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Foreign Payment महंगा...कार्ड से विदेश में खरीदारी पर देना होगा ज्यादा चार्ज
DCC Charges Hike 2026: विदेश में कार्ड से भुगतान अब होगा महंगा, जानिए नए नियम
DCC Charges Hike 2026
DCC Charges Hike 2026: अगर आप विदेश घूमने जा रहे हैं, वहां पढ़ाई कर रहे हैं या विदेशी वेबसाइटों पर ऑनलाइन खरीदारी करने का शौक रखते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। देश के बड़े निजी बैंक एक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक ने अपने क्रेडिट और डेबिट कार्ड पर लगने वाले डायनामिक करेंसी कन्वर्जन (DCC) शुल्क में बढ़ोतरी कर दी है। इससे विदेश में कार्ड के जरिए होने वाले कई ट्रांजैक्शन पहले के मुकाबले महंगे हो जाएंगे। इससे पहले ICICI बैंक भी इसी तरह का फैसला ले चुका है। ऐसे में अब ग्राहकों को यह समझना जरूरी होगा कि विदेश में कार्ड से भुगतान करते समय कौन-सा विकल्प चुनना उनके लिए अधिक फायदेमंद रहेगा। आइए इस बारे में जानते हैं विस्तार से -
Axis Bank और Kotak Mahindra Bank ने बढ़ाई DCC फीस
ICICI Bank पहले ही लागू कर चुका है नया शुल्क
निजी बैंकों में यह बदलाव सबसे पहले ICICI बैंक ने किया था। बैंक ने 21 जून 2026 से अपने सभी डेबिट कार्ड पर DCC चार्ज 1 फीसदी से बढ़ाकर 3.5 फीसदी + GST कर दिया था। अब एक्सिस और कोटक के फैसले के बाद माना जा रहा है कि आने वाले समय में अन्य बैंक भी अपने अंतरराष्ट्रीय कार्ड ट्रांजैक्शन शुल्क की समीक्षा कर सकते हैं।
आखिर क्या होता है DCC?
DCC यानी डायनामिक करेंसी कन्वर्जन ऐसी सुविधा है। जिसमें विदेश में खरीदारी करते समय ग्राहक को स्थानीय मुद्रा की बजाय भारतीय रुपये में भुगतान करने का विकल्प दिया जाता है। पहली नजर में यह सुविधा आसान लगती है क्योंकि ग्राहक को तुरंत पता चल जाता है कि उसके खाते से कितने रुपये कटेंगे। लेकिन इसी सुविधा के बदले बैंक और मर्चेंट अतिरिक्त शुल्क भी वसूल सकते हैं। ऐसे में रुपये में भुगतान हमेशा सस्ता हो, यह जरूरी नहीं है।
DCC और फॉरेन करेंसी मार्कअप में क्या अंतर है?
जब ग्राहक विदेशी देश की स्थानीय मुद्रा में भुगतान करता है, तब कार्ड जारी करने वाला बैंक अपने तय एक्सचेंज रेट के आधार पर राशि को भारतीय रुपये में बदलता है। उस पर फॉरेन करेंसी मार्कअप लागू होता है। वहीं यदि ग्राहक सीधे भारतीय रुपये में भुगतान का विकल्प चुनता है, तो मुद्रा परिवर्तन विदेशी मर्चेंट या उसका पेमेंट प्रोसेसर करता है। इसके साथ DCC शुल्क भी लगाया जाता है। इसलिए दोनों विकल्पों की कुल लागत अलग-अलग हो सकती है।
बैंकों ने क्यों बढ़ाई फीस?
बैंकों ने इस बदलाव की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई है। इस बारे में बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कार्ड नेटवर्क, क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट प्रोसेसिंग और विदेशी ट्रांजैक्शन की बढ़ती लागत इसकी प्रमुख वजह हो सकती है। इसके अलावा विदेश यात्रा, इंटरनेशनल ई-कॉमर्स और विदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ते भुगतान के कारण बैंक अपनी फीस आधारित आय भी बढ़ाना चाहते हैं।
विदेश में कार्ड इस्तेमाल करते समय किन बातों का रखें ध्यान?
यदि आप विदेश यात्रा पर जा रहे हैं, तो भुगतान करते समय स्क्रीन पर दिख रहे करेंसी विकल्प को ध्यान से पढ़ें। कई वित्तीय विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अधिकांश मामलों में स्थानीय मुद्रा में भुगतान करना ज्यादा किफायती हो सकता है क्योंकि इससे DCC शुल्क से बचा जा सकता है। अंतिम खर्च आपके कार्ड के फॉरेक्स मार्कअप, बैंक की फीस और उस समय की विनिमय दर पर निर्भर करेगा। इसलिए यात्रा से पहले अपने कार्ड की शुल्क सूची और नियमों को जरूर पढ़ लें।
किन लोगों पर सबसे ज्यादा पड़ेगा असर?
इस बदलाव का सबसे अधिक असर उन लोगों पर पड़ेगा जो अक्सर विदेश यात्रा करते हैं, वहां पढ़ाई करते हैं, बिजनेस ट्रिप पर जाते हैं या विदेशी वेबसाइटों से नियमित रूप से खरीदारी करते हैं। होटल बुकिंग, रेस्टोरेंट बिल, शॉपिंग, इंटरनेशनल सब्सक्रिप्शन और विदेशी ऑनलाइन सेवाओं के भुगतान पर अब अतिरिक्त खर्च बढ़ सकता है। छोटे भुगतान पर यह अंतर कम दिखेगा, लेकिन बड़े ट्रांजैक्शन में यह शुल्क हजारों रुपये तक पहुंच सकता है।
ग्राहकों के लिए क्या है सबसे जरूरी सलाह?
वित्तविशेषज्ञों का कहना है कि विदेश में कार्ड से भुगतान करने से पहले यह समझना जरूरी है कि आप स्थानीय मुद्रा में भुगतान कर रहे हैं या भारतीय रुपये में। साथ ही अपने बैंक के DCC चार्ज, फॉरेन करेंसी मार्कअप, GST और अन्य अंतरराष्ट्रीय शुल्क की जानकारी पहले से ले लें। थोड़ी-सी सावधानी आपको अनावश्यक अतिरिक्त खर्च से बचा सकती है और विदेश में कार्ड का इस्तेमाल अधिक किफायती बना सकती है।


