FSSAI के रडार पर खाने-पीने की चीजें! डाबर, ओल्ड मॉन्क के बाद अब किसकी बारी?

FSSAI Action: अब FSSAI सिर्फ खाने की गुणवत्ता की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि गलत दावे, भ्रामक लेबल, साफ-सफाई में लापरवाही और उत्पादन से जुड़े नियमों का पालन नहीं करने वाली कंपनियों पर भी सख्त कदम उठा रहा है।

Priya Singh Bisen
Published on: 5 Aug 2026 8:44 PM IST
FSSAI Action
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FSSAI Action: भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) इन दिनों लगातार एक्शन मोड में नजर आ रहा है। साल 2026 में FSSAI ने खाने-पीने की चीजें बनाने वाली कंपनियों से लेकर ड्रिंक कंपनियों तक पर सख्ती बढ़ा दी है। लगातार छापेमारी, जांच और कार्रवाई के चलते अब बड़ी कंपनियों के साथ-साथ छोटे कारोबारी भी सतर्क हो गए हैं।

अब FSSAI सिर्फ खाने की गुणवत्ता की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि गलत दावे, भ्रामक लेबल, साफ-सफाई में लापरवाही और उत्पादन से जुड़े नियमों का पालन नहीं करने वाली कंपनियों पर भी सख्त कदम उठा रहा है।

लगातार बढ़ रही है FSSAI की सख्ती

पिछले कुछ दिनों में FSSAI ने कई बड़े ब्रांड्स के खिलाफ कार्रवाई की है। इन कार्रवाइयों के बाद फूड इंडस्ट्री में हलचल मच गई है और कारोबारी भी नियमों को लेकर ज्यादा सतर्क हो गए हैं। हाल ही में डाबर इंडिया (Dabur India) पर कार्रवाई की गई। इसके बाद लंबे समय से लोकप्रिय शराब ब्रांड ओल्ड मॉन्क (Old Monk) पर भी भारत में प्रतिबंध लगाए जाने की कार्रवाई की गई।

लगातार हो रही इन कार्रवाइयों के बाद लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर FSSAI इतनी सख्ती क्यों कर रहा है।

ग्राहकों को गुमराह होने से बचाना है मुख्य उद्देश्य

FSSAI का कहना है कि उसकी इस सख्ती का सबसे बड़ा उद्देश्य ग्राहकों को गलत जानकारी से बचाना और खाद्य सुरक्षा के नियमों का सख्ती से पालन करवाना है। प्राधिकरण के अनुसार किसी भी खाद्य उत्पाद के लेबल, नाम या विज्ञापन में ऐसी जानकारी नहीं होनी चाहिए जिससे उपभोक्ता को उसकी गुणवत्ता, सामग्री, शुद्धता या स्वास्थ्य लाभ को लेकर गलत धारणा बने।

इसके साथ ही FSSAI ने साफ किया है कि यदि कोई कंपनी अपने उत्पाद को लेकर कोई बड़ा दावा करती है तो उसके पीछे वैज्ञानिक प्रमाण होना भी जरूरी है। मई महीने में प्राधिकरण ने कंपनियों से कहा था कि वे अपने उत्पादों पर 100 प्रतिशत प्योर (100% Pure), 100 प्रतिशत नेचुरल (100% Natural) और 100 प्रतिशत ऑर्गेनिक (100% Organic) जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने से बचें, क्योंकि ऐसे दावे ग्राहकों को भ्रमित कर सकते हैं।

अब सिर्फ मिलावट नहीं, हर स्तर पर होगी जांच

साल 2026 में FSSAI का फोकस केवल मिलावटी खाद्य पदार्थ पकड़ने तक सीमित नहीं है। अब विभाग लेबलिंग, विज्ञापन, मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया, साफ-सफाई और ग्राहकों की शिकायतों सहित हर स्तर पर खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रहा है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में बिकने वाला हर खाद्य उत्पाद तय मानकों के अनुरूप हो और उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिले।

डाबर इंडिया पर हुई बड़ी कार्रवाई

अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई डाबर इंडिया (Dabur India) के खिलाफ की गई है। FSSAI ने कंपनी के शहद, देसी घी, एप्पल साइडर विनेगर, वर्जिन कोकोनट ऑयल, तिल का तेल, नारियल पानी और नारियल दूध जैसे कई उत्पादों पर 100 प्रतिशत नेचुरल (100% Natural), 100 प्रतिशत प्योर (100% Pure) और 100 प्रतिशत ऑर्गेनिक (100% Organic) जैसे दावे करने पर रोक लगा दी है। प्राधिकरण का कहना है कि ऐसे दावों को वैज्ञानिक रूप से साबित करना आसान नहीं होता और इससे ग्राहक भ्रमित हो सकते हैं।

नकली घी, तेल और पनीर पर भी कसा शिकंजा

FSSAI ने जून महीने में नकली घी बनाने और बेचने वाले एक अंतरराज्यीय नेटवर्क का भी भंडाफोड़ किया था। दिल्ली और हरियाणा में हुई संयुक्त कार्रवाई के दौरान 6,500 लीटर से ज्यादा संदिग्ध मिलावटी घी जब्त किया गया। इसके अलावा महाराष्ट्र में हुई कार्रवाई के दौरान एनालॉग पनीर (Analog Paneer) पर प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि, यह प्रतिबंध पूरी तरह पनीर पर नहीं बल्कि केवल एनालॉग पनीर पर लागू किया गया है।

इसी तरह पिछले कुछ समय से बेंगलुरु में पुराने तेल का इस्तेमाल करने वालों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है। FSSAI ने साफ संदेश दिया है कि जनता के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खाद्य सुरक्षा के नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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Priya Singh Bisen is a journalist with over five years of experience in the news and digital media industry. She covers a wide range of topics, including weather, lifestyle, health, politics, and international affairs. In addition to news writing, Priya has experience in news script writing, voice-overs, anchoring, field reporting, and social media management. She holds a Bachelor's degree in Mass Communication and a Master's degree in Advertising and Public Relations. Priya also enjoys writing, traveling, and playing sports, pursuits that reflect her curiosity and passion for exploring new perspectives.

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