भारत में 23% लोग ही नौकरीपेशा, महिलाओं की आय अब भी कम, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

India Employment Report: महिलाओं की कमाई अब भी पुरुषों से 25% कम, महंगाई ने घटाई असली आय

Jyotsana Singh
Published on: 6 Aug 2026 4:01 PM IST
India Employment Report
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India Employment Report: देश में बढ़ते कॉरपोरेट इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ नौकरीपेशा कर्मचारियों की संख्या भी धीरे-धीरे बढ़ रही है, लेकिन भारत अब भी दुनिया के कई देशों से काफी पीछे है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में केवल 23% लोग ही वेतनभोगी रोजगार से जुड़े हैं। वहीं महिलाओं की औसत मासिक आय पुरुषों की तुलना में करीब 25% कम है। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 12 वर्षों में वेतनभोगी कर्मचारियों का औसत वेतन लगभग 90% बढ़ा जरूर है, लेकिन महंगाई को समायोजित करने पर वास्तविक आय में करीब 4% की गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही अधिकांश कर्मचारियों को पीएफ, पेंशन और स्वास्थ्य बीमा जैसी बुनियादी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं।

नौकरीपेशा कर्मचारियों की आय अधिक, लेकिन महंगाई ने घटाई कमाई

डेटा फॉर इंडिया, वर्ल्ड बैंक के वर्ल्ड डेवलपमेंट इंडिकेटर्स और राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के पीएलएफएस 2023-24 के विश्लेषण के मुताबिक, वर्ष 2024 में भारत में एक वेतनभोगी कर्मचारी की औसत मासिक आय लगभग 21 हजार रुपये रही। इसके मुकाबले स्वरोजगार करने वालों की औसत मासिक आय करीब 13,200 रुपये और दिहाड़ी या अस्थायी श्रमिकों की औसत आय लगभग 9 हजार रुपये रही। 2012 से 2024 के बीच नौकरीपेशा कर्मचारियों के वेतन में करीब 90% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, लेकिन इसी अवधि में महंगाई भी तेजी से बढ़ी। महंगाई को समायोजित करने पर वास्तविक क्रय शक्ति के आधार पर कर्मचारियों की आय में लगभग 4% की कमी देखी गई। वेतन बढ़ने के बावजूद उससे खरीदी जा सकने वाली वस्तुओं और सेवाओं की क्षमता पहले की तुलना में कम हुई है।

महिलाओं और पुरुषों की आय में अब भी बड़ा अंतर

रिपोर्ट बताती है कि भारत में महिला वेतनभोगी कर्मचारियों की औसत आय पुरुष कर्मचारियों की तुलना में करीब 25% कम है। यह अंतर केवल निजी क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि कई क्षेत्रों में महिलाओं की कम भागीदारी, वेतन असमानता और नेतृत्व वाले पदों पर कम प्रतिनिधित्व भी इसकी प्रमुख वजहें मानी जाती हैं। फाइनेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि समान कार्य के लिए समान वेतन, महिलाओं की श्रम भागीदारी बढ़ाने और कौशल विकास कार्यक्रमों को मजबूत करने से इस अंतर को कम किया जा सकता है।

दुनिया के मुकाबले भारत में अब भी बहुत कम लोग नौकरीपेशा

भारत में केवल 23% लोग वेतनभोगी रोजगार में हैं, जबकि वैश्विक औसत 52% है। विकसित देशों में यह आंकड़ा और भी अधिक है। अमेरिका में 94%, जर्मनी में 91%, जापान में 89% और ब्रिटेन में 87% लोग वेतनभोगी रोजगार करते हैं। पड़ोसी चीन में यह हिस्सा 54% और बांग्लादेश में 46% है।

वित्त विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में कृषि और असंगठित क्षेत्र में बड़ी आबादी के काम करने तथा स्वरोजगार की अधिक हिस्सेदारी के कारण नियमित वेतनभोगी रोजगार का प्रतिशत अभी भी कम बना हुआ है।

पंजाब सबसे आगे, बिहार सबसे पीछे

राज्यों की तुलना करें तो पंजाब में सबसे अधिक 56% लोग वेतनभोगी रोजगार में हैं, जो राष्ट्रीय औसत से दोगुने से भी ज्यादा है। इसके बाद गुजरात और महाराष्ट्र में 31-31%, हरियाणा में 26% लोग नौकरीपेशा हैं।

