Malti River Revival: 3.60 करोड़ से बदलेगी अमेठी की मालती नदी की तस्वीर

Malti River Revival: अमेठी की मालती नदी के कायाकल्प के लिए 3.60 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। जानें नदी की लंबाई, गांव और पुनरोद्धार योजना।

Jyotsana Singh
Published on: 18 Aug 2026 10:44 AM IST
Malti River Revival: ₹3.60 Crore Plan to Restore Amethi’s Malti River Malti River Revival: ₹3.60 Crore Plan to Restore Amethi’s Malti River
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Malti River Revival: ₹3.60 Crore Plan to Restore Amethi’s Malti River 

Malti River Revival: कभी गांवों की प्यास बुझाने और खेतों की सिंचाई का सहारा रही नदियां आज कई जगह अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही हैं। ऐसी ही कहानी अमेठी की मालती नदी की है। समय के साथ सिल्ट, अव्यवस्था और अवैध मिट्टी खनन जैसी समस्याओं ने इसकी धार को कमजोर कर दिया है। अब ‘एक जनपद, एक नदी’ अभियान के तहत मालती नदी को फिर से जीवंत करने की तैयारी है। नदी के पुनरोद्धार और कायाकल्प के लिए करीब 3.60 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही धरातल पर काम शुरू कराया जाएगा।

सिंचाई विभाग को बनाया गया नोडल विभाग

मालती नदी के पुनरोद्धार की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग को दी गई है। अधिशासी अभियंता शारदा सहायक खंड-41 की ओर से अधिकारियों ने नदी का मौके पर निरीक्षण किया। इसके बाद नदी की मौजूदा स्थिति और जरूरतों के आधार पर कार्ययोजना तैयार की गई। प्रस्ताव को नमामि गंगे योजना के तहत शासन को भेजा गया है। मुख्य विकास अधिकारी पूजा साहू ने बताया कि शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। मंजूरी मिलते ही मालती नदी का पुनरोद्धार और कायाकल्प कराया जाएगा। उनके मुताबिक नदी के सुधरने से आसपास के लोगों को सीधा फायदा मिलेगा और भूगर्भ जल स्तर को भी बेहतर करने में मदद मिलेगी।

39 किलोमीटर से अधिक लंबी है मालती नदी

मालती नदी अमेठी और प्रतापगढ़ के बीच प्राकृतिक जल निकासी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसकी कुल लंबाई 39.393 किलोमीटर बताई गई है। इसमें करीब 31.693 किलोमीटर हिस्सा अमेठी और 7.700 किलोमीटर हिस्सा प्रतापगढ़ में आता है।

नदी का उद्गम संग्रामपुर क्षेत्र के बड़गांव स्थित खरहा से माना जाता है। इसके बाद यह विभिन्न गांवों से होकर प्रतापगढ़ के ग्राम जलालपुर, ब्लॉक मगरौरा के चमरौरा में पहुंचती है, जहां यह सई नदी की सहायक नदी के रूप में मिलती है। इस तरह मालती सिर्फ स्थानीय जलधारा नहीं, बल्कि बड़े नदी तंत्र का भी हिस्सा है।

इन गांवों से होकर गुजरती है नदी

मालती नदी के किनारे बड़ी संख्या में गांव बसे हैं। इनमें सोनारी कला, घोरहा, भादर, टीकरमाफी, तिवारीपुर, नोनरा, करनाईपुर, कोलवा, सहजीपुर, नरवा, शुकुलपुर, अमिलहना, पतापुर, टिकरिया, भौसिंहपुर, सोनारी, भैरवपुर, गोरखापुर, विशेषरगंज, हिम्मतगढ़, डेहरा, ककवा और महराजपुर समेत अन्य गांव शामिल हैं।

इन गांवों के लोगों का नदी से रिश्ता केवल पानी तक सीमित नहीं रहा है। खेती, पशुपालन और स्थानीय जल व्यवस्था में मालती नदी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। नदी के पुनर्जीवित होने से बरसाती पानी के बेहतर संचयन और खेतों तक नमी पहुंचने की उम्मीद है।

रामघाट से जुड़ी है धार्मिक आस्था

मालती नदी का महत्व केवल भौगोलिक और पर्यावरणीय नहीं है। इससे स्थानीय लोगों की धार्मिक और पौराणिक आस्था भी जुड़ी हुई है। मान्यता है कि वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने संग्रामपुर क्षेत्र में नदी के किनारे विश्राम और स्नान किया था। नदी के तट से जुड़ा यह स्थान आज रामघाट (ठेंगहा) के नाम से जाना जाता है।

यही वजह है कि नदी के पुनरोद्धार को स्थानीय लोग केवल जल संरक्षण की परियोजना के तौर पर नहीं, बल्कि अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को बचाने के प्रयास के रूप में भी देख रहे हैं।

सिल्ट और अवैध खनन से कमजोर हुई धार

स्थानीय लोगों के अनुसार संरक्षण के अभाव में नदी की स्थिति लगातार खराब हुई है। कई स्थानों पर सिल्ट जमा होने और अवैध मिट्टी खनन जैसी गतिविधियों ने नदी के प्राकृतिक स्वरूप को प्रभावित किया है। इससे जलधारा और जल संचयन की क्षमता पर भी असर पड़ा है।

ऐसे में नदी का कायाकल्प केवल सफाई तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं होगा। प्राकृतिक जलधारा को बनाए रखना, नदी क्षेत्र को अतिक्रमण और अवैध गतिविधियों से बचाना, जरूरत के अनुसार गाद हटाना तथा किनारों पर हरियाली बढ़ाना भी लंबे समय के लिए जरूरी होगा।

प्रदेश में छोटी नदियों को फिर मिल रही नई जिंदगी

उत्तर प्रदेश में ‘एक जनपद, एक नदी’ अभियान के तहत हर जिले में स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण नदी या जलधारा के पुनरोद्धार पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य छोटी और उपेक्षित होती जा रही नदियों को उनकी प्राकृतिक स्थिति में वापस लाना है। अभियान में नदी की सफाई, सिल्ट हटाने, जलधारा को खोलने, पौधरोपण, तालाबों के पुनर्जीवन और जनभागीदारी जैसे उपायों को शामिल किया जा रहा है।

कानपुर की नून और जौनपुर की पीली जैसी नदियों के पुनरोद्धार के उदाहरण भी सामने आए हैं, जहां स्थानीय लोगों की भागीदारी, सफाई और जलधारा को खोलने जैसे प्रयासों से नदियों में फिर पानी का प्रवाह बहाल हुआ।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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