Gold Monetisation Scheme: तिजोरी में रखा सोना अब कमाएगा ब्याज?

Gold Monetisation Scheme को नए तरीके से लाने की तैयारी है। जानें ज्वैलर्स के जरिए सोना जमा करने का प्रस्ताव, ब्याज, अवधि और पुराने GMS के नियम।

Jyotsana Singh
Published on: 20 Aug 2026 9:09 AM IST
Gold Monetisation Scheme: Earn Interest on Idle Gold, Know the New Plan
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Gold Monetisation Scheme: Earn Interest on Idle Gold, Know the New Plan

Gold Monetisation Scheme: घर की अलमारी में रखा सोना सिर्फ गहना या बचत नहीं बल्कि कमाई का जरिया भी बन सकता है। केंद्र सरकार गोल्ड मोनेटाईजेशन स्कीम (Gold Monetisation Scheme) को नए तरीके से लाने पर काम कर रही है। प्रस्तावित बदलाव में लोगों को बैंक जाने के बजाय अधिक आसानी से ज्वैलर्स के जरिए अपना सोना जमा करने की सुविधा मिल सकती है। घर में रखा सोना भारतीय परिवारों के लिए सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि भावनाओं और परंपरा से जुड़ी संपत्ति भी है। शादी के गहने हों, पुराने सिक्के हों या कई साल से लॉकर में रखे गोल्ड से आमतौर पर कोई नियमित कमाई नहीं होती। अब सरकार इसी ‘idle gold’ को अर्थव्यवस्था में वापस लाने की कोशिश कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्र सरकार Gold Monetisation Scheme (GMS) को नए सिरे से तैयार करने पर विचार कर रही है। इसमें ज्वैलर्स को भी महत्वपूर्ण भूमिका देने का प्रस्ताव है, ताकि लोगों के लिए सोना जमा करना पहले के मुकाबले आसान हो सके।

क्या है सरकार का नया प्लान?

प्रस्तावित व्यवस्था में ग्राहक अपने पुराने सोने को किसी अधिकृत ज्वैलर के पास जमा कर सकता है। ज्वैलर शुरुआती जांच और प्रक्रिया के बाद इसे अधिकृत रिफाइनर और बैंकिंग सिस्टम तक पहुंचाने में मदद कर सकता है। इसके बदले जमा किए गए सोने के मूल्य या निर्धारित नियमों के अनुसार ग्राहक को रिटर्न या ब्याज मिल सकता है। यही बदलाव इस योजना को पुरानी व्यवस्था से अलग बना सकता है। अभी Gold Monetisation Scheme में जमा की प्रक्रिया मुख्य रूप से बैंक और अधिकृत Collection and Purity Testing Centres के जरिए होती है। सरकार और इंडस्ट्री के बीच चल रही चर्चाओं में ज्वैलर्स को Collection Partner बनाने का विकल्प सामने आया है। कितना ब्याज मिलेगा, कितने समय के लिए सोना जमा होगा और मैच्योरिटी पर भुगतान किस रूप में होगा, इन सवालों का अंतिम जवाब नई योजना की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।

2015 में शुरू हुई थी Gold Monetisation Scheme

सरकार ने Gold Monetisation Scheme की शुरुआत 2015 में की थी। इसका मूल उद्देश्य घरों और संस्थानों के पास पड़े निष्क्रिय सोने को अर्थव्यवस्था में लाना था। सरकार चाहती थी कि यह सोना उत्पादक इस्तेमाल में आए और लंबे समय में देश की सोने के आयात पर निर्भरता कम हो। इस योजना के तहत लोगों को अपना सोना अधिकृत केंद्र पर जमा करना होता था। सोने की शुद्धता की जांच के बाद उसे पिघलाकर मानक रूप में बदला जाता था और उसके आधार पर गोल्ड डिपॉजिट बनाया जाता था।

पुराने GMS में कितना ब्याज मिलता था?

यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है। पुरानी Gold Monetisation Scheme में अलग-अलग अवधि के लिए अलग नियम थे। RBI के मार्च 2025 तक अपडेट किए गए नियमों के मुताबिक Short Term Bank Deposit यानी STBD की अवधि 1 से 3 साल थी और इसकी ब्याज दर बैंक तय करते थे। वहीं Medium Term Government Deposit में 5 से 7 साल की अवधि पर 2.25% सालाना और Long Term Government Deposit में 12 से 15 साल की अवधि पर 2.50% सालाना ब्याज था। लेकिन सरकार ने 26 मार्च 2025 से Medium और Long Term Government Deposit को बंद कर दिया। अब नए प्रस्तावित बदलावों को इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है।

पुरानी योजना क्यों नहीं चली?

