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Diesel Bulk Purchase Restriction: जमाखोरी पर लगाम या ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर आफत?
Diesel Bulk Purchase Restriction: केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल की बल्क खरीद पर 90 दिनों की रोक लगा दी है। जमाखोरी रोकने के इस फैसले से जून की भीषण गर्मी में खेती-किसानी, डेयरी उद्योग और छोटे कारखानों पर क्या असर पड़ेगा? जानिए इस जमीनी विश्लेषण में।
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Diesel Bulk Purchase Restriction: केंद्र सरकार ने आज एक आदेश के जरिये पेट्रोल-डीजल पम्पों से कंटेनर में पेट्रोल डीजल की बल्क परचेज पर 90 दिन के लिए रोक लगा दी है। जिसके ग्रामीण अर्थ व्यवस्था और छोटे व्यवसायियों पर अत्यधिक असर पड़ने की आशंका है। इससे माल ढुलाई लागत बढ़ने से कीमतों में भी वृद्धि हो सकती है। बिजली के लिए गांव की निर्भरता ज्यादातर डीजल पर है। अभी तक तो वह सस्ता डीजल खरीद रहे थे लेकिन अब उन्हें महंगा डीजल खरीदना पड़ेगा। जो कि रोजमर्रा के कार्यों को प्रभावित करेगा।
केंद्र सरकार के ये आदेश जमाखोरी रोकने के लिए बेशक जारी किये गए हों लेकिन इसका असर हमारे गांवों को बुरी तरह झकझोर सकता है। खेती किसानी के लिए संकट खड़ा हो सकता है। गांव की छोटी छोटी उद्योगिक इकाइयां भी बुरी तरह से प्रभावित होने की आशंका है।
इस समय खेतों की सिंचाई के लिए किसान नलकूप, फसल कटाई के बाद उपज की सफाई थ्रैशर और ग्रेडिंग, पशुपालक डेयरियों में मिल्किंग मशीन चलाने के लिए बिजली पर निर्भर हैं। चूंकि गांव में इन सारे कार्यों के डीजल का इस्तेमाल होता है। ऐसे में किसानो के लिए संकट खड़ा हो गया है। उनके कार्य पिछड़ सकते हैं, हालांकि सरकार ने कृषि कार्यों के लिए छूट दे रखी है लेकिन लिखा पढ़ी प्रमाणीकरण का झंझट किसान को भारी पड़ सकता है।
गौरतलब है कि जून का महीना होने के कारण और अभी तक बारिश न होने से मानसून पूर्व की खेती सूखने से बचाने के लिए नलकूप चलाने की सबसे अधिक जरूरत होती है। दूरदराज के खेतों में खड़े या रखे ट्रैक्टर, थ्रेशर, और सिंचाई के लिए नलकूप पंप चलाने के लिए किसान मजबूरी में कंटेनरों या ड्रमों में ही डीजल लाते हैं। पाबंदी से इन कृषि कार्यों के प्रभावित होने की आशंका है।
भीषण गर्मी के दौरान जब आम आदमी बेहाल है। पशु कैसे रहेंगे। शेड में उनको गर्मी से बचाने के लिए पंखे-कूलर कैसे चलेंगे, ऑटोमैटिक मशीनों से गाय-भैंसों का दूध कैसे निकलेगा ये अहम सवाल हैं। इसके अलावा खराब होने वाली सब्जियों और फलों को सड़ने से बचाने के लिए कोल्ड स्टोरेज में बिजली से चलने वाले डीजल जनरेटर का चलना भी अनिवार्य है।
रिटेल पंपों से अधिकतम 200 लीटर की सीमा ट्रैक्टर ट्रालियों को ठप कर सकती है, जिसका असर पड़ने पर महंगाई बढ़ सकती है।
कीमतों में भारी अंतर होने के कारण छोटे कारखानेवाले या वर्कशॉप की जरूरत के लिए जो अब तक रिटेल पंपों से सस्ता ईंधन ले रहे थे। अब उन्हें थोक विक्रेताओं या सीधे तेल कंपनियों से बाजार मूल्य पर ईंधन खरीदना होगा, जिससे उनकी दिकक्त बढ़ जाएगी। इसका नतीजा अवैध वसूली के रूप में भी सामने आ सकता है जोकि हमारे ग्रामीण समाज के ताने बाने को प्रभावित कर सकता है।


