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Gen Z का दम और 'नारी शक्ति' का परचम: भारतीय शेयर बाजार में 59% नए निवेशक युवा, तो 117 महिलाओं के पास फिनलैंड की GDP से बड़ी संपत्ति
Gen Z Investors: भारत में Gen Z निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और भारतीय महिलाओं की आर्थिक सफलता नई तस्वीर पेश कर रही है। NSE रिपोर्ट और 'हुरुन इंडिया वुमन लीडर्स लिस्ट 2026' के आंकड़े देश के बदलते वित्तीय परिदृश्य को दर्शाते हैं।
Stock Market
Gen Z Investors: भारतीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय परिदृश्य में एक बड़ा ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां देश का युवा (Gen Z) अब पारंपरिक बचत के बजाय शेयर बाजार में उतरकर संपत्ति बनाने की राह पर है, वहीं दूसरी तरफ देश की महिलाएं न केवल निवेशकों के रूप में बाजार को संभाल रही हैं, बल्कि वे खुद उद्योग और नेतृत्व के शिखर पर पहुँचकर खरबों की संपत्ति की मालकिन बन रही हैं। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की नवीनतम 'मार्केट पल्स' रिपोर्ट और 'कैंडेरे हुरुन इंडिया वुमन लीडर्स लिस्ट 2026' के आंकड़े भारत के इस आर्थिक परिवर्तन की नई कहानी बयां कर रहे हैं।
शेयर बाजार में 'जेन जी' का दबदबा: नए निवेशकों में 59% युवा
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार में युवाओं की भागीदारी अभूतपूर्व तेजी से बढ़ी है:
नए निवेशकों में युवाओं का राज: इस साल अप्रैल से जून के बीच शेयर बाजार में कदम रखने वाले नए निवेशकों में 59 फीसदी हिस्सेदारी 'जेन जी' (Gen Z - युवा पीढ़ी) की रही है। यह कोई क्षणिक रुझान नहीं है; मार्च 2020 से लेकर अब तक हर साल नए निवेशकों में युवाओं की हिस्सेदारी 53 से 59 प्रतिशत के बीच बनी हुई है।
13 करोड़ पार हुआ निवेशकों का आंकड़ा: मार्च 2020 में जहां देश में महज 3 करोड़ पंजीकृत निवेशक थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 13.24 करोड़ हो चुकी है। इसका सीधा मतलब यह है कि आज देश का लगभग हर 10वां नागरिक पंजीकृत निवेशक है।
कैश मार्केट पर बढ़ता भरोसा: कुल निवेशकों में 4.40 करोड़ सक्रिय निवेशक हैं। इनमें से 3.55 करोड़ लोग 'कैश मार्केट' (दीर्घकालिक निवेश) में सक्रिय हैं, जबकि केवल 85 लाख निवेशक ही 'फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस' (F&O) में कारोबार कर रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि खुदरा निवेशक अब F&O की सट्टेबाजी और त्वरित मुनाफे के बजाय लंबी अवधि के सुरक्षित निवेश पर ज्यादा भरोसा जता रहे हैं।
हर चौथा निवेशक महिला: देश के कुल पंजीकृत निवेशकों में 24.9 प्रतिशत (लगभग 25%) हिस्सेदारी महिलाओं की है। यानी आज भारत का हर चौथा निवेशक एक महिला है।
117 भारतीय महिलाओं के पास ₹39 लाख करोड़ की संपत्ति: फिनलैंड की अर्थव्यवस्था को भी पछाड़ा
शेयर बाजार के अलावा व्यावसायिक और सामाजिक नेतृत्व में भी भारतीय महिलाओं ने नए आयाम स्थापित किए हैं। 'कैंडेरे हुरुन इंडिया वुमन लीडर्स लिस्ट 2026' के अनुसार:
जीडीपी से भी भारी संपत्ति: देश की 117 सबसे प्रभावशाली महिलाओं के पास कुल 39 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है। यह आंकड़ा यूरोप के समृद्ध देश फिनलैंड की कुल जीडीपी (करीब 32 लाख करोड़ रुपये) से भी काफी बड़ा है। बीते एक साल में इन प्रभावशाली महिलाओं की संख्या में 21 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
84% सेल्फ-मेड दिग्गजों का परचम: इस सूची की सबसे गौरवशाली बात यह है कि 117 में से लगभग 84 फीसदी यानी 98 महिलाओं ने अपने दम पर (Self-made) यह मुकाम हासिल किया है। यह विरासत में संपत्ति पाने वाली महिलाओं की तुलना में 5 गुना से भी अधिक है।
19 साल की शीतल से 86 साल की रजनी तक: सूची में 12 अलग-अलग श्रेणियों को शामिल किया गया है। इसमें पैरालंपिक पदक विजेता पैरा तीरंदाज शीतल देवी (19 वर्ष) सूची में सबसे युवा प्रभावशाली महिला हैं, जबकि प्रसिद्ध उद्यमी रजनी बेक्टर (86 वर्ष) सबसे उम्रदराज महिला हैं।
वेल्थ मल्टीप्लाईर्स में रोशनी नाडर शीर्ष पर, बायोकॉन की किरण लिंक्डइन पर आगे
हुरुन की रिपोर्ट भारतीय महिला दिग्गजों की विविध क्षेत्रों में सफलता को दर्शाती है:
सबसे अमीर महिला: एचसीएलटेक (HCLTech) की रोशनी नाडर मल्होत्रा 'वेल्थ मल्टीप्लाईर्स' श्रेणी में 2.84 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ शीर्ष पर बनी हुई हैं।
डिजिटल और सोशल इन्फ्लुएंस: बायोकॉन की किरण मजूमदार शॉ के पास 10 लाख से अधिक लिंक्डइन फॉलोअर्स हैं, जो उन्हें सबसे लोकप्रिय कॉर्पोरेट लीडर बनाता है।
करियर के लिए पलायन: सूची में शामिल 33 महिलाओं ने अपने करियर को नई ऊँचाई देने के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य का रुख किया, जबकि दो महिलाओं ने विदेश जाकर सफलता का परचम लहराया।
मेट्रो शहरों का वर्चस्व: देश की 26 सबसे प्रभावशाली महिलाओं के साथ मुंबई शीर्ष शहर बना हुआ है। हालांकि पिछले साल की तुलना में मुंबई में इनकी संख्या 12 घटी है। दूसरे स्थान पर दिल्ली है, जहाँ 21 प्रभावशाली महिलाओं ने अपनी जगह बनाई है (दिल्ली में 8 की बढ़ोतरी हुई है)। तीसरे स्थान पर बेंगलुरु (16), चौथे पर गुरुग्राम (6) और पांचवें स्थान पर पुणे (5) है।
चाहे दलाल स्ट्रीट (शेयर बाजार) में निवेश की बात हो या फिर कॉर्पोरेट बोर्डरूम और स्टार्टअप्स की कमान संभालने का मामला, भारत का युवा और महिला नेतृत्व अब देश की आर्थिक नियति को नई दिशा दे रहा है। 'जेन जी' का दीर्घकालिक निवेश दृष्टिकोण और 'सेल्फ-मेड' महिलाओं का यह खरबों का साम्राज्य इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भारत का आर्थिक भविष्य सुरक्षित, समावेशी और बेहद सशक्त हाथों में है।


