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19 साल से वीरान पड़ी थी चीनी मिल, अब यहां बनेगा करोड़ों लीटर एथेनॉल, सरकार ने दी मंजूरी
Ethanol Plant Mathura: छाता की 19 साल से बंद चीनी मिल में ₹200 करोड़ से ज्यादा की लागत से एथेनॉल प्लांट लगेगा। गन्ने, मक्का और धान से उत्पादन होगा।
Ethanol Plant Mathura: Closed Sugar Mill to Produce 3.96 Crore Litres of Ethanol
Ethanol Plant Mathura: मथुरा के छाता में करीब 19 साल से बंद पड़ी चीनी मिल अब एक बार फिर औद्योगिक गतिविधियों का केंद्र बनने जा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस बंद मिल परिसर में एथेनॉल प्लांट लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। खास बात यह है कि इस प्लांट में केवल गन्ने से ही एथेनॉल नहीं बनाया जाएगा, बल्कि गन्ने का सीजन खत्म होने के बाद मक्का और धान का भी इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार के मुताबिक, प्रस्तावित प्लांट में हर साल करीब 3.96 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन किया जा सकेगा।
कैबिनेट ने दी एथेनॉल प्लांट को मंजूरी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में छाता की बंद चीनी मिल में एथेनॉल प्लांट स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। बैठक में कुल 23 प्रस्तावों पर फैसला लिया गया। कैबिनेट के फैसले के बाद अब लंबे समय से बंद पड़े मिल परिसर को नए औद्योगिक इस्तेमाल में लाने का रास्ता साफ हो गया है।
गन्ना विकास एवं चीनी मिल मामलों के मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने बताया कि छाता की चीनी मिल करीब 19 साल पहले बंद हो गई थी। अब इसी परिसर में एथेनॉल उत्पादन की नई परियोजना विकसित करने की योजना है।
गन्ने के बाद मक्का और धान से बनेगा एथेनॉल
इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि प्लांट को केवल गन्ने पर निर्भर नहीं रखा जाएगा। गन्ने की उपलब्धता के दौरान उससे एथेनॉल बनाया जाएगा। जब गन्ने का सीजन खत्म हो जाएगा, तब मक्का और धान को कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। इससे साल के ज्यादा समय तक प्लांट को चलाने में मदद मिलेगी।
सरकार की योजना के मुताबिक यह प्लांट साल में करीब 11 महीने संचालित होगा और इस दौरान लगभग 3.96 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन किया जाएगा। इस तरह अलग-अलग कृषि फसलों को एथेनॉल उत्पादन से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
200 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होने का अनुमान
प्रस्तावित एथेनॉल प्लांट को तैयार करने में 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत आने का अनुमान है। परियोजना के लिए छाता में करीब 96 एकड़ जमीन उपलब्ध है। इसी परिसर में एथेनॉल प्लांट के अलावा गोदाम और दूसरी जरूरी सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
सरकार का कहना है कि इतनी बड़ी परियोजना आने से आसपास के क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं। प्लांट के संचालन, परिवहन, भंडारण और कृषि उपज की सप्लाई से जुड़े कामों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। हालांकि अभी रोजगार की सटीक संख्या सामने नहीं आई है।
नोएडा एयरपोर्ट की नजदीकी से बढ़ेंगी संभावनाएं
छाता की भौगोलिक स्थिति को भी इस परियोजना के लिए अहम माना जा रहा है। यह क्षेत्र राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा हुआ है। मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण के मुताबिक, छाता से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के कार्गो टर्मिनल तक की दूरी करीब 40 मिनट की है। ऐसे में भविष्य में एथेनॉल के साथ भंडारण और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी गतिविधियों के लिए भी यहां संभावनाएं बन सकती हैं।
परियोजना के तहत गोदाम और अन्य परिसर विकसित करने की योजना भी इसी वजह से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बेहतर सड़क संपर्क से कच्चे माल को प्लांट तक पहुंचाने और तैयार उत्पाद को दूसरे क्षेत्रों तक भेजने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण है परियोजना
छाता क्षेत्र में एथेनॉल प्लांट लगाने का एक बड़ा कारण गन्ने की उपलब्धता से भी जुड़ा है। मंत्री के मुताबिक, मौजूदा समय में चीनी मिल को पुराने तरीके से चलाने के लिए जितनी बड़ी मात्रा में गन्ने की जरूरत होगी, उतना गन्ना उपलब्ध नहीं है। एक चीनी मिल को सुचारू रूप से चलाने के लिए करीब 45 से 50 लाख क्विंटल गन्ने की जरूरत बताई गई है।
ऐसे में सरकार ने एथेनॉल उत्पादन का रास्ता चुना है। गन्ने की उपलब्धता के दौरान किसानों से गन्ना खरीदा जाएगा और बाद में मक्का व धान से उत्पादन जारी रखा जाएगा। मंत्री के अनुसार, पिछले दो वर्षों से किसानों के लिए क्षेत्र में तीन गन्ना खरीद केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं।
बंद मिल को फिर से इस्तेमाल में लाने की तैयारी
करीब दो दशक से बंद पड़ी चीनी मिल का परिसर अब नई परियोजना के जरिए इस्तेमाल में आएगा। सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि भविष्य में यदि क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में गन्ना उपलब्ध होता है तो चीनी मिल को दोबारा चलाने की संभावनाओं पर भी विचार किया जा सकता है। शुरुआती दौर में प्राथमिकता एथेनॉल उत्पादन शुरू करने की है। इससे बंद पड़े औद्योगिक ढांचे का इस्तेमाल होगा और कृषि आधारित उद्योग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
इसी साल हो सकता है शिलान्यास
गन्ना विकास एवं चीनी मिल मामलों के मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने कहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसी साल प्रस्तावित एथेनॉल प्लांट का शिलान्यास कर सकते हैं। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब परियोजना को जमीन पर उतारने से जुड़े अगले चरणों पर काम किया जाएगा। एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने की दिशा में यह परियोजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसे में मथुरा के छाता में बनने वाला यह प्लांट गन्ने के साथ मक्का और धान जैसी फसलों को भी जैव ईंधन उत्पादन से जोड़ सकता है।
मिल के बंद होने के कारणों को लेकर मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार पर भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि 2002 से 2007 के बीच किसानों को गन्ने का भुगतान नहीं किया गया और लंबे समय तक भुगतान नहीं होने के कारण मिल बंद हो गई।
अब सरकार का फोकस बंद पड़ी मिल को पुराने स्वरूप में शुरू करने के बजाय उसी परिसर में एथेनॉल उत्पादन की नई व्यवस्था खड़ी करने पर है। इस योजना के आरंभ होने के साथ छाता में लंबे समय से बंद औद्योगिक परिसर में फिर से उत्पादन शुरू होने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार की गतिविधियां भी बढ़ सकती हैं।


