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Made in India Toys: दुनिया में बजा 'मेड इन इंडिया' खिलौनों का डंका, 7 साल में 89% बढ़ा एक्सपोर्ट
Made in India Toys Exports: भारत के खिलौनों का निर्यात 7 साल में 89% बढ़ा। जानें कैसे Make in India, BIS और सरकारी नीतियों ने बदली तस्वीर।
Made in India Toys Exports: Rise 89% in 7 Years, Imports Fall as Global Demand Grows
Made in India Toys Exports: बेमिसाल हुनर से तराशे गए काठ के खिलौने हों या कच्ची मिट्टी को आकार देकर बनाए गए रंग-बिरंगे खिलौने, भारत की पारंपरिक कारीगरी हमेशा से दुनिया को आकर्षित करती रही है। सदियों पुरानी इस कला में बच्चों की कल्पनाओं को आकार देने का अनोखा हुनर छिपा है। एक दौर ऐसा भी आया जब भारतीय बाजार सस्ते विदेशी, खासकर चीनी खिलौनों से भर गए और देसी खिलौने पीछे छूटने लगे। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। 'मेड इन इंडिया' खिलौने न सिर्फ घरेलू बाजार में अपनी मजबूत वापसी कर चुके हैं, बल्कि दुनिया के बड़े देशों में भी तेजी से अपनी पहचान बना रहे हैं। सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पिछले सात वर्षों में भारत के खिलौना निर्यात में 89.1 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है, जबकि आयात में 37.5 प्रतिशत की कमी आई है। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि भारतीय कारीगरों का हुनर अब वैश्विक बाजार में नई उड़ान भर रहा है। मौजूदा समय में भारत न सिर्फ अपने बच्चों के लिए बेहतर और सुरक्षित खिलौने बना रहा है, बल्कि दुनिया के बड़े देशों को भी बड़े पैमाने पर खिलौने निर्यात कर रहा है।
निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी ने बदली भारत की पहचान
लोकसभा में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018-19 की तुलना में 2025-26 के दौरान भारत से खिलौनों का निर्यात 89.1 प्रतिशत बढ़ा है। दूसरी ओर विदेशों से खिलौने मंगाने में 37.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इससे साफ है कि भारत अब केवल खिलौनों का बड़ा बाजार नहीं, बल्कि दुनिया के लिए भरोसेमंद खिलौना निर्माता भी बन रहा है। अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी सहित कई विकसित देशों में भारतीय खिलौनों की मांग लगातार बढ़ रही है।
भारतीय कारीगरों की कला को मिला वैश्विक मंच
भारत में लकड़ी, मिट्टी, कपड़े और बांस से खिलौने बनाने की परंपरा सदियों पुरानी है। कर्नाटक के चन्नापटना के लकड़ी के खिलौने, राजस्थान की कठपुतलियां, उत्तर प्रदेश के पारंपरिक हस्तनिर्मित खिलौने और मिट्टी के रंग-बिरंगे खिलौने अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी पसंद किए जा रहे हैं। निर्यात बढ़ने से इन पारंपरिक कारीगरों को नए ग्राहक मिले हैं साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।
सख्त गुणवत्ता नियमों से बढ़ा लोगों का भरोसा
कुछ वर्ष पहले भारतीय बाजार में बिकने वाले कई विदेशी खिलौने गुणवत्ता के मानकों पर खरे नहीं उतरते थे। वर्ष 2019 में हुई जांच में केवल 33 प्रतिशत खिलौने ही गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाए गए थे। इसके बाद सरकार ने भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के गुणवत्ता प्रमाणन को अनिवार्य किया और निगरानी सख्त कर दी। अब देश में बिकने वाले लगभग 95 प्रतिशत खिलौने तय गुणवत्ता मानकों पर खरे उतर रहे हैं। इससे बच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ उपभोक्ताओं का भरोसा भी बढ़ा है।
सरकारी नीतियों ने घरेलू उद्योग को दी नई ताकत
खिलौना उद्योग की इस सफलता के पीछे सरकार की कई नीतियों का अहम योगदान रहा है। विदेशी खिलौनों पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाई गई, गुणवत्ता मानकों को अनिवार्य बनाया गया और 'मेक इन इंडिया' तथा 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहन दिया गया। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को भी आर्थिक सहायता और तकनीकी सहयोग मिला, जिससे देश में खिलौना निर्माण तेजी से बढ़ा।
नई शिक्षा नीति से भी बढ़ी देसी खिलौनों की मांग
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में बच्चों की शुरुआती पढ़ाई में खेल आधारित शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत स्थानीय और भारतीय खिलौनों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे शैक्षणिक और कौशल विकसित करने वाले खिलौनों की मांग तेजी से बढ़ी है। कई भारतीय कंपनियां अब ऐसे खिलौने बना रही हैं जो बच्चों के मानसिक विकास और सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।
भारत मंडपम के मेले ने खोले वैश्विक बाजार के दरवाजे
4 से 7 जुलाई 2026 के बीच नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 'टॉय बिज इंटरनेशनल' प्रदर्शनी भारतीय खिलौना उद्योग के लिए बड़ा अवसर साबित हुई। इस प्रदर्शनी में देश की 400 से अधिक कंपनियों ने अपने उत्पाद प्रदर्शित किए। 40 से ज्यादा देशों के खरीदार और कारोबारी यहां पहुंचे और भारतीय कंपनियों के साथ व्यापारिक साझेदारी में रुचि दिखाई। इससे भारतीय निर्माताओं को नए निर्यात बाजार मिलने की उम्मीद और मजबूत हुई है।
रोजगार और अर्थव्यवस्था को भी मिल रहा बड़ा लाभ
खिलौना उद्योग के विस्तार का असर केवल निर्यात तक सीमित नहीं है। इससे लाखों कारीगरों, डिजाइनरों, पैकेजिंग इकाइयों, परिवहन और छोटे उद्योगों को भी रोजगार मिल रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक हस्तशिल्प को नया बाजार मिला है और महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक खिलौना उद्योग में अपनी हिस्सेदारी और बढ़ा सकता है।


