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Gold Rate: गोल्ड की एक्सप्रेस रफ्तार, चीन का इसमें बड़ा हाथ, जानिए सब कुछ
Gold Rate: हाल के महीनों में चीन किसी भी अन्य केंद्रीय बैंक की तुलना में सबसे ज़्यादा गोल्ड खरीदने वालों में सबसे आगे रहा है। यहाँ तक कि वह दुनिया का सबसे बड़ा सोना खरीदार बनकर भारत से भी आगे निकल गया है। दिलचस्प बात यह भी है कि चीन का केंद्रीय बैंक ही नहीं बल्कि आम चीनी नागरिक भी गोल्ड में बढ़ चढ़ कर निवेश कर रहे हैं।
Gold Rate: गोल्ड लगातार बिना किसी रुकावट के नए मुकाम हासिल करता जा रहा रहा है। एक लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का ऐतिहासिक लेवल छूने के बाद अब ये 95 - 96 हजार रुपये (23 अप्रैल को) पर चल रहा है।
बहरहाल, 2025 में अब तक गोल्ड की कीमतें 26% से ज्यादा बढ़ चुकी हैं। वैसे तो किसी भी दूसरी कमोडिटी की तरह, सोने की कीमतें घटनाओं पर निर्भर करती हैं। ग्लोबल आर्थिक ग्रोथ धीमी होने पर वे बढ़ जाती हैं और जब डॉलर मजबूत होता है तो कीमतें गिर जाती हैं।लेकिन मौजूदा हालातों में गोल्ड की कीमतें सभी धारणाओं को झूठा साबित कर रही हैं और ऐसे में ये माना जा रहा है कि गोल्ड की कीमतें अब आर्थिक वजहों से नहीं, बल्कि चीनी खरीदारों और निवेशकों की हरकतों से कंट्रोल हो रही हैं।
गोल्ड में भारी निवेश
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, दुनिया भर के केंद्रीय बैंक गोल्ड में निवेश कर रहे हैं और इसके चलते आने वाले सालों में गोल्ड बूम और भी बढ़ सकता है। केंद्रीय बैंकों की खरीद कहीं ज्यादा बड़ी और हैरान करने वाली बात है चीन की जबर्दस्त खरीदारी।
चीन का गोल्ड भंडार मार्च, 2025 तक 2,292 टन था। ये भंडार दुनिया के गोल्ड भंडार का 6.5 फीसदी है। डॉलर की कमजोरी और गोल्ड की कीमतों में भारी उछाल के चलते चीन के गोल्ड भंडार का मूल्य 20 फीसदी बढ़कर 230 ट्रिलियन डॉलर हो गया है। ये भी जान लीजिए कि स्विट्जरलैंड के बाद चीन गोल्ड का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इम्पोर्टर है, और 375 टन के वार्षिक उत्पादन के साथ सोने का टॉप उत्पादक भी है। रूस 325 टन के साथ दूसरे स्थान पर है।
सबसे बड़ा खरीदार
हाल के महीनों में चीन किसी भी अन्य केंद्रीय बैंक की तुलना में सबसे ज़्यादा गोल्ड खरीदने वालों में सबसे आगे रहा है। यहाँ तक कि वह दुनिया का सबसे बड़ा सोना खरीदार बनकर भारत से भी आगे निकल गया है। दिलचस्प बात यह भी है कि चीन का केंद्रीय बैंक ही नहीं बल्कि आम चीनी नागरिक भी गोल्ड में बढ़ चढ़ कर निवेश कर रहे हैं। नए ट्रेंड का आलम ये है कि चीन की युवा पीढ़ी एक - एक ग्राम के गोल्ड के छोटे टुकड़े खूब खरीद रही है।
क्या है वजह
चाहे आम व्यक्ति खरीदे या केंद्रीय बैंक, गोल्ड खरीदने की साधारण वजह खालिस रूप से अस्थिरता के दौरान सुरक्षा का कवच बनाना होता है।
फिर भी, यह एक पहेली है कि चीन किसी भी अन्य केंद्रीय बैंक की तुलना में बहुत अधिक गोल्ड क्यों खरीद रहा है? माना ये जा रहा है कि चीन अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है और अपनी करेंसी ‘युआन’ के अंतरराष्ट्रीय उपयोग को बढ़ावा देना चाहता है। वर्तमान में, अमेरिकी डॉलर का दबदबा अमेरिका के विशाल गोल्ड भंडार के चलते ही है।
चीन की सरकार देश में आने वाले सोने को कंट्रोल करने के लिए इम्पोर्ट कोटा का उपयोग करती है। बताया जाता है कि सरकार ने गोल्ड की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बैंकों का कोटा बढ़ा दिया है।
बहरहाल, चीन की गोल्ड खरीदारी फिलवक्त थमती नहीं दिख रही है। ऐसे में गोल्ड की रफ्तार किस ऊंचाई तक पहुंचेगी, कुछ कहा नहीं जा सकता क्योंकि डॉलर की मजबूती भी हाल फिलहाल वापस होती नहीं दिखाई दे रही है।


