ITR Filing Last Date 2026: 31 जुलाई है डेडलाइन, देरी हुई तो लगेगी लेट फीस, जानिए पूरी गाइड

ITR Filing Last Date 2026: ITR Filing की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है। देरी होने पर लेट फीस, ब्याज और टैक्स लाभ का नुकसान हो सकता है। जानें पूरी ITR Filing गाइड।

Yogesh Mishra
Published on: 30 July 2026 7:54 PM IST
ITR Filing Last Date 2026
X

ITR Filing Last Date 2026

ITR Filing Last Date 2026: वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की समय-सीमा अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। आयकर विभाग के अनुसार, वेतनभोगी कर्मचारियों और उन व्यक्तिगत करदाताओं के लिए, जिनका टैक्स ऑडिट अनिवार्य नहीं है, ITR दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है। यदि आपने अभी तक अपना रिटर्न दाखिल नहीं किया है, तो अंतिम समय की हड़बड़ी से बचते हुए जल्द प्रक्रिया पूरी करना बेहतर रहेगा।

समय-सीमा चूकने पर केवल लेट फीस ही नहीं देनी पड़ सकती, बल्कि ब्याज, कुछ कर लाभों का नुकसान और अन्य वित्तीय परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि किस श्रेणी के करदाता के लिए कौन-सी अंतिम तिथि तय है और देरी होने पर क्या असर पड़ेगा।

किसे कब तक भरना है ITR?

आयकर विभाग ने अलग-अलग श्रेणी के करदाताओं के लिए अलग-अलग अंतिम तिथियां निर्धारित की हैं।

- 31 जुलाई 2026 तक वेतनभोगी कर्मचारी, पेंशनभोगी, एक या अधिक मकान संपत्ति अथवा कैपिटल गेन्स से आय अर्जित करने वाले ऐसे व्यक्ति और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF), जिनका टैक्स ऑडिट आवश्यक नहीं है, अपना ITR-1 या ITR-2 दाखिल करेंगे।

- 31 अगस्त 2026 तक व्यवसाय या पेशे से आय अर्जित करने वाले ऐसे व्यक्तिगत करदाता, HUF और फर्म, जिनका टैक्स ऑडिट आवश्यक नहीं है, ITR-3 या ITR-4 दाखिल कर सकते हैं। इसमें फ्रीलांसर, प्रोफेशनल और प्रिजम्पटिव टैक्सेशन योजना अपनाने वाले करदाता भी शामिल हैं।

- 31 अक्टूबर 2026 उन व्यवसायियों और पेशेवरों के लिए अंतिम तिथि है जिनके खातों का टैक्स ऑडिट आयकर अधिनियम की धारा 44AB के तहत अनिवार्य है।

अगर कोई करदाता निर्धारित समय-सीमा तक रिटर्न दाखिल नहीं कर पाता है, तो वह 31 दिसंबर 2026 तक विलंबित या संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकता है, लेकिन इसके साथ लेट फीस और अन्य शर्तें लागू होंगी।

समय-सीमा चूकने पर कितना होगा नुकसान?

अगर 31 जुलाई के बाद रिटर्न दाखिल किया जाता है तो आयकर अधिनियम की धारा 234एफ के तहत लेट फीस देनी पड़ती है।

अगर आपकी कुल आय 5 लाख रुपये तक है तो अधिकतम 1,000 रुपये की लेट फीस लगेगी। वहीं 5 लाख से अधिक आय होने पर 5,000 तक की लेट फीस देनी पड़ सकती है। हालांकि यदि आपकी आय कर-मुक्त सीमा से कम है तो कुछ मामलों में इस पेनल्टी से राहत मिल सकती है।

इसके अलावा यदि टैक्स का भुगतान बाकी है तो धारा 234एके तहत बकाया कर पर 1 प्रतिशत प्रति माह की दर से ब्याज भी देना होगा। यह ब्याज 1 अगस्त से वास्तविक भुगतान की तारीख तक लगाया जाता है।

देरी से ITR भरने के अन्य नुकसान

समय पर रिटर्न दाखिल न करने का असर केवल लेट फीस तक सीमित नहीं रहता।

यदि शेयर बाजार, F&O ट्रेडिंग या व्यवसाय में आपको घाटा हुआ है तो उसे भविष्य के वर्षों के मुनाफे से समायोजित करने का अधिकार समाप्त हो सकता है। केवल हाउस प्रॉपर्टी से संबंधित घाटे के मामले में कुछ राहत उपलब्ध रहती है।

इसके अलावा जो करदाता पुराने टैक्स सिस्टम का विकल्प चुनना चाहते हैं, उनके लिए समय-सीमा के भीतर रिटर्न दाखिल करना महत्वपूर्ण है। निर्धारित समय के बाद दाखिल किए गए कई मामलों में पुरानी कर व्यवस्था चुनने का विकल्प उपलब्ध नहीं रहता और डिफॉल्ट रूप से नई टैक्स व्यवस्था लागू हो सकती है।

न्यू टैक्स रिजीम में क्या हैं टैक्स स्लैब?

