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GST Reform से उद्योगों को फायदा , अब पुराने पैकेज्ड प्रोडक्ट्स बिना नया दाम चिपकाए बिकेंगे
जीएसटी रिफॉर्म ने कंपनियों की बड़ी चिंता दूर कर दी है। अब पुराने स्टॉक पर नया दाम चिपकाना अनिवार्य नहीं, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी।
GST Reform: सरकार ने हाल ही में जीएसटी रिफॉर्म के तहत कंपनियों को बड़ी राहत दी है। अब यह जरूरी नहीं है कि कंपनियां अपने पुराने स्टॉक पर नया MRP स्टिकर लगाएँ। यानी, जो उत्पाद पहले से तैयार हैं, उन्हें पुराने मूल्य के साथ ही बेचा जा सकता है। इससे कंपनियों का समय और पैसा दोनों बचेगा। पुराने स्टॉक को नए स्टिकर के लिए बदलना अब जरूरी नहीं है। कंपनियां चाहें तो नया स्टिकर लगा सकती हैं, लेकिन यह अनिवार्य नहीं है। सरकार का यह कदम उद्योगों और व्यापारियों के लिए बहुत मददगार साबित होगा। साथ ही उपभोक्ताओं को भी पुराने और नए मूल्य की स्पष्ट जानकारी मिलती रहेगी। इस निर्णय से व्यापार सुचारू और आसान हो जाएगा।
बिना बदलाव पुराने स्टॉक की बिक्री संभव
पहले जब जीएसटी दरों में बदलाव होता था, तो कंपनियों को हर पुराने पैकेट पर नया MRP स्टिकर लगाना पड़ता था। इससे कंपनियों का समय और पैसा दोनों खर्च होता था। लेकिन अब सरकार ने नियम बदलकर उन्हें राहत दी है। अगर कोई उत्पाद 22 सितंबर 2025 से पहले तैयार किया गया है, तो उसे पुराने MRP के साथ ही बाजार में बेचा जा सकता है। कंपनियां चाहें तो उस पर नया स्टिकर लगा सकती हैं, लेकिन अब यह जरूरी नहीं है। सरकार के इस फैसले से कंपनियों का अतिरिक्त खर्च कम होगा और पुराना स्टॉक बिना किसी झंझट के बिक सकेगा। साथ ही उपभोक्ताओं को भी यह स्पष्ट जानकारी मिलेगी कि उत्पाद की कीमत क्या है। इस बदलाव को उद्योग जगत और व्यापारियों के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है।
मूल्य साफ और स्पष्ट होना चाहिए
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने कहा कि अगर कोई कंपनी पुराने उत्पादों पर नए स्टिकर लगाती है, तो पुरानी कीमत भी स्पष्ट रूप से लिखी होनी चाहिए। इसका उद्देश्य ग्राहक को वर्तमान और पूर्व कीमतों का पता लगाना है। इससे पूरी पारदर्शिता बनी रहेगी और ग्राहक भ्रमित नहीं होंगे।
पहले नियम था कि अगर किसी उत्पाद की कीमत बदलती है, तो कंपनियों को दो अखबारों में विज्ञापन देना जरूरी होता था। अब सरकार ने यह शर्त हटा दी है। इसके बजाय कंपनियों को केवल थोक विक्रेताओं और खुदरा दुकानदारों को नई कीमत की जानकारी देनी होगी। साथ ही यह जानकारी सरकार के संबंधित विभाग को भी भेजनी अनिवार्य होगी। इस फैसले से कंपनियों का खर्च और झंझट दोनों कम हो जाएंगे, जबकि उपभोक्ताओं को समय पर सही जानकारी मिलती रहेगी।
सरकार ने कहा है कि कंपनियां डिजिटल, प्रिंट, सोशल मीडिया जैसे सभी माध्यमों से नई कीमत की जानकारी दें। इससे डीलर, दुकानदार और उपभोक्ता सभी को समय पर सही जानकारी मिलेगी।
2026 तक पुरानी पैकिंग सामग्री का इस्तेमाल
सरकार ने कंपनियों को एक और बड़ी राहत दी है। अब वे 31 मार्च 2026 तक या फिर जब तक पुराना स्टॉक खत्म नहीं होता, पुराने पैकेजिंग का इस्तेमाल कर सकती हैं। यानी कंपनियों को तुरंत नई पैकिंग बनवाने की जरूरत नहीं है। अगर किसी उत्पाद की कीमत बदलती है, तो कंपनियां उसे स्टिकर, स्टैम्प या ऑनलाइन प्रिंटिंग के जरिए दिखा सकती हैं। हालांकि, नए मूल्य घोषित करना अब अनिवार्य नहीं है, यानी कंपनियां चाहें तो नई कीमत बताएं और चाहें तो पुराना मूल्य ही रखें। इस फैसले से कंपनियों पर पैकेजिंग का बोझ कम होगा और पुराना माल आसानी से बाजार में बिक सकेगा।
सरकार का उद्देश्य
इस फैसले का उद्देश्य है कि कंपनियों को अत्यधिक खर्च और समय की बचत हो और पुराना स्टॉक आसानी से बिक सके। साथ ही उपभोक्ता को सही और स्पष्ट जानकारी भी मिले।


