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Gold Price Prediction: सोना बनेगा ‘सुपर गोल्ड’? 2 लाख के पार जा सकता है भाव, एक्सपर्ट ने की भविष्यवाणी
Gold Price Prediction 2026: क्या सोना 2 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है? जानिए एक्सपर्ट की भविष्यवाणी, गोल्ड प्राइस बढ़ने की वजहें और निवेशकों के लिए क्या है संकेत।
Gold Price Prediction 2026
Gold Price Prediction 2026: भारतीय परिवारों में मुश्किल समय हो या खुशियों का मौका, गोल्ड हमेशा से ही जरूरत पर खरा उतरा है। क्योंकि सोना इनके लिए सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि भरोसे, सुरक्षा और भावनाओं का प्रतीक माना जाता है। अब एक बार फिर सोने को लेकर ऐसी भविष्यवाणी सामने आई है जिसने निवेशकों के साथ-साथ आम लोगों का ध्यान भी खींच लिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार के बड़े कमोडिटी एक्सपर्ट ओले हेनसेन का कहना है कि अगले 12 महीनों में गोल्ड 6000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। अगर ऐसा होता है तो भारत में सोने का भाव करीब 2.12 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है। यानी मौजूदा स्तर से लगभग 53 हजार रुपये की और बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी का नया अनुमान
कमोडिटी मार्केट के जानकार और सेक्सो बैंक (Saxo Bank) में कमोडिटी स्ट्रैटजी हेड ओले हेनसेन का मानना है कि दुनिया की मौजूदा आर्थिक परिस्थितियां सोने को नई रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंचा सकती हैं। फिलहाल इंटरनेशनल मार्केट में गोल्ड लगभग 4490 डॉलर प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रहा है। वहीं भारतीय बाजार में सोने का भाव करीब 1.59 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच चुका है।
अगर गोल्ड 6000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचता है तो इसमें करीब 33.6 प्रतिशत की तेजी आएगी। यही तेजी भारतीय बाजार में भी दिखाई दे सकती है और सोना 2 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से ऊपर निकल सकता है।
भारत में क्यों तेजी से बढ़ रही हैं सोने की कीमतें
भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड उपभोक्ता देशों में शामिल है। यहां सोना सिर्फ निवेश नहीं बल्कि परंपरा और सामाजिक प्रतिष्ठा का हिस्सा भी माना जाता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में थोड़ी सी हलचल भी भारतीय बाजार पर बड़ा असर डालती है। भारतीय बाजार में सोने की कीमत कई फैक्टर्स से तय होती है। इसमें अंतरराष्ट्रीय गोल्ड प्राइस के अलावा डॉलर-रुपया एक्सचेंज रेट, आयात शुल्क, GST और घरेलू मांग की बड़ी भूमिका रहती है। अगर रुपया कमजोर होता है तो भारत में सोना और महंगा हो जाता है। शादी-ब्याह और त्योहारों के मौसम में बढ़ती खरीदारी भी कीमतों को ऊपर ले जाती है। यही कारण है कि लगातार ऊंचे दाम होने के बावजूद सोने की मांग पूरी तरह कम नहीं हो रही।
डी-ग्लोबलाइजेशन से बढ़ रही गोल्ड की चमक
कोरोना महामारी और कई देशों के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव ने दुनिया को यह एहसास कराया कि किसी एक देश पर ज्यादा निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। अब देश अपनी सप्लाई चेन को मजबूत और स्थानीय बनाने पर जोर दे रहे हैं। इस बदलाव से वैश्विक व्यापार व्यवस्था में अस्थिरता बढ़ी है। निवेशकों को भविष्य को लेकर चिंता बनी हुई है और ऐसे माहौल में लोग सुरक्षित निवेश की तरफ रुख कर रहे हैं। सोना लंबे समय से सबसे सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है, इसलिए इसकी मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।
डॉलर पर निर्भरता कम होने का फायदा
दुनिया के कई देश अब अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं। चीन, रूस और अन्य देशों के केंद्रीय बैंक बड़ी मात्रा में गोल्ड खरीद रहे हैं।
जब सेंट्रल बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाते हैं तो बाजार में इसकी मांग तेजी से बढ़ती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह ट्रेंड और मजबूत हो सकता है, जिससे गोल्ड की कीमतों को लगातार सपोर्ट मिलता रहेगा।
