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Elon Musk-Cursor Deal 2026: AI स्टार्टअप ने बनाया अरबपति, SpaceX की मेगा डील से अमन-आसिफ की दौलत में बंपर उछाल
Elon Musk-Cursor Deal 2026: MIT के दो दोस्तों को AI स्टार्टअप ने बनाया अरबपति, 60 अरब डॉलर की डील से बदली किस्मत
Elon Musk-Cursor Deal 2026
Elon Musk-Cursor Deal 2026: टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक ऐतिहासिक बिजनेस डील ने दो युवा इंजीनियरों को रातों-रात अरबपतियों की सूची में पहुंचा दिया है। दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी एलन मस्क की कंपनी SpaceX ने एआई कोडिंग प्लेटफॉर्म कर्सर की पेरेंट कंपनी ऐनीस्फीयर को 60 अरब डॉलर में खरीदने का फैसला किया है। इस डील के बाद भारतीय मूल के अमन सांगर और पाकिस्तान के सुअलेह आसिफ की संपत्ति अरबों डॉलर तक पहुंच गई है। खास बात यह है कि दोनों की मुलाकात अमेरिका के MIT में पढ़ाई के दौरान हुई थी और वहीं इन दोनों ने एक ऐसे स्टार्टअप की नींव रखी, जिसने आज वैश्विक टेक इंडस्ट्री का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
60 अरब डॉलर की डील ने बनाई नई अरबपति जोड़ी
टेक सेक्टर में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा SpaceX और ऐनीस्फीयर के बीच हुई 60 अरब डॉलर की डील की है। ऐनीस्फीयर वही कंपनी है जिसने AI आधारित कोडिंग टूल कर्सर विकसित किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी में अमन सांगर और सुअलेह आसिफ दोनों की करीब 4.5-4.5 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। डील पूरी होने के बाद दोनों को लगभग 2.7 अरब डॉलर की संपत्ति हासिल हुई है। भारतीय मुद्रा में यह राशि करीब 22,700 करोड़ रुपये बैठती है। इसमें सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह 'ऑल-स्टॉक डील' है, यानी उन्हें नकद राशि नहीं बल्कि SpaceX के शेयर मिले हैं। इसी वजह से दोनों युवा उद्यमी दुनिया के सबसे चर्चित नए अरबपतियों में शामिल हो गए हैं।
भारतीय मिट्टी से जुड़े हैं अमन सांगर
अमन सांगर का भारत से गहरा संबंध है। उनके पिता अरविंद सांगर देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान IIT बॉम्बे के पूर्व छात्र रह चुके हैं। उनकी माता शिल्पा सांगर एक ऑर्थोडॉन्टिस्ट हैं और सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहती हैं। न्यूयॉर्क में जन्मे अमन ने कम उम्र में ही तकनीक की दुनिया में रुचि दिखानी शुरू कर दी थी। बताया जाता है कि उन्होंने सिर्फ 14 वर्ष की उम्र में कोडिंग सीखनी शुरू कर दी थी। बाद में उन्होंने दुनिया की प्रतिष्ठित एमआईटी यानी मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान (MIT) में दाखिला लिया। जहां उनकी मुलाकात सुअलेह आसिफ से हुई। यही मुलाकात आगे चलकर एक सफल स्टार्टअप और अरबों डॉलर की कंपनी में बदल गई।
कराची से MIT तक, आसिफ का सफलता भरा सफर
सुअलेह आसिफ पाकिस्तान के कराची शहर से आते हैं। उन्हें गणित का जीनियस माना जाता है। उन्होंने लगातार तीन वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय गणित ओलंपियाड (IMO) में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व किया और कांस्य पदक भी हासिल किया। अपनी प्रतिभा के दम पर उन्हें MIT में छात्रवृत्ति मिली। यहीं उनकी दोस्ती अमन सांगर से हुई। दोनों ने तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में नई संभावनाएं तलाशनी शुरू कीं। बाद में यही साझेदारी Cursor के विकास की वजह बनी और आज दोनों वैश्विक टेक इंडस्ट्री के बड़े नाम बन चुके हैं।
आखिर क्या है Cursor, जिसे खरीदने के लिए मस्क ने लगाया इतना बड़ा दांव?
कर्सर एक AI आधारित कोडिंग प्लेटफॉर्म है, जिसे डेवलपर्स के काम को आसान और तेज बनाने के लिए तैयार किया गया है। यह प्लेटफॉर्म आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से कोड लिखने, सुधारने और प्रोजेक्ट विकसित करने में सहायता करता है। हाल के वर्षों में वाइब कोडिंग का चलन तेजी से बढ़ा है। इसमें डेवलपर अपनी जरूरत या आइडिया को सामान्य भाषा में बताते हैं और AI उसके अनुसार कोड तैयार करने में मदद करता है। Cursor इसी क्षेत्र का प्रमुख प्लेटफॉर्म बनकर उभरा है। दुनिया भर में लाखों डेवलपर्स इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। एनवीडिया, एडोबी और ऊबर जैसी बड़ी कंपनियां भी इस तकनीक का उपयोग कर चुकी हैं। यही वजह है कि Cursor को AI सॉफ्टवेयर उद्योग का सबसे तेजी से बढ़ने वाला प्लेटफॉर्म माना जा रहा है।
कैसे बढ़ी कंपनी की वैल्यू?
पिछले वर्ष नवंबर तक ऐनीस्फीयर की वैल्यू करीब 29.5 अरब डॉलर आंकी गई थी। लेकिन AI सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और कर्सर की लोकप्रियता ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया।
एलन मस्क की SpaceX द्वारा अधिग्रहण की खबर सामने आने के बाद कंपनी का मूल्यांकन लगभग दोगुना होकर 60 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में AI आधारित सॉफ्टवेयर और कोडिंग टूल्स टेक इंडस्ट्री की दिशा तय करने वाले हैं।


