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IndiGo Q4 Results 2026: IndiGo को ₹2,536 करोड़ का झटका! घाटे में पहुंची देश की सबसे बड़ी एयरलाइन
IndiGo Q4 Results 2026: मार्च 2026 तिमाही में IndiGo को ₹2,536 करोड़ का घाटा, फॉरेक्स नुकसान और बढ़ते खर्च बने बड़ी वजह
IndiGo Q4 Results 2026
IndiGo Q4 Results 2026: आर्थिक तौर पर अस्थिरता से गुजर रहे इस दौर में देश का हर सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। जीससे एविएशन भी अछूता नहीं रहा है। इसी क्रम ने देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो को वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में बड़ा झटका लगा है। एक साल पहले जहां कंपनी हजारों करोड़ रुपये का मुनाफा कमा रही थी, वहीं अब वह भारी घाटे में पहुंच गई है। मार्च 2026 तिमाही में इंडिगो ने 2,536.3 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया है। यह नतीजा बाजार की उम्मीदों से भी काफी कमजोर रहा। सबसे बड़ा कारण विदेशी मुद्रा विनिमय (फॉरेक्स) नुकसान और एकमुश्त बढ़ रहे खर्चों ने कंपनी की बैलेंस शीट पर गहरा असर डाला।
जहां पिछले साल कमाया था मुनाफा अब इस साल भारी घाटा
मार्च 2025 तिमाही में इंडिगो ने 3,067.5 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया था। लेकिन इस बार तस्वीर पूरी तरह बदल गई। कंपनी को 2,536.3 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। दिलचस्प बात यह है कि शेयर बाजार के विश्लेषकों को करीब 1,871 करोड़ रुपये के मुनाफे की उम्मीद थी, लेकिन वास्तविक नतीजे अनुमान से काफी खराब निकले।
इस प्रदर्शन ने निवेशकों को भी चौंका दिया क्योंकि परिचालन स्तर पर एयरलाइन की यात्री संख्या और क्षमता दोनों में बढ़ोतरी देखने को मिली थी।
आय बढ़ी, लेकिन खर्च उससे कहीं ज्यादा
इंडिगो की कुल आय में गिरावट नहीं आई। मार्च तिमाही के दौरान कंपनी का रेवेन्यू 1.3 फीसदी बढ़कर 22,438.4 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 22,151.9 करोड़ रुपये था।
हालांकि बढ़ती कमाई कंपनी को घाटे से नहीं बचा सकी। वजह यह रही कि ईंधन, मेंटेनेंस, कर्मचारियों और वित्तीय लागत से जुड़े खर्च तेजी से बढ़े। कुल खर्च बढ़कर 25,932.5 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि एक साल पहले यह 19,928.1 करोड़ रुपये था।
विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव बड़ी चुनौती
इंडिगो के नतीजों में सबसे बड़ा झटका विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव से आया है। असल में एयरलाइन उद्योग का बड़ा हिस्सा डॉलर आधारित भुगतान पर निर्भर करता है। विमान लीज, मेंटेनेंस और कई अन्य खर्च विदेशी मुद्रा में किए जाते हैं। इधर लगातार बढ़ती डॉलर की कीमतों ने कमर तोड़ने का काम किया है। मार्च तिमाही में कंपनी को 4,823 करोड़ रुपये का फॉरेक्स नुकसान हुआ। इसके मुकाबले पिछले साल इसी तिमाही में उसे 136.6 करोड़ रुपये का फॉरेक्स लाभ मिला था। यही बदलाव कंपनी को मुनाफे से घाटे में ले जाने वाले सबसे बड़े कारणों में शामिल रहा।
ऑपरेटिंग प्रॉफिट में आई बड़ी गिरावट
कंपनी के परिचालन प्रदर्शन पर भी दबाव साफ दिखाई दिया। इंडिगो का EBITDAR 67.9 फीसदी गिरकर 2,227.8 करोड़ रुपये रह गया। पिछले साल इसी अवधि में यह 6,948.2 करोड़ रुपये था। वहीं EBITDAR मार्जिन भी 31.4 फीसदी से घटकर केवल 9.9 फीसदी रह गया। इसका मतलब है कि एयरलाइन की ऑपरेटिंग कमाई पर लागत का दबाव काफी बढ़ गया है।
नए श्रम कानूनों और अन्य खर्चों का असर