बढ़ता सरकारी कर्ज निवेशकों की चिंता बढ़ा रहा
अमेरिका समेत दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर सरकारी कर्ज तेजी से बढ़ रहा है। निवेशकों को डर है कि भविष्य में इससे आर्थिक दबाव और करेंसी कमजोर होने का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे समय में लोग अपने निवेश को सुरक्षित रखने के लिए गोल्ड खरीदना ज्यादा पसंद करते हैं। सोने को सेफ हेवन एसेट माना जाता है। यानी ऐसा निवेश जो संकट के दौर में भी अपनी वैल्यू बनाए रखता है। यही वजह है कि आर्थिक अनिश्चितता बढ़ने पर गोल्ड की मांग तेजी से बढ़ जाती है।
पश्चिम एशिया तनाव भी बढ़ा रहा गोल्ड की मांग
पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। युद्ध और भू-राजनीतिक संकट के कारण निवेशकों का भरोसा शेयर बाजार जैसे जोखिम वाले निवेशों से कमजोर पड़ता है।
ऐसे माहौल में लोग अपने पैसे को सुरक्षित रखने के लिए सोने में निवेश बढ़ाते हैं। यही कारण है कि हाल के महीनों में गोल्ड ETF और फिजिकल गोल्ड की मांग तेजी से बढ़ी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो सोने की कीमतों में और बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है।
तेल की ऊंची कीमतें भी बढ़ा सकती हैं सोने की चमक
रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम एशिया संकट की वजह से तेल बाजार में भी भारी दबाव बना हुआ है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो दुनियाभर में महंगाई बढ़ सकती है। महंगाई बढ़ने पर निवेशक अपने पैसे की वैल्यू बचाने के लिए गोल्ड में निवेश बढ़ाते हैं। ओले हेनसेन का मानना है कि भविष्य में तनाव कम होने के बाद भी ब्रेंट क्रूड का नया बेस 85-95 डॉलर प्रति बैरल के बीच रह सकता है। इसका असर आने वाले समय में गोल्ड की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
क्या अभी सोना खरीदना सही फैसला है?
लगातार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहे सोने को देखकर कई लोग निवेश को लेकर असमंजस में हैं। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि शॉर्ट टर्म में कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, लेकिन लंबी अवधि में गोल्ड अभी भी मजबूत दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशकों को एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय धीरे-धीरे निवेश करना चाहिए। डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ETF और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसे विकल्प भी बेहतर माने जा रहे हैं।
इसके साथ ही निवेशकों को सिर्फ गोल्ड पर निर्भर रहने के बजाय अपने पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखना चाहिए।
भारतीय परिवारों के लिए क्यों खास है सोना
भारत में सोना सिर्फ निवेश का साधन नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं का हिस्सा है। शादी-ब्याह में सोना खरीदना शुभ माना जाता है। ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग बैंक से ज्यादा भरोसा सोने पर करते हैं।
महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता के दौर में गोल्ड लोगों को सुरक्षा का एहसास देता है। यही वजह है कि कीमतें बढ़ने के बावजूद इसकी मांग पूरी तरह खत्म नहीं होती।
आने वाले समय में क्या रह सकता है ट्रेंड
ओले हेनसेन के मुताबिक फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव जरूर रहेगा, लेकिन लंबी अवधि में गोल्ड की तेजी अभी खत्म नहीं हुई है। अगर वैश्विक तनाव, महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता बनी रहती है तो अगले 12 महीनों में सोना नई ऐतिहासिक ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।
ऐसे में भारतीय बाजार में 2 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का आंकड़ा अब सिर्फ अनुमान नहीं बल्कि संभावित हकीकत के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में निवेशकों की नजर अब अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर की चाल, तेल कीमतों और पश्चिम एशिया के हालात पर टिकी है, क्योंकि यही फैक्टर्स तय करेंगे कि सोने की रफ्तार और कितनी तेजी पकड़ेगी।


