30 हजार करोड़ का डेथ केयर बाजार, अंतिम यात्रा में क्यों बढ़ रही कॉरपोरेट की दिलचस्पी?

Death Care Industry India 2026: 30 हजार करोड़ का अंतिम संस्कार कारोबार, क्यों बढ़ रही कॉरपोरेट की दिलचस्पी

Jyotsana Singh
Published on: 30 July 2026 4:20 PM IST
Indias ₹30,000 Crore Death Care Market: Why Corporates Are Entering Funeral Services
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India's ₹30,000 Crore Death Care Market: Why Corporates Are Entering Funeral Services

Death Care Industry India: भारत में अंतिम संस्कार अब केवल धार्मिक और सामाजिक परंपरा तक सीमित नहीं रह गया है। बदलती जीवनशैली, छोटे होते परिवार, शहरीकरण और डिजिटल सेवाओं के विस्तार ने इसे तेजी से बढ़ते कारोबारी क्षेत्र में बदल दिया है। एक रिपोर्ट के अनुसार देश का डेथ केयर उद्योग करीब 30,000 करोड़ रुपये का हो चुका है और 2030 तक यह 40 हजार से 70 हजार करोड़ रुपये के बाजार में बदल सकता है। यही वजह है कि स्टार्टअप से लेकर बड़ी कंपनियां भी अब इस सेक्टर में तेजी से निवेश कर रही हैं।

बदलते सामाजिक ढांचे ने बढ़ाई पेशेवर सेवाओं की जरूरत

कुछ साल पहले तक अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी परिवार, रिश्तेदार और पड़ोस के लोग मिलकर निभाते थे। लेकिन अब संयुक्त परिवार तेजी से खत्म हो रहे हैं और लोग नौकरी या पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों में रहने लगे हैं। ऐसे में किसी परिजन के निधन के बाद कम समय में सभी व्यवस्थाएं करना आसान नहीं होता। इसी कारण अब लोग ऐसी कंपनियों की मदद ले रहे हैं, जो एक फोन कॉल पर अंतिम यात्रा से लेकर अंतिम संस्कार तक की पूरी व्यवस्था संभाल लेती हैं।

30 हजार करोड़ के बाजार पर कॉरपोरेट की नजर

मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार भारत का डेथ केयर उद्योग करीब 30 हजार करोड़ रुपये का हो चुका है। दुनिया में यह बाजार औसतन 6 फीसदी सालाना की दर से बढ़ रहा है। जबकि भारत में इसकी वृद्धि 15 से 20 फीसदी तक रहने का अनुमान है। यदि यही रफ्तार बनी रही तो 2030 तक यह उद्योग 40 हजार करोड़ से 70 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। यही संभावनाएं बड़ी कंपनियों और निवेशकों को इस क्षेत्र की ओर आकर्षित कर रही हैं।

सिर्फ बढ़ती आबादी नहीं, बदलती जीवनशैली भी बड़ी वजह

इस उद्योग की तेजी केवल मृत्यु दर बढ़ने की वजह से नहीं है। असली कारण लोगों की बदलती जीवनशैली है। आज अधिकांश परिवारों में पति-पत्नी दोनों नौकरी करते हैं और रिश्तेदार अलग-अलग शहरों में रहते हैं। ऐसे में अंतिम संस्कार की व्यवस्था के लिए समय निकालना मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि पेशेवर सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है।

अभी भी ज्यादातर बाजार असंगठित है

भारत में अंतिम संस्कार सेवाओं का लगभग 85 से 90 फीसदी कारोबार अभी भी असंगठित क्षेत्र के हाथों में है। स्थानीय स्तर पर नकद भुगतान और पारंपरिक तरीके से सेवाएं दी जाती हैं। यानी अंतिम संस्कार सेवाओं का अधिकांश कारोबार अभी भी स्थानीय स्तर पर होता है। लोग जरूरत पड़ने पर सीधे स्थानीय शव वाहन, एम्बुलेंस, पंडित या अन्य सेवा प्रदाताओं से संपर्क करते हैं। बड़ी कंपनियों और संगठित प्लेटफॉर्म की हिस्सेदारी अभी केवल 10-15 फीसदी के आसपास है। इसलिए एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस क्षेत्र में आगे तेज़ी से विस्तार की काफी गुंजाइश है।