यदि किसी करदाता ने अलग से विकल्प नहीं चुना है तो आयकर विभाग डिफॉल्ट रूप से न्यू टैक्स रिजीम लागू करता है।

इस व्यवस्था में 3 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगता। 3 लाख से 6 लाख तक 5 प्रतिशत, 6 लाख से 9 लाख तक 10 प्रतिशत, 9 लाख से 12 लाख तक 15 प्रतिशत, 12 लाख से 15 लाख तक 20 प्रतिशत और 15 लाख से अधिक आय पर 30 प्रतिशत टैक्स देय होता है।

नई कर व्यवस्था में वेतनभोगियों को 75,000 तक का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है। साथ ही धारा 87ए के तहत निर्धारित सीमा तक टैक्स छूट का लाभ भी उपलब्ध है, जिससे कम आय वाले वेतनभोगियों का टैक्स बोझ काफी कम हो जाता है।

ओल्ड टैक्स रिजीम कब फायदेमंद है?

पुरानी टैक्स व्यवस्था उन करदाताओं के लिए उपयोगी हो सकती है जो धारा 80सी के तहत निवेश, मेडिक्लेम (80डी), एचआरए, होम लोन ब्याज और अन्य टैक्स छूटों का दावा करना चाहते हैं।

हालांकि पुरानी व्यवस्था का लाभ लेने के लिए समय पर ITR दाखिल करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए जिन करदाताओं की टैक्स प्लानिंग इन छूटों पर आधारित है, उन्हें अंतिम तिथि का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

ITR भरने से पहले यह चेकलिस्ट जरूर देखें

- रिटर्न दाखिल करने से पहले फॉर्म-16, बैंक स्टेटमेंट, ब्याज प्रमाणपत्र और यदि लागू हो तो शेयर या म्यूचुअल फंड के कैपिटल गेन्स स्टेटमेंट अपने पास रखें।

- इसके बाद आयकर पोर्टल पर उपलब्ध Annual Information Statement (AIS) और Tax Information Summary (TIS) में दर्ज जानकारी का अपने दस्तावेजों से मिलान करें।

- अपनी आय के अनुसार सही ITR फॉर्म का चयन करें। वेतनभोगी और सामान्य आय वाले अधिकांश करदाताओं के लिए ITR-1 उपयुक्त होता है, जबकि कैपिटल गेन्स जैसी आय होने पर ITR-2 दाखिल करना पड़ता है।

- इसके बाद फॉर्म 26AS से अपने टीडीएस का मिलान अवश्य करें ताकि टैक्स क्रेडिट में कोई त्रुटि न रह जाए।

- सबसे महत्वपूर्ण चरण ई-वेरिफिकेशन है। ITR जमा करने के बाद आधार ओटीपी, नेट बैंकिंग या अन्य उपलब्ध माध्यम से समय पर ई-वेरीफाई करना अनिवार्य है। यदि रिटर्न ई-वेरिफाई नहीं किया जाता तो उसे अमान्य माना जा सकता है।

अंतिम समय की जल्दबाजी से बचें

अंतिम दिन पोर्टल पर भारी ट्रैफिक, दस्तावेजों की कमी या तकनीकी समस्याओं के कारण कई करदाताओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसलिए बेहतर यही है कि निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने से पहले सभी दस्तावेजों का मिलान कर सही जानकारी के साथ आईटीआर दाखिल कर दिया जाए। इससे न केवल लेट फीस और ब्याज से बचा जा सकता है, बल्कि भविष्य में रिफंड और अन्य कर संबंधी प्रक्रियाएं भी बिना किसी बाधा के पूरी हो सकेंगी।

Yogesh Mishra
ABOUT THE AUTHOR

Yogesh Mishra

Founder & CEO Mail ID - mishrayogesh5@gmail.commishrayogesh5@gmail.com

Journalism for Yogesh Mishra is not a profession but a mission. In his career, spanning over 26 years, he has served just not as journalist but an educationist and literary as well. Looking at journalism as an instrument of change, he has also highlighted corruption and problems faced in various sectors like education, health, water, sanitation and agriculture. The exposes to his credit which deserve mention include largest tax evasion in the country by Hasan Ali and the fraud committed by 25 Indians, while he was working for the Outlook magazine as the UP Bureau Head. The amount involved was whopping Rs 18,000 crores. He was the first to report the PMO’s involvement in the ‘2G Spectrum Scam’, during the UPA regime. Another commendable work by him is exposing the Commonwealth Games Scam along with the video footage of a meeting before the beginning of the tournament. The issue of banning the video is sub judice. His news item, “Uttar Pradesh ke sau gaon bhi Nirmal Gram Pusaraskar ke layak nahi” exposed how the state government wrongly claimed prizes for 1,269 villages. It led to the cancellation of the prizes. Even UNICEF research testified and led to discontinuation of the NIRMAL GRAM AWARDS. He is, presently Member of Fee Review committee set up by the government of Uttar Pradesh to fight menace of arbitrary fee structure in private schools across the state. Many of his suggestions concerning electoral reforms have been adopted and implemented by the Election Commission of India. He was a member of the ‘Navoday Vidyalaya Samiti’, review committee constituted by Govt. of India for the implementation of Sarv Siksha Abhiyaan in UP. Besides writing in national and international newspapers and magazines, he has taken up teaching assignments and served as a visiting faculty in about a dozen universities. Author of ten books, he has also received prestigious Madhu Limaye and Yash Bharti awards. His new goal is to set up a new media house. A beginning has been already made as he has launched a multi-lingual news portal and a weekly magazine, Apna Bharat.

Next Story