दक्षिण भारत में तमिलनाडु 34% के साथ सबसे आगे है। इसके बाद कर्नाटक और केरल (26-26%), तेलंगाना (25%) तथा आंध्र प्रदेश (22%) का स्थान है।

उत्तर प्रदेश का वेतनभोगी रोजगार का हिस्सा करीब 17% है, जो राष्ट्रीय औसत 23% से कम है।

वहीं बिहार में केवल 9% लोग ही वेतनभोगी रोजगार में हैं। मध्य प्रदेश (13%), छत्तीसगढ़ (14%) और झारखंड (16%) भी राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे हैं।

शिक्षा बढ़ने के साथ नौकरी मिलने की संभावना में आई तेजी

पीएलएफएस के आंकड़े बताते हैं कि शिक्षा का रोजगार के स्वरूप पर सीधा असर पड़ता है। उच्च शिक्षित लोगों में 57% वेतनभोगी नौकरी करते हैं, जबकि अशिक्षित लोगों में यह आंकड़ा केवल 6% है।

दूसरी ओर, 12वीं तक पढ़े लोगों में स्वरोजगार करने वालों की संख्या सबसे अधिक है। इसमें छोटे दुकानदार, किसान, फ्रीलांसर और अन्य स्व-रोजगार करने वाले लोग शामिल हैं। अशिक्षित लोगों में बड़ी संख्या असंगठित और कम आय वाले कार्यों में लगी हुई है।

किन पेशों में सबसे ज्यादा वेतनभोगी कर्मचारी

देश में वेतनभोगी कर्मचारियों के शीर्ष व्यवसायों में सबसे अधिक हिस्सेदारी दुकान सहायक (7.1%) की है। इसके बाद घरेलू नौकर (6%), मैन्युफैक्चरिंग वर्कर (5.1%), प्राथमिक शिक्षक (4.5%), प्रोडक्शन सर्विस वर्कर (4.3%), सिक्योरिटी गार्ड (3.5%), सॉफ्टवेयर डेवलपर (3.3%), क्लर्क (3.2%), ट्रक या वैन चालक (3%) और कुक (2.9%) शामिल हैं।

यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि भारत में वेतनभोगी रोजगार केवल कॉरपोरेट सेक्टर तक सीमित नहीं है बल्कि सेवा और विनिर्माण क्षेत्र भी बड़ी संख्या में रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं।

सामाजिक सुरक्षा अब भी बड़ी चुनौती

रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक पहलू सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा है। वेतनभोगी कर्मचारियों में से 57% लोगों को अपनी कंपनी से पेंशन या पीएफ जैसी सुविधा नहीं मिलती। करीब 72% कर्मचारियों के पास नियोक्ता द्वारा उपलब्ध कराई गई स्वास्थ्य सुविधा नहीं है, जबकि 85% कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का लाभ भी नहीं मिलता।

इतना ही नहीं, आधे से अधिक कर्मचारियों के पास लिखित रोजगार अनुबंध तक नहीं है। इससे नौकरी की सुरक्षा और श्रमिक अधिकार दोनों प्रभावित होते हैं। विभिन्न श्रम अध्ययनों के अनुसार भारत के कुल कार्यबल में केवल 6-7% लोग ही स्थायी और नियमित वेतनभोगी रोजगार में हैं।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

श्रम अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारत में रोजगार की गुणवत्ता सुधारना अब सबसे बड़ी चुनौती है। केवल नौकरी की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि नियमित रोजगार, बेहतर वेतन, महिलाओं की श्रम भागीदारी, कौशल विकास और सामाजिक सुरक्षा को भी समान महत्व देना होगा। इसके साथ ही औपचारिक रोजगार बढ़ाने और श्रम कानूनों के प्रभावी पालन से कर्मचारियों की आय और जीवन स्तर दोनों में सुधार संभव है।

स्रोत: डेटा फॉर इंडिया, वर्ल्ड बैंक (World Development Indicators), राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) का पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) 2023-24, रोजगार-बेरोजगार सर्वे 2011-12।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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