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EPF पर आज बड़ा फैसला! बढ़ सकती है वेतन सीमा, मोदी कैबिनेट की बैठक पर सबकी नजर
Modi Cabinet Decision: रिपोर्टों के अनुसार, सरकार ईपीएफ की अनिवार्य वेतन सीमा (EPF Wage Ceiling) को मौजूदा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने के प्रस्ताव पर निर्णय ले सकती है।
Modi Cabinet Decision
Modi Cabinet Decision: राजधानी दिल्ली में आज होने वाली मोदी कैबिनेट (Modi Cabinet) की बैठक सैलरीड क्लास (Salaried Class) के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर चर्चा और मंजूरी की पूरी संभावना बनी हुई है। इनमें कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (Employees’ Provident Fund Organisation) यानी EPFO से जुड़ा प्रस्ताव भी शामिल है।
रिपोर्टों के अनुसार, सरकार ईपीएफ की अनिवार्य वेतन सीमा (EPF Wage Ceiling) को मौजूदा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने के प्रस्ताव पर निर्णय ले सकती है।
EPF नियमों में हो सकता है बड़ा परिवर्तन
मौजूदा व्यवस्था में 15,000 रुपये की वेतन सीमा ईपीएफ कवरेज (EPF Coverage) के लिए बेहद अहम आधार है। साल 2026 मई में केंद्र सरकार ने सोशल सिक्योरिटी कोड (Code on Social Security) के अंतर्गत ईपीएफ से जुड़े प्रावधानों के लिए 15,000 रुपये मासिक वेतन सीमा अधिसूचित की थी।
अब रिपोर्टों के मुताबिक, इस सीमा को बढ़ाकर 25,000 रुपये करने का प्रस्ताव कैबिनेट के सामने रखा जा सकता है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो 15,000 से 25,000 रुपये के बीच बेसिक सैलरी पाने वाले कर्मचारियों का दायरा अनिवार्य ईपीएफ और ईपीएस (EPF and EPS) कवरेज में बढ़ सकता है।
वेतन सीमा बढ़ने से कर्मचारियों पर क्या प्रभाव होगा?
ईपीएफ वेतन सीमा (EPF Salary Limit) 25,000 रुपये होने की स्थिति में उन कर्मचारियों को भी अनिवार्य पीएफ कवरेज का फायदा मिल सकता है, जो अभी 15,000 रुपये की सीमा से ऊपर होने के कारण इसके अनिवार्य दायरे में नहीं आते। इसका मकसद संगठित क्षेत्र (Organised Sector) में सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाना बताया जा रहा है।
पीएफ में योगदान बढ़ने से कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट फंड (Retirement Fund) तैयार करने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, कर्मचारी की सैलरी से पीएफ योगदान कटने के कारण उसकी इन-हैंड सैलरी (In-Hand Salary) पर भी असर पड़ सकता है।
डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड के लिए नए पदों पर भी निर्णय
कैबिनेट बैठक में डिजिटल सुरक्षा (Digital Security) से जुड़ा प्रस्ताव भी सामने आ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड (Data Protection Board) के गठन के लिए नए पदों के सृजन को मंजूरी देने पर भी विचार किया जा सकता है। इसका मकसद देश में डिजिटल डेटा (Digital Data) की सुरक्षा से जुड़े कार्य को आगे बढ़ाना है।
रूस के साथ क्रिटिकल मिनरल्स पर समझौता
बैठक के एजेंडे में अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़ा प्रस्ताव भी बताया जा रहा है। भारत और रूस (India-Russia) के बीच क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals) के क्षेत्र में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन यानी MoU को मंजूरी दिए जाने की संभावना है। क्रिटिकल मिनरल्स का प्रयोग आधुनिक तकनीक, बैटरी निर्माण और रक्षा क्षेत्र समेत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में होता है।
ऐसे में रूस के साथ सहयोग से महत्वपूर्ण खनिजों (Important Minerals) की सप्लाई चेन (Supply Chain) से जुड़ी कोशिशों को बढ़ावा मिलने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन प्रस्तावों पर आखिरी निर्णय कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा।


