesel Prices: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार नरम पड़ रही हैं। ब्रेंट क्रूड 72 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गया है और WTI क्रूड भी 70 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है। ऐसे में लोगों के मन ने सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि जब तेल सस्ता हो रहा है तो भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम क्यों नहीं घट रहे? आखिर आम लोगों को राहत कब मिलेगी? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसके पीछे सिर्फ कच्चे तेल की कीमत ही नहीं, बल्कि सरकारी तेल कंपनियों का घाटा, पुराना स्टॉक, टैक्स और वैश्विक बाजार की कई अहम वजहें हैं। आइए इस बारे में जानते हैं विस्तार से -
इसलिए सस्ता हुआ कच्चा तेल
अमेरिका और ईरान के बीच दोहा में चल रही शांति वार्ता में सकारात्मक संकेत मिलने के बाद वैश्विक बाजार में राहत का माहौल बना है। इससे दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) से कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने का खतरा कम हुआ है। इसी वजह से मंगलवार को ब्रेंट क्रूड एक फीसदी से ज्यादा गिरकर 72.40 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड 0.83 फीसदी टूटकर 70.16 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया।
आखिर भारत में क्यों नहीं घट रहे पेट्रोल-डीजल के दाम?
कच्चे तेल की कीमत कम होने के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में पेट्रोल अभी भी 100 रुपये प्रति लीटर के आसपास या उससे ऊपर बिक रहा है, जबकि डीजल की कीमतें करीब 95 से 99 रुपये प्रति लीटर के बीच बनी हुई हैं।
इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदे गए पुराने स्टॉक के आधार पर ईंधन बेचती हैं। यानी आज पेट्रोल पंप पर मिलने वाला ईंधन जरूरी नहीं कि मौजूदा सस्ती कीमत वाले क्रूड से तैयार हुआ हो। जब तक कम कीमत पर खरीदे गए नए स्टॉक की आपूर्ति बाजार में नहीं आती, तब तक खुदरा कीमतों में तुरंत कमी की उम्मीद कम रहती है।
नुकसान के बाद अब कंपनियां कर रही रिकवरी
कुछ समय पहले पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के कारण कच्चा तेल 100 से 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। उस दौरान सरकारी तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग 12 रुपये और डीजल पर करीब 21 रुपये प्रति लीटर तक का नुकसान उठाना पड़ रहा था। इसके बावजूद कंपनियों ने लंबे समय तक खुदरा कीमतों में बड़ा बदलाव नहीं किया।
अब जब कच्चे तेल की कीमत करीब 72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है, तो इन्हीं कंपनियों को पेट्रोल की बिक्री पर प्रति लीटर लगभग 5 से 7 रुपये तक का विपणन मार्जिन मिलने लगा है। इस अतिरिक्त कमाई का इस्तेमाल कंपनियां पुराने घाटे और कर्ज का बोझ कम करने में कर रही हैं।
जेपी मॉर्गन ने क्या कहा है?
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतें नीचे रहने से सरकारी तेल विपणन कंपनियों का फ्यूल मार्केटिंग मार्जिन और मजबूत हो सकता है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भविष्य में ईंधन पर टैक्स से जुड़ी नीतियों और कंपनियों के बढ़ते कर्ज जैसी चुनौतियां उनकी लंबी अवधि की कमाई पर असर डाल सकती हैं।
पेट्रोल की कीमत सिर्फ क्रूड ऑयल से तय नहीं होती
कई लोगों को लगता है कि कच्चा तेल सस्ता होते ही पेट्रोल-डीजल भी सस्ता हो जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है। भारत में पेट्रोल और डीजल की अंतिम कीमत में कच्चे तेल के अलावा रिफाइनिंग लागत, परिवहन खर्च, डीलर कमीशन, केंद्र सरकार का उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी), राज्यों का वैट और अन्य कर भी शामिल होते हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में थोड़ी गिरावट का असर खुदरा कीमतों पर तुरंत दिखाई नहीं देता।
कब मिल सकती है आम लोगों को राहत?
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का कहना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता सफल रहती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बनी रहती हैं, तो आने वाले महीनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2 से 3 रुपये प्रति लीटर तक की राहत मिल सकती है। जबकि यह राहत पूरी तरह वैश्विक बाजार की स्थिति, तेल कंपनियों की लागत, सरकार की कर नीति और कच्चे तेल की भविष्य की कीमतों पर निर्भर करेगी।
आम उपभोक्ताओं के लिए क्या है संदेश?
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता जरूर हुआ है, लेकिन इसका सीधा फायदा अभी उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा है। यदि वैश्विक बाजार में कीमतें लंबे समय तक नीचे बनी रहती हैं और कोई नया भू-राजनीतिक संकट पैदा नहीं होता, तो आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है। तब तक आम लोगों को मौजूदा कीमतों पर ही ईंधन खरीदना पड़ेगा, जबकि सरकार और तेल कंपनियों की नजर अंतरराष्ट्रीय बाजार की अगली चाल पर बनी हुई है।


