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E20 Petrol Contamination: गाड़ी में खराब पेट्रोल तो नहीं? 2,573 पंपों पर बिक्री बंद
E20 Petrol Contamination: देशभर में 2,573 पेट्रोल पंपों पर बिक्री अस्थायी रूप से रोकी गई है। जानें कार्रवाई क्यों हुई और E20 पेट्रोल को लेकर क्या चिंता है।
E20 Petrol Contamination: Fuel Sales Halted at 2,573 Pumps, What Drivers Should Know
E20 Petrol Contamination: पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों के बीच सरकार ने देशभर में क्वालिटी कंट्रोल ड्राइव तेज कर दी है। 25 अगस्त तक 2,573 पेट्रोल पंपों पर बिक्री अस्थायी रूप से रोक दी गई। वहीं, इसका मतलब यह नहीं है कि इन सभी पंपों पर मिलावटी या खराब पेट्रोल मिला है। कई जगह पानी की निगरानी करने वाले सेंसर या जांच व्यवस्था में खामी मिलने के कारण भी बिक्री रोकी गई है। पिछले कुछ हफ्तों से देश में E20 पेट्रोल को लेकर बहस तेज है। वाहन मालिकों की ओर से माइलेज कम होने और कुछ गाड़ियों के फ्यूल सिस्टम में खराबी की शिकायतें सामने आईं। इसी बीच ऑटोमोबाइल उद्योग की ओर से पेट्रोल में क्लोराइड और नमी की मौजूदगी को लेकर चिंता जताई गई। जबकि बाद में सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स यानी SIAM ने अपने आंकड़ों को आगे सत्यापन की जरूरत बताते हुए अपनी शुरुआती चिट्ठी पर स्पष्टीकरण भी दिया है।
2,573 पेट्रोल पंपों पर क्यों रोकी गई बिक्री?
पेट्रोलियम मंत्रालय की निगरानी में चल रही कार्रवाई में इंडियन ऑयल के 1,257, हिंदुस्तान पेट्रोलियम के 915 और भारत पेट्रोलियम के 401 रिटेल आउटलेट शामिल हैं। इन पंपों पर बिक्री तब तक रोकी गई है, जब तक जरूरी गुणवत्ता और सुरक्षा जांच पूरी नहीं हो जाती। लेकिन यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है। इन 2,573 पंपों को सीधे तौर पर 'खराब पेट्रोल बेचने वाला' कहना सही नहीं होगा। मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक कई मामलों में भूमिगत टैंक में पानी की निगरानी करने वाले प्रोब या सेंसर के काम न करने जैसी तकनीकी खामियां सामने आईं। यानी पंप को यह साबित करने में सक्षम होना जरूरी है कि उसका ईंधन सुरक्षित है।
E20 में क्लोराइड और पानी का मुद्दा क्या है?
E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक एथेनॉल और बाकी हिस्सा पेट्रोल होता है। एथेनॉल आधारित ईंधन को लेकर हाल में सबसे बड़ी चिंता क्लोराइड और नमी को लेकर सामने आई। ज्यादा मात्रा में ऐसे दूषित पदार्थ ईंधन के संपर्क में आने वाले कुछ हिस्सों में जंग और खराबी का कारण बन सकते हैं। ऑटो कंपनियों की ओर से फ्यूल इंजेक्टर, फ्यूल पंप और अन्य संबंधित पुर्जों में खराबी की चिंता भी जताई गई थी। वहीं सरकारी तेल कंपनियों ने देशभर में किए गए परीक्षणों के आधार पर व्यापक स्तर पर E20 में क्लोराइड या पानी की मिलावट के दावों को खारिज किया है। इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल के अनुसार रिफाइनरी, डिपो और पेट्रोल पंपों से लिए गए ज्यादातर नमूनों में क्लोराइड तय सीमा के भीतर मिला।
90 हजार पंपों पर दिन में कई बार जांच
गुणवत्ता निगरानी को मजबूत करने के लिए करीब 90 हजार रिटेल आउटलेट्स के भूमिगत टैंकों की पानी घुसने की जांच दिन में 8 से 12 बार की जा रही है। वहीं, करीब 85 हजार से ज्यादा आउटलेट्स पर निगरानी प्रोब लगाए गए हैं और खराब सेंसरों को प्राथमिकता से ठीक किया जा रहा है।
सरकारी तेल कंपनियों की पहले की राष्ट्रव्यापी जांच में भी लगभग 90,000 स्टेशनों के भूमिगत टैंकों में पानी घुसने का कोई व्यापक प्रमाण नहीं मिला था। रिटेल स्तर पर जांचे गए नमूनों में भी क्लोराइड सामान्य सीमा में पाया गया।
गाड़ी चलाने वालों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?
अगर आपकी गाड़ी में अचानक झटके आने लगे, इंजन की आवाज बदल जाए, स्टार्ट होने में दिक्कत आए या माइलेज में असामान्य गिरावट दिखे तो इसे केवल E20 का असर मानकर नजरअंदाज न करें। खराब ईंधन के अलावा वाहन की उम्र, रखरखाव, ड्राइविंग पैटर्न और ट्रैफिक जैसी कई वजहें भी प्रदर्शन प्रभावित कर सकती हैं। सरकार ने गुणवत्ता जांच जरूर कड़ी की है, लेकिन इस उपलब्ध राष्ट्रव्यापी परीक्षणों में बड़े पैमाने पर दूषित E20 पेट्रोल की पुष्टि नहीं हुई है। 2,573 पंपों पर कार्रवाई मुख्य रूप से गुणवत्ता नियंत्रण और अनुपालन सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया कदम है।


