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LPG Cylinder Price Hike: 59 हजार करोड़ का आंकड़ा आखिर क्या बताता है?
LPG Cylinder Price Hike: घरेलू LPG पर तेल कंपनियों की अंडर-रिकवरी अगस्त में घटकर ₹188 रह गई है। जानें क्या बढ़ सकते हैं गैस सिलेंडर के दाम।
LPG Cylinder Price Hike: Will Gas Cylinder Prices Rise?
LPG Cylinder Price Hike: रसोई गैस सिलेंडर की कीमत को लेकर एक बार फिर आम लोगों की चिंता बढ़ सकती है। घरेलू एलपीजी की बिक्री पर सरकारी तेल कंपनियों को होने वाला घाटा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। संसद में सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, अगस्त 2026 में 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर तेल कंपनियों की अंडर-रिकवरी करीब 188 रुपये रह गई है। जुलाई में यह करीब 500 रुपये और जून में 700 रुपये प्रति सिलेंडर से अधिक थी। वहीं, घरेलू एलपीजी से जुड़ी सरकारी देनदारी 59 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंच चुकी है।
59 हजार करोड़ का आंकड़ा आखिर क्या बताता है?
यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है। 59 हजार करोड़ रुपये का आंकड़ा सीधे तौर पर यह नहीं बताता कि तेल कंपनियों को केवल जुलाई में इतना घाटा हुआ है। यह घरेलू एलपीजी पर लंबे समय से बनी अंडर-रिकवरी और सरकार की ओर से कंपनियों को किए जाने वाले भुगतान से जुड़ा बड़ा वित्तीय बोझ है। इसलिए इसे सीधे-सीधे ‘एक महीने का घाटा’ मानना सही नहीं होगा।
घरेलू एलपीजी की कीमत सरकार और तेल कंपनियां आम उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय बाजार की पूरी लागत के हिसाब से तुरंत नहीं देतीं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी महंगी होती है और घरेलू सिलेंडर की कीमत उससे कम रहती है, तो लागत और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर अंडर-रिकवरी बन जाता है।
जून में 700 रुपये से ज्यादा था अंतर
इस साल अंतरराष्ट्रीय एलपीजी कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने घरेलू गैस की लागत पर बड़ा दबाव डाला। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, जून में एक 14.2 किलोग्राम सिलेंडर की आपूर्ति लागत 1,600 रुपये से ज्यादा पहुंच गई थी, जबकि सामान्य घरेलू उपभोक्ता के लिए दिल्ली में कीमत 942 रुपये थी। इस आधार पर कंपनियों की अंडर-रिकवरी करीब 700 रुपये प्रति सिलेंडर बैठ रही थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस तेजी की बड़ी वजह पश्चिम एशिया में तनाव और आपूर्ति से जुड़ी चिंता रही। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी से जून के बीच सऊदी सीपी एलपीजी बेंचमार्क करीब 46 फीसदी बढ़ा था। इसका सीधा असर भारत में एलपीजी की खरीद लागत पर पड़ा।
जुलाई में राहत, अगस्त में और कम हुआ घाटा
हालांकि, स्थिति अब कुछ सुधरी है। जुलाई में घरेलू एलपीजी पर तेल कंपनियों की अंडर-रिकवरी करीब 500 रुपये प्रति सिलेंडर थी, जो अगस्त में घटकर करीब 188 रुपये रह गई। यानी अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की लागत कम होने से कंपनियों पर पड़ने वाला तत्काल दबाव काफी घटा है। इस बदलाव का मतलब यह भी है कि फिलहाल घरेलू गैस की कीमत पर तुरंत बड़ा दबाव नहीं बन रहा। अगर अंतरराष्ट्रीय एलपीजी कीमतें आगे भी नियंत्रित रहती हैं तो कंपनियों का घाटा और कम हो सकता है।
सरकार पहले ही दे चुकी है 52 हजार करोड़ रुपये
घरेलू एलपीजी की कीमत को किफायती रखने के लिए केंद्र सरकार तेल विपणन कंपनियों को मुआवजा देती रही है। सरकार ने 2023 में घरेलू एलपीजी पर हुए नुकसान के लिए करीब 22,000 करोड़ रुपये की भरपाई की थी। इसके बाद 2025-26 के लिए तीन सरकारी तेल कंपनियों—इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के लिए 30,000 करोड़ रुपये के मुआवजे को मंजूरी दी गई। इस तरह करीब 52,000 करोड़ रुपये की सहायता का आंकड़ा सामने आता है।
30,000 करोड़ रुपये का मुआवजा 12 किस्तों में दिया जाना है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य कंपनियों की वित्तीय स्थिति को संभालना और घरेलू उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय कीमतों के उतार-चढ़ाव से बचाना है।
क्या अब महंगा होगा घरेलू LPG सिलेंडर?
अभी उपलब्ध जानकारी में ऐसा कोई नया ऐलान नहीं हुआ है कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत फिर बढ़ाई जा रही है। उल्टा, अगस्त में प्रति सिलेंडर अंडर-रिकवरी घटकर 188 रुपये रहना कुछ राहत का संकेत माना जा रहा है।
इसका मतलब यह भी नहीं है कि कीमतें हमेशा इसी स्तर पर रहेंगी। एलपीजी की अंतरराष्ट्रीय कीमत, रुपये की डॉलर के मुकाबले स्थिति, आयात लागत और सरकार की सब्सिडी नीति जैसे कारक घरेलू सिलेंडर की कीमत को प्रभावित कर सकते हैं। यदि वैश्विक कीमतें फिर तेजी से बढ़ती हैं और सरकार कंपनियों को पूरा मुआवजा नहीं देती, तो आगे चलकर उपभोक्ताओं पर कुछ बोझ डाले जाने की संभावना बन सकती है।
उज्ज्वला उपभोक्ताओं को मिलती है अलग राहत
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए व्यवस्था अलग है। सरकार ने 2026 में पहले चार रिफिल पर 300 रुपये प्रति सिलेंडर की सहायता जारी रखने की बात कही है। यानी पात्र उज्ज्वला परिवार को साल में चार सिलेंडर तक सीधे सब्सिडी का लाभ मिल सकता है। कीमतों में तेजी को लेकर असली तस्वीर आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय एलपीजी कीमतों और सरकार की मुआवजा नीति पर निर्भर करेगी।