स्टार्टअप से लेकर बड़ी कंपनियां तक दे रही हैं सेवाएं

अब यह कारोबार केवल स्थानीय ऑपरेटरों तक सीमित नहीं रहा। Last Journey, Antyeshti, Mokshshilp, Shraddhanjali.com और Sukhant Funeral जैसी कंपनियां देश के कई शहरों में सेवाएं दे रही हैं। ये कंपनियां अंतिम यात्रा, शव वाहन, फ्रीजर बॉक्स, श्मशान बुकिंग, धार्मिक अनुष्ठान, ऑनलाइन श्रद्धांजलि, लाइव स्ट्रीमिंग और विदेश से पार्थिव शरीर लाने जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराती हैं।

एक कॉल पर पूरी व्यवस्था, यही है बिजनेस मॉडल

इन कंपनियों का मॉडल काफी सरल है। इनके पास हर शहर में अपना बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं होता। ये स्थानीय एम्बुलेंस संचालकों, शव वाहन प्रदाताओं, फूल विक्रेताओं, पंडितों और अन्य सेवा प्रदाताओं को अपने नेटवर्क से जोड़ती हैं। ग्राहक वेबसाइट या हेल्पलाइन पर संपर्क करता है और कंपनी पूरी व्यवस्था का समन्वय करती है।

हर जरूरत और बजट के हिसाब से तैयार किए गए पैकेज

अलग-अलग जरूरतों के अनुसार कंपनियां कई तरह के पैकेज उपलब्ध कराती हैं। सामान्य पैकेज 15 हजार से 30 हजार रुपये तक के होते हैं। जिनमें अंतिम यात्रा और अंतिम संस्कार की बुनियादी व्यवस्था शामिल रहती है। वहीं 50 हजार से 2 लाख रुपये तक के पैकेज में अतिरिक्त धार्मिक अनुष्ठान और अन्य सेवाएं दी जाती हैं। विदेश से पार्थिव शरीर लाने, लाइव स्ट्रीमिंग और विशेष व्यवस्थाओं वाले पैकेज 2.5 लाख से 10 लाख रुपये या उससे अधिक तक पहुंच सकते हैं।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से मिल रहे हैं सबसे ज्यादा ग्राहक

इस उद्योग में पारंपरिक विज्ञापन की तुलना में डिजिटल माध्यम ज्यादा प्रभावी साबित हो रहे हैं। अधिकांश लोग जरूरत पड़ने पर गूगल पर फ्यूनरल सर्विस, शव वाहन या फ्रीजर बॉक्स जैसी सेवाएं खोजते हैं। इसी वजह से कंपनियां ऑनलाइन हेल्पलाइन, वेबसाइट और डिजिटल सर्च पर ज्यादा निवेश कर रही हैं ताकि जरूरत के समय तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

कॉरपोरेट को क्यों दिख रहा है बड़ा अवसर?

फूल, लॉजिस्टिक्स और गिफ्ट कारोबार से जुड़ी कई कंपनियों के पास पहले से वाहन, कोल्ड स्टोरेज और शहरों में मजबूत नेटवर्क मौजूद है। ऐसे में वे उसी नेटवर्क का इस्तेमाल अंतिम संस्कार सेवाओं के लिए भी कर सकती हैं। इससे उनकी लागत कम होती है और पहले से मौजूद संसाधनों का बेहतर उपयोग हो जाता है। यही वजह है कि कई कॉरपोरेट इस क्षेत्र में भविष्य का बड़ा अवसर देख रहे हैं।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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