फॉरेक्स नुकसान के अलावा इंडिगो ने करीब 250 करोड़ रुपये के एकमुश्त खर्च भी दर्ज किए। ये मुख्य रूप से नए श्रम कानूनों को लागू करने से जुड़े थे। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने कुल 1,796.4 करोड़ रुपये के एकमुश्त खर्च दर्ज किए। इनमें नए लेबर कोड लागू करने की लागत, दिसंबर 2025 में परिचालन बाधाओं के कारण उड़ानों के रद्द होने से जुड़ा खर्च, यात्रियों को दिया गया मुआवजा और DGCA द्वारा लगाया गया जुर्माना शामिल है।
यात्रियों की संख्या बढ़ी लेकिन नहीं हुआ मुनाफा
कमजोर वित्तीय नतीजों के बावजूद परिचालन मोर्चे पर इंडिगो का प्रदर्शन सकारात्मक रहा। मार्च तिमाही में एयरलाइन की क्षमता (ASK) 3.4 फीसदी बढ़कर 43.6 अरब उपलब्ध सीट किलोमीटर हो गई। वहीं यात्रियों की संख्या 1.1 फीसदी बढ़कर 3.16 करोड़ तक पहुंच गई। यह आंकड़े बताते हैं कि यात्रियों की मांग बनी हुई है और कंपनी का नेटवर्क विस्तार जारी है। लेकिन इन सारे सकारात्मक परिणामों के बावजूद कंपनी का मुनाफा घाटे में तब्दील होता जा रहा है।
शेयर बाजार में भी दिखा असर
कमजोर नतीजों से पहले ही निवेशकों की चिंता शेयर में दिखाई देने लगी थी। शुक्रवार को इंटरग्लोब एविएशन का शेयर 3.28 फीसदी गिरकर 4,420 रुपये पर बंद हुआ।
पिछले छह महीनों में शेयर करीब 24 फीसदी टूट चुका है, जबकि वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक इसमें लगभग 14 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाली तिमाहियों में निवेशकों की नजर फॉरेक्स जोखिम, ईंधन लागत और एयरलाइन की लाभप्रदता पर बनी रहेगी। यदि ये दबाव कम होते हैं तो इंडिगो दोबारा मजबूत वापसी कर सकती है।
निराशाजनक था इस पूरे वित्तवर्ष का प्रदर्शन
सिर्फ चौथी तिमाही ही नहीं, पूरा वित्त वर्ष 2025-26 भी इंडिगो के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। कंपनी का वार्षिक ऑपरेशनल रेवेन्यू बढ़कर 84,961.9 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष में 80,802.9 करोड़ रुपये था। इसके बावजूद कंपनी को पूरे साल में 2,393.6 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा उठाना पड़ा। इसके ठीक एक साल पहले, यानी FY25 में इंडिगो ने 7,258.4 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था। ऐसे में एक साल के भीतर मुनाफे से घाटे में जाना निवेशकों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
इंडिगो के पास नहीं है नकदी की कमी
हालांकि घाटे के बावजूद कंपनी की बैलेंस शीट मजबूत बनी हुई है। वित्त वर्ष 2026 के अंत तक इंडिगो के पास 51,651 करोड़ रुपये की नकदी और नकदी समकक्ष उपलब्ध थे।
इसके अलावा एयरलाइन का बेड़ा बढ़कर 441 विमानों तक पहुंच गया है, जो भविष्य में विस्तार की उसकी योजनाओं को मजबूती देता है।
FY27 को लेकर क्या है कंपनी की उम्मीद?
इंडिगो प्रबंधन का मानना है कि आने वाले समय में स्थिति बेहतर हो सकती है। कंपनी ने अनुमान जताया है कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में उसकी क्षमता 3 से 4 फीसदी तक बढ़ सकती है। मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल भाटिया के मुताबिक FY26 एयरलाइन उद्योग के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साल रहा। उन्होंने कहा कि फॉरेक्स नुकसान और एकमुश्त खर्चों को अलग कर दिया जाए तो कंपनी ने पूरे साल में 7,502.5 करोड़ रुपये का लाभ कमाया होता।
उनके अनुसार कंपनी का मूल कारोबार अभी भी मजबूत है और यात्री मांग में लगातार वृद्धि देखने को मिल रही है।