Gold Monetisation Scheme का सबसे बड़ा मकसद तो बड़ा था, लेकिन लोगों ने इसमें अपेक्षित रुचि नहीं दिखाई। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक मार्च 2025 तक करीब 38 टन सोना ही इस योजना के तहत जमा हो पाया था। इसकी तुलना भारत के घरों में मौजूद अनुमानित हजारों टन सोने से करें तो यह मात्रा काफी कम है।

इसकी कई वजहें बताई गईं। सबसे बड़ी समस्या यह थी कि भारतीय परिवार पुराने गहनों को आसानी से पिघलवाना नहीं चाहते। कई गहनों की कीमत सिर्फ सोने के वजन से नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी पारिवारिक और भावनात्मक यादों से भी होती है। इसके अलावा बैंक तक पहुंचना, शुद्धता जांच की प्रक्रिया और योजना के बारे में कम जानकारी भी लोगों के लिए बाधा बनी। ज्वैलर्स को योजना में सक्रिय रूप से शामिल करने का विचार इसी परेशानी को दूर करने की कोशिश माना जा रहा है।

सरकार क्यों ला रही है बदलाव?

भारत दुनिया के बड़े सोना आयातकों में शामिल है। देश में बड़ी मात्रा में सोना घरों और संस्थानों के पास रखा हुआ है। सरकार का मानना है कि यदि इस सोने का छोटा हिस्सा भी औपचारिक अर्थव्यवस्था में वापस आता है तो घरेलू सोने की उपलब्धता बढ़ सकती है और आयात पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। इसी वजह से सरकार, बैंकिंग सेक्टर और गोल्ड इंडस्ट्री के बीच नई व्यवस्था को लेकर बातचीत चल रही है। रिपोर्टों में करीब 30,000 टन घरेलू सोने के अनुमान का भी उल्लेख किया गया है, हालांकि यह कोई आधिकारिक तौर पर सत्यापित जमा राशि नहीं है।

आपके लिए इसका क्या मतलब है?

अगर नई व्यवस्था मंजूर होती है तो उन लोगों के लिए यह दिलचस्प विकल्प बन सकती है जिनके पास ऐसा सोना पड़ा है जिसे वे लंबे समय से इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। सामान्य FD में पैसा बैंक में जमा होता है, जबकि प्रस्तावित Gold Monetisation मॉडल में भौतिक सोने को वित्तीय संपत्ति की तरह इस्तेमाल करने का रास्ता मिल सकता है।

लेकिन इसमें एक महत्वपूर्ण जोखिम और भावनात्मक पहलू भी है। गहना जमा करने के बाद उसकी मूल शक्ल बरकरार रहना जरूरी नहीं है, क्योंकि मौजूदा GMS प्रक्रिया में सोने की शुद्धता जांच के बाद उसे पिघलाकर मानक गोल्ड में बदला जाता है। इसलिए पारिवारिक या विरासत में मिले गहनों को सिर्फ ब्याज कमाने के लिए जमा करने से पहले नियमों को अच्छी तरह समझना जरूरी है।

आधिकारिक घोषणा के बाद ही अंतिम फैसला

नई Gold Monetisation Scheme को लेकर सरकार और इंडस्ट्री के बीच चर्चा जरूर चल रही है, लेकिन अगस्त 2026 तक इसके अंतिम नियम, ब्याज दर, अवधि और ज्वैलर्स की भूमिका को लेकर आधिकारिक अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है। इसलिए सोशल मीडिया या अनधिकृत ज्वैलर्स के दावों पर भरोसा करके सोना जमा करना सही नहीं होगा। नई योजना लागू होने पर सबसे अहम चीज होगी ज्वैलर की सरकारी मान्यता, सोने की शुद्धता की जांच, जमा की रसीद, ब्याज की दर, लॉक-इन अवधि और मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम या सोना। इन सभी शर्तों को पढ़ने के बाद ही निवेश का फैसला करना बेहतर होगा।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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